- टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी शहर में सूखे और बढ़ती मांग के कारण पानी की गंभीर कमी उत्पन्न हो गई है
- समुद्र के पानी को मीठे पानी में बदलने वाले प्लांट की योजना फंड, नियमों और विरोध के कारण विलंबित है
- जलवायु परिवर्तन और सूखे ने जलाशयों में पानी की मात्रा खतरनाक स्तर तक कम कर दी है
यूरोप में इस बार भयंकर गर्मी के कारण कई लोगों की जान चली गई. ब्रिटेन से लेकर फ्रांस, जर्मनी, इटली तक के लोग गर्मी से तड़पते रहे. अब खबर है कि अमेरिका का एक बड़ा शहर पानी की इतनी गंभीर कमी का सामना कर रहा है कि यह पानी खत्म होने वाला पहला आधुनिक अमेरिकी शहर बन सकता है. टेक्सास राज्य के तटीय शहर कॉर्पस क्रिस्टी में 3,00,000 से ज्यादा लोग रहते हैं. मगर ये सभी पानी की घटती सप्लाई से जूझ रहे हैं. इसकी वजहें हैं - कई सालों का सूखा, बढ़ती मांग और पानी के नए स्रोत विकसित करने में देरी.
एक प्लांट बनाम तमाम निवासी
तेजी से हो रहे औद्योगिक विकास ने शहर में पानी की कमी को और बढ़ा दिया है. इलाके में मौजूद बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है, जिससे सप्लाई पर और दबाव पड़ता है, जो पहले से ही खराब मौसम की वजह से प्रभावित है. खबरों के अनुसार, 2022 में बने प्लास्टिक केमिकल प्लांट में कूलिंग के लिए हर दिन उतना ही पानी इस्तेमाल होता है, जितना कॉर्पस क्रिस्टी के सभी निवासी मिलकर इस्तेमाल करते हैं.
अमेरिका में भी फंड की कमी
अधिकारियों ने मौजूदा पानी की सप्लाई पर दबाव कम करने के लिए समुद्र के पानी को इस्तेमाल लायक मीठे पानी में बदलने वाला एक 'सी-वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट' बनाने की योजना बनाई थी. हालांकि, फंड की कमी, नियमों और विरोध के कारण इस प्रोजेक्ट में देरी हुई है. हालात को और खराब करने में जलवायु परिवर्तन की भी भूमिका रही है. हाल के वर्षों में टेक्सास में कई बार भीषण सूखा पड़ा है, जिससे मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया है. अधिकारी कई समाधानों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें जमीन के बहुत नीचे मौजूद पानी के कुएं और औद्योगिक कामों के लिए इस्तेमाल किए गए पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की योजनाएं शामिल हैं. खारे पानी को मीठा बनाने वाली एक प्रस्तावित सुविधा से हर दिन करोड़ों लीटर पानी मिल सकता है, लेकिन इसमें अरबों डॉलर का खर्च आ सकता है और इसे पूरा होने में कई साल लग सकते हैं.

तकनीक और प्रकृति का बैलेंस
यहां रहने वाले लोगों को पहले ही बगीचों में पानी देने और कार धोने जैसी गतिविधियों पर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात और खराब होते हैं, तो आपातकालीन उपायों के तहत कुछ समय के लिए पानी की कमी हो सकती है या पानी की सप्लाई के घंटे सीमित किए जा सकते हैं. जानकारों का कहना है कि यह संकट एक बढ़ती हुई वैश्विक चुनौती को उजागर करता है, क्योंकि शहर बढ़ती मांग, जलवायु परिवर्तन और घटते जल संसाधनों के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यही कारण है कि अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में एआई के डेटा सेंटर बनाने का जोरदार विरोध हो रहा है. कारण इन डेटा सेंटर में बहुत भारी मात्रा में पानी की खपत होती है. तो अब दुनिया को तय करना है कि तकनीक में आगे बढ़ना है या प्रकृति की रक्षा करना है या फिर दोनों में संतुलन को साधना है.
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