यमन में सत्ता संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार को यमन के हद्रामौत प्रांत में यूएई समर्थित Southern Transitional Council (STC) के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसमें 7 अलगाववादी लड़ाकों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हो गए. यह पिछले महीने STC द्वारा हद्रामौत और महरा प्रांतों के बड़े हिस्से पर कब्जा करने के बाद गठबंधन की पहली सीधी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है.
STC के सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, हवाई हमले अल-खशा सैन्य शिविर पर किए गए, जहां भारी नुकसान हुआ. इसके अलावा सैयून शहर के हवाई अड्डे और सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाया गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलों के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है.
कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ाई!
STC ने इन घटनाओं को अपने अस्तित्व की लड़ाई बताया है. संगठन का दावा है कि वह 'कट्टरपंथी इस्लामवाद' के खिलाफ लड़ रहा है, जो लंबे समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की प्राथमिकता रहा है. हालांकि, सऊदी अरब समर्थित स्थानीय बलों ने कहा कि उनका अभियान युद्ध की घोषणा नहीं है, बल्कि सैन्य ठिकानों को 'शांतिपूर्ण तरीके से' अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश है.
कभी सहयोगी रहे देश यमन में आमने-सामने
सऊदी अरब और यूएई दोनों, वर्षों से यमन में अलग-अलग गुटों का समर्थन करते आए हैं. कभी सहयोगी रहे ये दोनों खाड़ी देश अब सरकार नियंत्रित इलाकों में प्रभाव को लेकर आमने-सामने हैं. यूएई ने ताजा हमलों के बाद कहा कि उसने यमन से अपनी अंतिम आतंकवाद-रोधी सेनाएं भी वापस बुला ली हैं और वह तनाव कम करने तथा संवाद के पक्ष में है.
यमन सरकार पहले से ही आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है. STC की तेज़ बढ़त ने दक्षिण यमन के दोबारा अलग देश बनने की आशंका को हवा दे दी है, जिससे ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के साथ चल रही शांति वार्ताओं पर भी संकट गहरा गया है.
एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट ऑपरेशन ठप
इस बीच, अदन हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन ठप हो गया है. फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स के अनुसार, 24 घंटे से अधिक समय तक कोई विमान न तो उतरा और न ही उड़ा. यह संकट साफ तौर पर दिखाता है कि यमन में सत्ता की लड़ाई अब सिर्फ़ राजनीतिक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय ताकतों के टकराव का मैदान बन चुकी है.
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