- अमेरिका के ईरान युद्ध में व्यस्त रहने के कारण चीन दुनिया के बॉस होने का तमगा हासिल कर रहा है
- अफगानिस्तान सरकार ने बताया कि उसके दूत पाकिस्तान के साथ वार्ता के लिए चीन के उरुमकी शहर में पहुंच गए हैं
- पाकिस्तान ने पुष्टि की कि वह अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से संघर्ष समाप्ति के लिए बातचीत कर रहा है
अमेरिका के ईरान जंग में बिजी होने के कारण चीन बॉस बनकर उभर रहा है. यूरोप से लेकर एशिया तक के देश उसके पास पहुंच रहे हैं. यहां तक की अमेरिका का सबसे खासमखास कनाडा भी चीन से संपर्क बेहतर बनाने में लगा हुआ है. इसी बीच आज अफगानिस्तान सरकार ने बताया कि पाकिस्तान के साथ वार्ता के लिए उसके दूत चीन पहुंच चुके हैं. वहीं पाकिस्तान ने कंफर्म किया कि वह अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहा है. अब तक दो मुल्कों के झगड़े सुलझाने का काम अमेरिका किया करता था, मगर अब धीरे-धीरे चीन उसकी जगह लेने की कोशिश कर रहा है.
चीन क्यों आया बीच में
एक साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच चीन के उरुमकी शहर में बातचीत हो रही है. अंद्राबी ने बताया कि अफगानिस्तान का मुद्दा विदेश मंत्री इशाक डार की इस सप्ताह बीजिंग यात्रा के दौरान उठाया गया था. मतलब साफ है कि डार ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात के दौरान अफगानिस्तान को लेकर अपनी पीड़ा बताई. इसके बाद चीन ने अफगानिस्तान से संपर्क किया और अब दोनों पक्ष चीन में मीटिंग के लिए हाजिर हो चुके हैं.
पाकिस्तान क्या चाहता है
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कथित वार्ताओं के बारे में पूछे जाने पर ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान ने चीन गए प्रतिनिधिमंडल को अफगानिस्तान से सीमावर्ती आतंकवाद को रोकने के लिए एक स्थायी समाधान की ओर ले जाने वाली विश्वसनीय प्रक्रिया का समर्थन करने की अपनी सुसंगत स्थिति और दीर्घकालिक प्रथा के अनुरूप भेजा है. उन्होंने कहा, "हमारी भागीदारी हमारी मुख्य चिंताओं की पुनरावृति है. हालांकि, वास्तविक प्रक्रिया का भार अफगानिस्तान पर है, जिसे पाकिस्तान के खिलाफ अफगान धरती का उपयोग करने वाले आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस और सत्यापन योग्य कार्रवाई प्रदर्शित करनी होगी. 26 फरवरी को अफगानिस्तान में कथित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन गजब-ल-हक शुरू करने के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला बड़ा संपर्क है.
पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्यों भिड़े
इस्लामाबाद ने तालिबान प्रशासन से बार-बार आग्रह किया है कि वह अफगान धरती पर कथित आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करे, विशेषकर प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े ठिकानों को. अधिकारियों का कहना है कि इन अपीलों पर ध्यान नहीं दिया गया है. 26 फरवरी की रात को ऑपरेशन गजब-लिल-हक शुरू किया गया, जिसे पाकिस्तान ने सीमा पार से अफगान तालिबान द्वारा "बिना उकसावे के की गई गोलीबारी" बताया. अब देखने वाली बात ये है कि क्या चीन पाकिस्तान-अफगानिस्तान के झगड़े को समाप्त करवा पाता है, क्योंकि अब तक खाड़ी देश कई बार ऐसी कोशिश कर चुके हैं, मगर दोनों में से कोई नहीं माना.
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