
अमेरिका मध्य-पूर्व में तैनात अपने विमानवाहक पोतों की संख्या को बढ़ाकर दो कर रहा है, जिसमें से एक को वहां पर रखा जाएगा और दूसरे को इंडो-पैसिफिक में भेजा जाएगा. पेंटागन ने मंगलवार को यह कहा है. पेंटागन ने यह घोषणा ऐसे वक्त में की है, जब अमेरिका की सेना यमन के हूती विद्रोहियों पर लगभग रोजाना हवाई हमले कर रही है, जिसका उद्देश्य इस इलाके में सिविलयन शिपिंग और मिलिट्री जहाजों के लिए उत्पन्न खतरे को समाप्त करना है. साथ ही इस विमानवाहक पोत को भेजने को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को हमले की धमकी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने एक बयान में कहा कि कार्लविंसन मध्य पूर्व में हैरी एस. ट्रूमैन के साथ शामिल होगा, जिससे "क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके, आक्रामकता को रोका जा सके और क्षेत्र में वाणिज्य के मुक्त प्रवाह की रक्षा की जा सके."
एयर डिफेंस क्षमताएं होंगी मजबूत: पार्नेल
पार्नेल ने इस इलाके के लिए जिम्मेदार अमेरिकी सैन्य कमान का जिक्र करते हुए कहा, "CENTCOM समुद्री हालात को बेहतर बनाने के लिए सेक्रेटरी ने अतिरिक्त स्क्वाड्रन और अन्य एयर असेट्स की तैनाती का भी आदेश दिया है, जो हमारी रक्षात्मक एयर डिफेंस क्षमताओं को और मजबूत करेंगे."
उन्होंने कहा, "अमेरिका और उसके साझेदार CENTCOM (जिम्मेदारी के क्षेत्र) में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और इलाके में संघर्ष को व्यापक या बढ़ाने की कोशिश करने वाले किसी भी देश या या अन्य का जवाब देने के लिए तैयार हैं."
हूती विद्रोहियों के हमले से पड़ा था असर
2023 में गाजा युद्ध की शुरुआत के बाद हूती विद्रोहियों ने फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता का दावा करते हुए लाल सागर और अदन की खाड़ी में शिपिंग को निशाना बनाना शुरू किया था.
हूती हमलों ने जहाजों को स्वेज नहर से गुजरने से रोक दिया है. यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से आमतौर पर दुनिया का करीब 12 प्रतिशत शिपिंग ट्रैफ़िक गुजरता है. हूती विद्रोहियों के हमलों ने कई कंपनियों को दक्षिणी अफ्रीका के सिरे के आसपास एक महंगे चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया.
हूतियों के लिए विकल्प साफ है: डोनाल्ड ट्रंप
विमानवाहक पोत को भेजे जाने की घोषणा से एक दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कसम खाई थी कि यमन के हूती विद्रोहियों पर हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक कि वे शिपिंग के लिए कोई खतरा नहीं रह जाते.
ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा, "हूतियों के लिए विकल्प साफ है: अमेरिकी जहाजों पर गोलीबारी बंद करो और हम तुम पर गोलीबारी बंद कर देंगे. अन्यथा, हमने अभी तो शुरुआत ही की है, और हूतियों और ईरान में उनके प्रायोजकों दोनों के लिए असली दर्द अभी आना बाकी है."
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 15 मार्च से लगातार हमलों के कारण हूतियों को "खत्म" कर दिया गया है, उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना "हर दिन और रात उन पर हमला करती है - और भी ज्यादा कठोर."
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दी है बड़ी धमकी
उन्होंने ईरान को लेकर भी बयानबाजी तेज कर दी है. राष्ट्रपति ने धमकी दी है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करता है तो "बमबारी की जाएगी."
ट्रंप की धमकियां ऐसे वक्त में आई हैं, जब उनका प्रशासन यमन हमलों पर वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों द्वारा एक सीक्रेट ग्रुप चैट के अचानक से लीक होने के स्कैंडल से जूझ रहा है.
अटलांटिक पत्रिका ने पिछले सप्ताह खुलासा किया कि उसके संपादक एक प्रसिद्ध अमेरिकी पत्रकार को अनजाने में ही व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सिग्नल ऐप पर एक चैट में शामिल कर लिया गया था, जहां शीर्ष अधिकारी हमलों पर चर्चा कर रहे थे.
ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ सहित अधिकारियों ने हवाई हमले के समय और खुफिया जानकारी के विवरण पर चर्चा की. वह इस बात से अनजान थे कि अत्यधिक संवेदनशील जानकारी को मीडिया के एक सदस्य द्वारा पढ़ा जा रहा था.
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