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AI सिर्फ इंजीनियर्स नहीं, लेखकों की भी नौकरी खाएगा? अच्छी कहानी लिखने पर हुए रिसर्च ने चौंकाया

एक स्टडी में पाया गया है कि AI से बनी कहानियों की क्वालिटी को इंसानों द्वारा लिखी गई कहानियों से बेहतर रेटिंग मिली है.

AI सिर्फ इंजीनियर्स नहीं, लेखकों की भी नौकरी खाएगा? अच्छी कहानी लिखने पर हुए रिसर्च ने चौंकाया
क्या इंसानों से भी अच्छी कहानी लिखने लगा है AI (फोटो- NDTV)

क्या क्रिएशन यानी कुछ नई रचना करने के मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों से आगे निकल गया है? क्या AI इंसानों से भी अच्छी कहानी रच सकता है? एक ऐसा रिसर्च सामने आया है, जिसने इस सवाल का हैरान कर देने वाला जवाब दिया है. एक स्टडी में पाया गया है कि AI से रची गई नई कहानियों की क्वालिटी इंसानों द्वारा लिखी गई कहानियों से बेहतर आंकी गई. रेटिंग देने वाले भी खुद इंसान थे. यानी इंसान ही मानने लगा है कि AI उससे अच्छी कहानी लिख रहा है और कमाल की बात थी कि स्टडी में जिन्होंने यह बात मानी, उन्हें यह बताया भी नहीं गया था कि किस कहानी को AI ने लिखा है और किस कहानी को एक इंसान ने.

स्टडी में क्या पता चला?

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार 'जजमेंट एंड डिसीजन मेकिंग' जर्नल में छपी एक स्टडी में 1,682 वयस्कों को शामिल किया गया. इन्हें छह छोटी कहानियों में से कोई एक कहानी पढ़ने के लिए कहा गया. इनमें से तीन कहानियां इंसानों ने लिखी थीं और तीन ChatGPT ने. हर AI कहानी का सब्जेक्ट (विषय) इंसानों की लिखी कहानियों में से किसी एक जैसा ही था.

टीम ने इन प्रतिभागियों को बताया कि उनकी कहानी किसी इंसान ने लिखी है या AI ने. इसके बाद रिसर्चर्स ने प्रतिभागियों से कहानी की क्वालिटी और यह कितनी दिलचस्प और मन को बांधने वाली थी, इस पर रेटिंग देने को कहा. जिन लोगों ने AI से बनी कहानी पढ़ी, उन्होंने उसे इंसान की लिखी कहानी के मुकाबले ज्यादा दिलचस्प और बेहतर क्वालिटी का बताया. खास बात थी कि जिन कहानियों के बारे में उन्हें बताया गया कि वे इंसानों ने लिखी हैं, उन्हें उन्होंने ज्यादा अच्छी रेटिंग दी.

नतीजों से यह भी पता चलता है कि AI के प्रति हमारे अंदर क्या नजरिया है, हमारी रेटिंग पर उसका भी असर पड़ता है. जिन लोगों का AI के प्रति नजरिया ज़्यादा सकारात्मक या पॉजिटिव था, उन्होंने उन कहानियों को बेहतर रेटिंग दी जिनके बारे में उन्हें बताया गया था कि वे ChatGPT से तैयार की गई हैं. जबकि कम पॉजिटिव नजरिया रखने वालों ने ऐसा नहीं किया.

दो और एक्सपेरिमेंट किए गए

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार रिसर्चर ने दो और एक्सपेरिमेंट किए. जिनमें 905 वयस्कों को छह में से दो छोटी कहानियां दी गईं. दोनों कहानियां एक ही विषय पर थीं. उनमें से सिर्फ एक कहानी किसी इंसान ने लिखी थी. दूसरा AI ने लिखी थी. फिर इन लोगों से यह अंदाजा लगाने को कहा गया कि कौन-सी कहानी इंसान ने लिखी है और कौन-सी AI ने.

एक एक्सपेरिमेंट में केवल लगभग 40% लोगों ने सही अंदाजा लगाया और यह आम तुक्के से भी खराब नतीजा था. क्योंकि बिना पढ़े भी तुक्का लगाने को कहा जाता तो प्रोबैबिलिटी की थ्योरी कहती है कि लोग 50%-50% चुनेंगे. दूसरे एक्सपेरिमेंट में 52% लोगों ने सही अंदाजा लगाया. रिपोर्ट के अनुसार स्डटी के लेखकों ने इससे नतीजा निकाला कि "ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे पता चले कि स्टडी में शामिल लोग इंसान की लिखी कहानियों और AI से बनी कहानियों में फर्क कर पाए हों."

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