- अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए B-2 स्टील्थ बॉम्बर का फिर इस्तेमाल किया
- चार B-2 स्टील्थ बॉम्बरों ने अमेरिका से ईरान तक नॉन-स्टॉप उड़ान भरकर भारी बमबारी की
- B-2 बॉम्बर विशेष रूप से भारी बंकर बम ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है
अमेरिका ने ईरान पर बम बरसाने के लिए उसी बॉम्बर का एक बार फिर इस्तेमाल किया, जिससे पिछले साल जून में ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट को तबाह किया गया था. इसे B-2 स्टील्थ बॉम्बर के नाम से जाना जाता है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के एक अधिकारी ने फॉक्स न्यूज को इसकी जानकारी दी है. अधिकारी ने बताया कि ईरान पर हमला करने के लिए B-2 स्टील्थ बॉम्बर का इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने बताया कि चार B-2 स्टील्थ बॉम्बर ने ईरान पर 2 हजार किलो वजनी दर्जनों बम गिराए थे.
B-2 स्टील्थ बॉम्बर अमेरिका के सबसे मॉडर्न जेट में से एक है. ये हजारों किलो के बम ले जा सकता है. खास बात ये है कि अमेरिका से ईरान के बीच इतनी दूरी होने के बाद भी ये बॉम्बर नॉन-स्टॉप उड़ान भर सकता है. पिछले साल जून में जब अमेरिका ने ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट- इस्फहान, नतांज और फोर्दो में बंकर बम गिराए थे. ये बम B-2 स्टील्थ बॉम्बर से ही गिराए गए थे.
अब अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमले के लिए इन बॉम्बर का इस्तेमाल किया है. पेंटागन के अधिकारी ने बताया कि चार B-2 स्टील्थ बॉम्बर ने अमेरिका से ईरान तक नॉन-स्टॉप राउंड ट्रिप की थी और अंडरग्राउंड बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स पर दर्जनों 2 हजार वजनी बम गिराए थे.
B-2 बॉम्बर की जरूरत क्यों पड़ी?
इन बॉम्बर का इस्तेमाल ज्यादा वजनी बम को गिराने के लिए किया जाता है. चूंकि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल की प्रोडक्शन फैसेलिटी अंडरग्राउंड थी, इसलिए इन्हें तबाह करने के लिए बंकर बम की जरूरत पड़ती है. ये बम जमीन के नीचे कई किलोमीटर जाकर फैसेलिटी को तबाह कर सकते हैं. B-2 बॉम्बर खास तौर पर इस तरह के बम ले जाने के लिए ही डिजाइन किया गया है. हालांकि, अब तक ये साफ नहीं है कि ईरान पर हमले के लिए किन बमों का इस्तेमाल किया गया था.

B-2 बॉम्बर को खास बनाती है इसकी डिजाइन
B-2 स्टील्थ बॉम्बर अमेरिका का लंबी दूरी का स्टील्थ बॉम्बर है. इसने पहली बार 1989 में उड़ान भरी थी. 1993 से ये अमेरिकी वायुसेना में है. इसे नॉर्थरॉप ग्रुमैन कंपनी ने बनाया है. इसका विंग बहुत चौड़ा होता है और इसमें कोई टेल नहीं होती.
यही डिजाइन इसे खास बनाता है. इस डिजाइन के कारण B-2 बॉम्बर बाकी फाइटर जेट से थोड़ा लंबा होता है. इसकी लंबाई 69 फीट होती है, जबकि इसके विंग्स की चौड़ाई 172 फीट. इस डिजाइन के कारण कॉम्बैट रेंज में इसका पता नहीं चल पाता. B-2 बॉम्बर से अब तक का सबसे बड़ा हमला 21 जून 2025 को ही हुआ था, जब अमेरिका ने ईरान में न्यूक्लियर साइट्स पर बम बरसाए थे.
और क्या खासियत है इसमें?
B-2 स्टील्थ बॉम्बर एक बार में 18 हजार किलो तक का पेलोड ले जा सकता है. इसकी खास बात ये है कि ये लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है. ये बॉम्बर बिना फ्यूल भरे लगभग 11 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है, जबकि उड़ान के दौरान एक बार फ्यूल भरने पर ये 18,500 किलोमीटर तक जा सकता है. इससे ये विमान दुनिया में किसी भी स्थान पर कुछ ही घंटों में पहुंच सकता है.

इसका इंजन भी बड़ा खास है. एक B-2 बॉम्बर में चार जनरल इलेक्ट्रिक F-118 इंजन होते हैं. ये इंजन विंग्स के अंदर ही छिपे होते हैं. इंजन को विंग्स के अंदर इसलिए छिपाया गया है, ताकि रडार की पकड़ में न आ सके.
इतना ही नहीं, इसके अंदर एक खास तरह का लेजर रडार सिस्टम लगा है, जो ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचने पर पायलट को सिग्नल भेजता है. इससे पायलट विमान को थोड़ा ऊपर या नीचे कर लेता है. ऐसा इसलिए क्योंकि एक ऊंचाई पर उड़ने पर इंजन से धुआं निकलता है, जिससे किसी विमान के आने का अंदाजा लगाया जा सकता है. दुश्मन को ये धुआं न दिखे, इसलिए ये लेजर रडार सिस्टम लगाया गया है.
अमेरिका के पास ऐसे कितने बॉम्बर?
1980 के दशक में अमेरिका ने ऐसे स्टील्थ बॉम्बर बनाने का फैसला लिया था. शुरुआत में ऐसे 132 बॉम्बर बनाए जाने थे. लेकिन इसकी लागत ज्यादा होने के कारण 21 ही बनाए गए. अमेरिका के पास 21 B-2 बॉम्बर हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक B-2 बॉम्बर बनाने पर लगभग 1.3 अरब डॉलर का खर्च आता है.
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