
(फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
अमेरिका की तरफ से एक ताजा बयान जारी हुआ है जिसके अनुसार वह आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ
काम करना की इच्छा रखता है. अमेरिकी रक्षामंत्री जिम मैटिस ने कहा है कि अमेरिका आतंकवाद से लड़ने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करने की इच्छा रखता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी जिम्मेदार देश ऐसा करना चाहेगा. आतंकी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पाकिस्तान पर निशाना साधने के बाद से दोनों देशों के बीच के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं. मैटिस ने गुरुवार को मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, ‘हम आतंकियों को मार गिराने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करना चाहते हैं.
यह भी पढ़ें : पाकिस्तान को चीन और रूस के करीब ला सकती है अमेरिका की नई अफगान नीति: रिपोर्ट
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कांग्रेस से कहा था कि उसने इस्लामाबाद को 25.50 करोड़ डॉलर की मदद इस शर्त पर दी है कि वह इस मदद का इस्तेमाल तभी कर सकता है.जब वह आतंकी संगठनों के खिलाफ और अधिक कार्रवाई करे. विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'मंत्रालय (विदेश) इन निधियों के व्यय और उन्हें किसी खास तरह के विदेशी सैन्य वित्तपोषण (एफएमएफ) विक्रय अनुबंधों के लिए आवंटित करने पर विराम लगा रहा है.' अमेरिका ने यह फैसला लिया है क्योंकि उसके पास दो विकल्प थे- पहला यह पैसा पाकिस्तान को उपलब्ध कराना और दूसरा इस्तेमाल नहीं हुए धन को वापस राजकोष विभाग को लौटा देना.
VIDEO : मोदी की यात्रा से और मजबूत हुए भारत-अमेरिकी संबंध
(इनपुट भाषा से)
काम करना की इच्छा रखता है. अमेरिकी रक्षामंत्री जिम मैटिस ने कहा है कि अमेरिका आतंकवाद से लड़ने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करने की इच्छा रखता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी जिम्मेदार देश ऐसा करना चाहेगा. आतंकी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पाकिस्तान पर निशाना साधने के बाद से दोनों देशों के बीच के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं. मैटिस ने गुरुवार को मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, ‘हम आतंकियों को मार गिराने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करना चाहते हैं.
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गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कांग्रेस से कहा था कि उसने इस्लामाबाद को 25.50 करोड़ डॉलर की मदद इस शर्त पर दी है कि वह इस मदद का इस्तेमाल तभी कर सकता है.जब वह आतंकी संगठनों के खिलाफ और अधिक कार्रवाई करे. विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'मंत्रालय (विदेश) इन निधियों के व्यय और उन्हें किसी खास तरह के विदेशी सैन्य वित्तपोषण (एफएमएफ) विक्रय अनुबंधों के लिए आवंटित करने पर विराम लगा रहा है.' अमेरिका ने यह फैसला लिया है क्योंकि उसके पास दो विकल्प थे- पहला यह पैसा पाकिस्तान को उपलब्ध कराना और दूसरा इस्तेमाल नहीं हुए धन को वापस राजकोष विभाग को लौटा देना.
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(इनपुट भाषा से)
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