विप्रो के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए NDTV से कहा कि भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का मौका नहीं छोड़ा है और देश की कंपनियों के लिए कई मौके मौजूद हैं. बुधवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल से खास बातचीत में प्रेमजी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि AI की वजह से नौकरी जाने का सबसे ज़्यादा खतरा उन लोगों को है जो इस टेक्नोलॉजी को नहीं अपनाते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि AI की जानकारी होना, आगे चलकर किसी भी तरह की नौकरी के लिए बहुत जरूरी होने वाला है.
AI से क्या नौकरियों को है खतरा?
IT कंपनियों में छंटनी और AI से नौकरी के खतरे के सवाल पर प्रेमजी ने कहा कि टेक्नोलॉजी सर्विस कंपनियों में लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि पिछले कुछ सालों में उन्होंने असल में ज्यादा कर्मचारी जोड़े हैं. उन्होंने कहा कि नौकरियों को मोटे तौर पर चार कैटेगरी में बांटा जा सकता है. एक तो वो नौकरियां हैं जो AI की वजह से रुक जाएंगी. दूसरे नंबर पर वो नौकरियां हैं जो AI से बेहतर होंगी, ताकि आप मशीनों और इंसानों के साथ मिलकर इसे असरदार तरीके से चला सकें. तीसरी कैटेगरी की वो नौकरियां हैं जो AI की वजह से बनेंगी, और चौथे पर वो नौकरियां होंगी जो सिर्फ़ इंसानों के लिए होंगी. इसलिए हमें बकेट नंबर एक के बारे में सोचना होगा और यह पता लगाना होगा कि हम उन लोगों को कैसे रीट्रेन कर सकते हैं, रीपर्पस कर सकते हैं - सही स्किलिंग के जरिए, सही मौकों के जरिए - ताकि हम बकेट नंबर दो और तीन में जा सकें."
विप्रो के चेयरमैन ने आगे कहा कि सबसे बड़ी चुनौती लोगों को AI अपनाने के लिए राजी करना है, और सबसे ज़्यादा खतरा उन लोगों को है जो ऐसा नहीं करते. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह ऑर्गनाइज़ेशन, इंडस्ट्री और सरकार की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को यह बताए की यह बदलाव जरूरी है. AI फ़्लूएंसी नई डिजिटल करेंसी है. आगे किसी भी तरह का काम करने के लिए आपको AI फ़्लूएंट होना होगा. तो यह इस बारे में है कि हम लोगों को वे स्किल्स बनाने में कैसे मदद कर सकते हैं. उन्हें यह समझने की जरूरत है कि अगर वे बदलाव लाते हैं, तभी उनका भविष्य है, क्योंकि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो सिस्टम उन्हें वैसे भी हरा देगा."
2026 में AI क्या लाएगा?
2026 में AI क्या लाएगा? इस सवाल पर विप्रो के चेयरमैन ने कहा कि ऑर्गनाइज़ेशन अपने बिजनेस और कस्टमर को सर्विस देने के लिए टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएंगे. भारत और यूरोप समेत कई मार्केट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत पैसा खर्च हो रहा है, लेकिन आखिर में किसी को तो उस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल बढ़ाना ही होगा. ताकि कंपनियों को रिटर्न मिल सके. क्या भारत को एप्लीकेशन लेयर के बजाय बेसिक AI लेयर पर फोकस करने और अपना खुद का DeepSeek मोमेंट लाने की जरूरत है. इसपर विप्रो के चेयरमैन ने कहा कि उनकी जैसी कंपनियों के लिए उन मॉडल्स को कॉपी करने में इन्वेस्ट करने का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा कि वैल्यू इस बात से अनलॉक हो सकती है कि वे उन्हें कैसे स्पेशलाइज़ कर सकते हैं.
प्रेमजी ने कहा कि भारत दुनिया का स्केल डिप्लॉयमेंट इंजन बन सकता है और दुनिया भर में AI के लिए टैलेंट भी बना सकता है, जो एक बड़ी चुनौती है. यह पूछे जाने पर कि क्या वो उन लोगों से सहमत हैं जो ये दावा कर रहे हैं कि भारत AI से चूक गया है. इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमजी ने कहा, "AI बस अभी बहुत शुरुआती दौर में है. बहुत सारे इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर में हुए हैं. वे एडॉप्शन लेयर में नहीं हुए हैं. यह सफ़र अगले 5, 7, 10 सालों में पूरा होगा. मुझे लगता है कि कंपनियों और एक देश के तौर पर हमारे लिए उस सफर में हिस्सा लेने का बहुत बड़ा मौका है."
उन्होंने कहा, "मुझे बिल्कुल नहीं लगता कि हमसे मौका छूट गया है. मुझे लगता है कि बस स्टार्टिंग मोड में है और हम बिना गिरे आसानी से बस पकड़ सकते हैं और उसमें चढ़ सकते हैं."
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