- एक नई स्टडी में पता चला है कि NFL के हर चार खिलाड़ियों में से कम से कम एक को गंभीर दिमागी बीमारी CTE होती है
- मृतकों के दिमाग की जांच में दस में से नौ खिलाड़ियों में क्रॉनिक ट्रॉमेटिक एन्सेफैलोपैथी (CTE) की पुष्टि हुई है
- CTE सिर पर बार-बार चोट लगने से होती है और इसके लक्षणों में सोचने में दिक्कत तथा आत्महत्या के विचार शामिल हैं
अमेरिका के सबसे पसंदीदा खेल अमेरिकन फुटबॉल की असली कीमत अब सामने आ रही है. यह खिलाड़ियों के लिए मौत का खेल साबित हो रहा है. एक नई स्टडी के मुताबिक, अमेरिकी फुटबॉल की लीग NFL में खेलने वाले हर चार खिलाड़ियों में से कम से कम एक में गंभीर दिमागी बीमारी पाई गई है, जो धीरे-धीरे दिमाग को नुकसान पहुंचाती है. दुनिया से जाने के बाद जिन खिलाड़ियों के दिमागों को जांचा गया उनमें तो 10 में से 9 के दिमाग में यह बीमारी पाई गई है. इस खुलासे के बाद एक बार फिर इस खतरनाक धक्का-मुक्की और ताकत वाले खेल में खिलाड़ियों की जान की सुरक्षा को लेकर अमेरिका में बात होने लगी है.
क्या है यह बीमारी?
इस बीमारी का नाम क्रॉनिक ट्रॉमेटिक एन्सेफैलोपैथी (CTE) है. यह सिर पर बार-बार चोट लगने के कारण होती है. इसके लक्षणों में सोचने और याददाश्त में परेशानी, चलने में दिक्कत, भावनाओं पर नियंत्रण न रहना और आत्महत्या के विचार आना शामिल हैं. यानी स्थिति बहुत खराब हो सकती है. CTE का संबंध पहले भी अमेरिकन फुटबॉल और बॉक्सिंग जैसे ऐसे खेलों से पाया गया है, जिनमें खिलाड़ियों के सिर पर बार-बार चोट लगती है. लेकिन पहली बार पता चला है कि स्थिति इतनी खराब है. यहां तक कि विस्फोटों की चपेट में आने वाले सेना के जवानों में भी यह बीमारी पाई गई है.
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार अब यह नई स्टडी हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर डैनियल डैनेशवर के नेतृत्व में की गई है. इसे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छापा गया है. रिसर्चर्स ने उन खिलाड़ियों के दिमाग की जांच की, जिनकी मौत हो चुकी थी और जिन्होंने 1949 के बाद NFL का कम से कम एक मैच खेला था. 1949 से खिलाड़ियों के लिए प्लास्टिक हेलमेट पहनना जरूरी किया गया था.
स्टडी में क्या पता चला?
स्टडी में सबसे अहम आंकड़े 2016 से 2021 के बीच हुई मौतों से मिले. इस दौरान दिमाग दान करने के मामले सबसे ज्यादा थे. इन छह सालों में 878 NFL खिलाड़ियों की मौत हुई. इनमें से 235 के दिमाग दान किए गए और उनकी जांच हुई. इनमें 215 खिलाड़ियों के दिमाग में CTE की पुष्टि हुई. यानी जिन दिमागों की जांच की गई उनमें से हर 10 में से 9 में यह दिमागी बीमारी पाई गई. अगर यह मान भी लें कि जिन खिलाड़ियों के दिमाग की जांच नहीं हुई, उनमें किसी को भी CTE नहीं थी, तब भी इसका मतलब है कि कम से कम 24.5 प्रतिशत खिलाड़ियों में CTE थी. यानी हर 4 में से 1 को. य
CTE का अधिकतम अनुमान 97.7 प्रतिशत तक हो सकता है. हालांकि, रिसर्चर्स का कहना है कि असली आंकड़ा इन दोनों के बीच कहीं होने की संभावना है. रिसर्चर्स ने इस बात की भी जांच की कि CTE कितनी गंभीर हो रही है. उन्हें गंभीर CTE और मौत से पहले डिमेंशिया (याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में लगातार गिरावट) के बीच संबंध मिला. खिलाड़ियों में डिमेंशिया था या नहीं, यह उनकी मेडिकल रिपोर्ट और परिवार के सदस्यों से बातचीत के आधार पर पता किया गया. इन सभी नतीजों से पता चला है कि NFL खिलाड़ियों की मौत के समय CTE होने की दर पहले किए गए कई आम आबादी वाली स्टडी में सामने आई दर से ज्यादा है.
उन्होंने यह भी लिखा कि खिलाड़ियों की मौत के समय CTE कितनी गंभीर थी, उसका डिमेंशिया से साफ संबंध था और इन खिलाड़ियों में डिमेंशिया आम था.
(इनपुट- एएफपी)
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