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54 साल के बाद दुनिया को फिर से क्यों याद आए चंदा मामा, भारत से है खास कनेक्शन

चंद्रमा पर पहला इंसान 20 जुलाई 1969 को उतरा था. उसके बाद 1972 तक 12 इंसानों ने चांद पर चहलकदमी की. लेकिन 1972 के बाद चंद्रमा को बंजर और बेकार मानकर भुला दिया गया. फिर भारत के चंद्रयान ने नई राह दिखाई. उसकी खोजों ने दुनिया का नजरिया ही बदल दिया.

54 साल के बाद दुनिया को फिर से क्यों याद आए चंदा मामा, भारत से है खास कनेक्शन
  • चंद्रमा पर पहला इंसान 1969 में उतरा था. उसके बाद 1972 तक 12 इंसानों ने चांद पर चहलकदमी की
  • भारत ने भले ही चांद पर कदम न रखा हो, लेकिन चंद्रमा में रुचि जगाने का बड़ा श्रेय उसे ही जाता है
  • नासा का आर्टेमिस-2 मिशन चार लोगों को चंद्रमा के करीब लेकर जाएगा, लेकिन चांद पर लैंड नहीं करेगा
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इंसान एक बार फिर चंदा मामा की तरफ कदम बढ़ा रहा है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा अपने आर्टेमिस-2 मिशन के जरिए 4 इंसानों को चंद्रमा की तरफ भेज रही है. इसका अगला पड़ाव पृथ्वी के इस प्राकृतिक उपग्रह पर उतरने का होगा. चंद्रमा पर आखिरी बार इंसान 1972 में उतरा था. उसके बाद इसे 'बंजर और बेकार' मानकर भुला दिया गया. दशकों तक किसी देश ने इस पर ध्यान नहीं दिया. फिर आया साल 2008. भारत के चंद्रयान-1 मिशन ने चांद के प्रति दुनिया का नजरिया ही बदल दिया. 

चांद पर 12 चहलकदमी, फिर खामोशी

चंद्रमा पर पहला इंसान 20 जुलाई 1969 को उतरा था. उसके बाद 1969 से लेकर 1972 के बीच 12 इंसानों ने चांद पर चहलकदमी की. 1972 के दिसंबर में अपोलो-17 आखिरी मिशन था, जिसके जरिए मानव को चंद्रमा पर भेजा गया था. उसके बाद से रोबोट्स के जरिए ही इंसानों पर खोजबीन की जाती रही. अब 54 साल के बाद इतिहास फिर से करवट ले रहा है. नासा आर्टेमिस 2 मिशन के जरिए इंसानों को चंद्रमा की तरफ भेज रहा है. 

May be an image of crater and eclipse

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चांद को मान लिया था बंजर और बेकार

भारत के किसी व्यक्ति ने भले ही चांद पर कदम न रखा हो, लेकिन चंद्रमा को लेकर मानवों की रुचि फिर से जगाने का बड़ा श्रेय भारत को जाता है. 1972 के ओपोलो मिशन के बाद चंद्रमा दुनिया के दिमाग से लगभग ओझल होने लगा था. उस दौर में चांद से लाए गए सैंपलों के आधार पर यह नतीजा निकाल लिया था कि चांद पूरी तरह सूखा, प्राचीन और भूगर्भीय रूप से मृत है. वहां न पानी है, न जीवन की कोई संभावना और न ही वहां पर फिर से जाने का कोई ठोस कारण. नतीजतन, दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने चांद से मुंह मोड़कर अपना पृथ्वी की निचली कक्षा पर कर लिया. 

Lost Eight Years Ago, ISRO's Chandrayaan-1 Found Orbiting The Moon

भारत ने बदली दुनिया की सोच

चंद्रमा को लेकर दुनिया की उदासीनता उस वक्त टूटी, जब 2008 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) का चंद्रयान-1 चांद की कक्षा में पहुंचा. चंद्रयान के साथ गए मून इम्पैक्ट प्रोब को जानबूझकर चंद्रमा के साउथ पोल पर क्रैश कराया गया. इस तरह भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने वाला पहला देश बन गया. यहां उसने जो खोजा, वह दुनिया की धारणा को बदलने वाला साबित हुआ. इस मिशन के जरिए चंद्रमा पर पानी के अणु होने के पुख्ता सबूत सामने आए. चंद्रयान-1 के डेटा ने चांद पर हीलियम-3 के विशाल भंडार के संकेत भी दिए, जिसे भविष्य में न्यूक्लियर फ्यूजन ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. 

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चंद्रयान की खोजों ने दिखाई राह

इसके 15 साल बाद, भारत ने चंद्रयान-3 के जरिए नया इतिहास रचा. अगस्त 2023 में विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग की. ऐसा पहले कोई भी देश नहीं कर पाया था. उसके साथ गए प्रज्ञान रोवर ने अहम खोजें कीं. इसके स्पेक्ट्रोमीटर ने चंद्रमा की सतह पर मौजूद तत्वों की पहचान की. इसमें एल्यूमीनियम, कैल्शियम, आयरन, टाइटेनियम, क्रोमियम और सल्फर की पुष्टि हुई. इनमें सल्फर की मौजूदगी सबसे अहम थी. इसने इस सोच को बदला कि चंद्रमा किस तरह बना और विकसित हुई. 

With India's One Giant Step, Chandrayaan 3, Moon Race Heats Up

चंद्रमा पर बर्फ होने का पता लगाया

विक्रम लैंडर पर लगे ChaSTE के जरिए मापे गए चंद्रमा की सतह के तापमान से चौंकाने वाली जानकारी मिली. पहली बार पता चला कि हाई एल्टिट्यूड वाले साउथ पोल का तापमान अनुमान से कहीं ज्यादा है. ये भी पता चला कि दक्षिणी ध्रुव के अंधेरे गड्ढों में सतह के नीचे अब भी अरबों टन बर्फ दबी हो सकती है. चंद्रयान-3 ने सर्फेस के पास प्लाज्मा का भी पहली बार पता लगाया. विक्रम के इंस्ट्रूमेंट्स को सतह पर चार्ज्ड पार्टिकल्स भी मिले. इन नतीजों ने चंद्रमा को लेकर इंसानों की धारणा बदल दी और उसे भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए फिर से अहम बना दिया. 

Next year, the 'Great Age of Space Voyages' opens wide... to the Moon, to  asteroids, to Earth orbit - 경향신문

भारत की राह पर आगे बढ़ रहा आर्टेमिस

अब नासा का आर्टेमिस 2 मिशन उसी राह पर आगे बढ़ रहा है, जो भारत ने दिखाई थी. इस मिशन में 4 इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है. ये पहले धरती के 2 चक्कर लगाएंगे, उसके बाद चांद के पास तक पहुंचेंगे. चंद्रमा पर हालांकि लैंड नहीं करेंगे. लेकिन चंद्रमा के चारों तरफ घूमेंगे और फिर लौट आएंगे. उनकी नजरें खासकर चंद्रमा के डार्क साइड पर होंगी. उसके बाद आर्टेमिस-3 मिशन में इंसान फिर से जाएंगे और तब चांद पर उतरेंगे. 

करीब 10 दिनों का आर्टेमिस 2 मिशन इस मायने में खास होगा कि पहली बार इंसान दूर तक जाएंगे, चंद्रमा के उस इलाके तक पहुंचेंगे, जो अब तक इंसानी नजरों से आमतौर पर ओझल रहा है. लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और अंतरिक्ष में इंसानों के टिकने की क्षमता को अपने दम पर परखेंगे और वापस आएंगे. उनका ये अनुभव भविष्य के स्पेस प्रोग्राम की आधारशिला साबित होगा. इस तरह भारत ने ही दुनिया को यकीन दिलाया है कि चंदा मामा केवल कहानियों के लिए ही नहीं बल्कि भविष्य की ऊर्जा और संसाधनों के लिए भी अहम हैं. ॉ

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