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ईरान में सजा-ए-मौत का खौफनाक रिकॉर्ड! एक साल में ही 2 हजार से अधिक फांसी, टूटा 44 साल का रिकॉर्ड

मानवाधिकार संगठन 'एमनेस्टी इंटरनेशनल' ने बताया है कि साल 2025 में पूरी दुनिया में कम से 2700 लोगों को मौत की सजा दी गई. इसमें अकेले ईरान में 2100 लोगों की फांसी की सजा दी गई है.

ईरान में सजा-ए-मौत का खौफनाक रिकॉर्ड! एक साल में ही 2 हजार से अधिक फांसी, टूटा 44 साल का रिकॉर्ड

दुनियाभर में सजा-ए-मौत (फांसी) के मामलों को लेकर एक बेहद डराने वाली और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. मानवाधिकार संगठन 'एमनेस्टी इंटरनेशनल' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 के दौरान अकेले ईरान में ही कम से कम 2,159 लोगों को फांसी की सजा दी गई. यह आंकड़ा कितना खौफनाक है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ईरान में साल 1981 के बाद यानी पिछले 44 सालों में किसी भी एक साल के भीतर दी गई यह सबसे ज्यादा फांसी है. ईरान में साल 2024 के मुकाबले 2025 में फांसी के मामलों में दोगुने से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड बढ़ोतरी और चीन का 'सीक्रेट'

अगर पूरी दुनिया की बात करें, तो एमनेस्टी इंटरनेशनल ने साल 2025 में वैश्विक स्तर पर कम से कम 2,707 लोगों को फांसी दिए जाने की पुष्टि की है. यह संख्या साल 2024 की तुलना में दो-तिहाई से भी ज्यादा है. हालांकि, मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इस वैश्विक आंकड़े में चीन के आंकड़े शामिल नहीं हैं. चीन को दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश माना जाता है, लेकिन वहां की सरकार मौत की सजा से जुड़े डेटा को 'स्टेट सीक्रेट' (सरकारी गोपनीयता) मानकर छिपाकर रखती है.

एमनेस्टी का मानना है कि चीन जानबूझकर फांसी की खबरों को दबाता है ताकि वह जनता को यह संदेश दे सके कि सरकार सार्वजनिक सुरक्षा या स्थिरता के खिलाफ किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगी. चीन के इन छिपे हुए हजारों मामलों को छोड़ दिया जाए, तो भी आधिकारिक तौर पर दर्ज 2,707 का यह आंकड़ा साल 1981 के बाद से दुनिया में सबसे बड़ा है, जिसने मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं.

इजरायल-अमेरिका से जंग का असर?

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ईरान में फांसी के मामलों में यह चौंकाने वाली बढ़ोतरी तब देखी गई, जब वहां के हुक्मरानों ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मौत की सजा को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. खासकर जून 2025 में इजरायल के साथ भड़की जंग के बाद ईरानी प्रशासन ने अपनी जनता की आवाज दबाने, असंतोष को कुचलने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों को ताक पर रखने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों को फंदे पर लटकाया.

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल की सोमवार को जारी हुई इस रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है.
  • रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक स्तर पर भी साल 2025 में फांसी के मामलों में भारी उछाल आया है.
  • इसका मुख्य कारण ईरान और सऊदी अरब जैसे देशों में दी गई बेतहाशा सजा-ए-मौत है.
  • संगठन ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए जर्मनी सहित दुनिया की अन्य सरकारों से इस क्रूरता के खिलाफ एक स्पष्ट और सख्त रुख अपनाने की मांग की है.

यह खूनी सिलसिला यहीं नहीं थमा है. एमनेस्टी और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने माना है कि साल 2026 में भी ईरान इसी रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. जनवरी 2026 में हुए प्रदर्शनों और इजरायल और अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच ईरान ने फांसी की रफ्तार और तेज कर दी है. विरोध प्रदर्शनों से जुड़े आरोपों और प्रतिबंधित संगठनों की सदस्यता के नाम पर लोगों को लगातार मौत के घाट उतारा जा रहा है. ईरान का यह आंकड़ा नॉर्वे के एक एनजीओ 'इरान ह्यूमन राइट्स' की ओर से इस साल की शुरुआत में जारी अनुमानों से भी कहीं ज्यादा है.

खाड़ी देशों और सऊदी अरब में भी बढ़ा फांसी का ग्राफ

ईरान के अलावा मध्य पूर्व के अन्य देशों में भी यही भयावह ट्रेंड देखने को मिला है, भले ही वहां का पैमाना ईरान से थोड़ा कम हो. सऊदी अरब ने साल 2025 में कम से कम 356 लोगों को फांसी दी. यह संख्या साल 2024 में दिए गए 345 फांसी के उसके अपने ही रिकॉर्ड से ज्यादा है. खाड़ी के अन्य देशों में भी स्थिति तेजी से बिगड़ी है.

कुवैत में सजा-ए-मौत के मामले लगभग तीन गुना बढ़ गए. जहां 2024 में वहां 6 लोगों को फांसी दी गई थी, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 17 हो गई. इसी तरह मिस्र में यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 13 से 23 पर पहुंच गया. यमन में भी गृहयुद्ध और तनाव के बीच फांसी के मामले एक-तिहाई से ज्यादा बढ़ गए और वहां सालभर में कम से कम 51 लोगों को मौत की सजा दी गई.

अमेरिका और सिंगापुर में भी टूटे कई सालों के रिकॉर्ड

यह ट्रेंड सिर्फ खाड़ी या एशियाई देशों तक ही सीमित नहीं रहा. पूरे अमेरिकी महाद्वीप में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) एकमात्र ऐसा देश रहा जहां 2025 में फांसी दी गई. अमेरिका में फ्लोरिडा राज्य के भीतर अचानक बढ़ी मुस्तैदी और वहां रिकॉर्ड 19 फांसियों के चलते देश का कुल आंकड़ा 47 तक पहुंच गया. अमेरिका के लिए साल 2009 के बाद से सजा-ए-मौत का यह सबसे बड़ा आंकड़ा है.

दूसरी ओर, सख्त कानूनों के लिए जाने जाने वाले एशियाई देश सिंगापुर में भी साल 2025 के दौरान 17 लोगों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया. सिंगापुर के इतिहास में साल 2003 के बाद से यह फांसी की सबसे बड़ी संख्या है.

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