- अमेरिका ने पिछले साल यूक्रेन के शाहेद ड्रोन इंटरसेप्टर तकनीक के ऑफर को ठुकरा दिया था
- यूक्रेन ने अमेरिका को मिडिल ईस्ट में सैनिकों की सुरक्षा के लिए ड्रोन कॉम्बैट सिस्टम का प्रस्ताव दिया था
- ईरान के शाहेद ड्रोन हमलों में सात अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है
एक गलत फैसला कैसे भारी पड़ सकता है, ये बात अमेरिका से पूछनी चाहिए जिसने पिछले साल एक ऐसी गलती कर दी थी, जिसका खामियाजा उसे अब भुगतना पड़ रहा है. अमेरिका आज ईरान में जंग लड़ रहा है और उसे सबसे ज्यादा परेशान शाहेद ड्रोन कर रहे हैं. ईरान के ड्रोन हमलों में 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है. इन ड्रोन को मारने के लिए अमेरिका को लाखों डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं. लेकिन अगर सात महीने पहले अमेरिका ने यूक्रेन के साथ डील कर ली होती तो उसे शायद आज ये सब नहीं झेलना पड़ता.
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 7 महीने पहले यूक्रेन ने ईरान के ड्रोन को गिराने के लिए अपनी जंग में आजमाई हुई टेक्नोलॉजी को अमेरिका को बेचने की कोशिश की थी. यूक्रेन ने एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन भी दिया था, जिसमें दिखाया गया था कि उनकी तकनीक मिडिल ईस्ट में जंग में अमेरिकी सेना और उनके साथियों की रक्षा कैसे कर सकता है? तब ट्रंप सरकार ने यूक्रेन की इस डील को ठुकरा दिया था. लेकिन बताया जा रहा है कि ईरान की तरफ से लगातार हो रहे ड्रोन अटैक के बाद अपना फैसला बदल लिया है.
दो अमेरिकी अधिकारियों ने Axios को बताया कि यूक्रेन के ऑफर को ठुकराना सबसे बड़ी 'गलतियों' में से एक है. 28 फरवरी से जंग शुरू होने के बाद से ईरान के सस्ते शाहेद ड्रोन सात अमेरिकी सैनिकों की जान ले चुके हैं. एक अमेरिकी अधिकारी ने माना, 'अगर ईरान युद्ध से पहले हमसे कोई टैक्टिकल गलती या भूल हुई थी तो वह यह थी.'

यूक्रेन इस वक्त ईरान के शाहेद ड्रोन से निपटने में दुनिया का सबसे अनुभवी देश है. रूस ने यूक्रेन पर हमले के लिए ईरान से हजारों की संख्या में इन ड्रोन्स को खरीदा था. इन ड्रोन को मार गिराने के लिए यूक्रेन ने दूसरे सेंसर और एयर डिफेंस के साथ-साथ एक कम लागत वाला इंटरसेप्टर ड्रोन भी बनाया है.
18 अगस्त को बंद कमरे में हुई वो मीटिंग
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 18 अगस्त को व्हाइट हाउस में एक बंद कमरे में मीटिंग हुई थी, जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने राष्ट्रपति ट्रंप को इंटरसेप्टर ड्रोन ऑफर किए थे. यह अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत करने की पहल थी.
मीटिंग के दौरान यूक्रेनी अधिकारियों ने एक प्रेजेंटेशन दिखाया था, जिसमें मिडिल ईस्ट का नक्शा था और चेतावनी दी गई थी कि ईरान अपने शाहेद ड्रोन डिजाइन को बेहतर बना रहा है. प्रेजेंटेशन में तुर्किए, जॉर्डन और खाड़ी देशों में जहां-जहां अमेरिकी बेस हैं, वहां ईरान और उसके प्रॉक्सी के खतरों से निपटने के लिए 'ड्रोन कॉम्बैट हब' बनाने का आइडिया था.

यूक्रेनी अधिकारी ने कहा कि उस मीटिंग में ट्रंप ने अपनी टीम से इस पर काम करने को कहा था लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि उस वक्त हमें यूक्रेन की बातों पर यकीन नहीं हुआ.
अमेरिका को अपने ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम प्रोडक्शन और जानकारी तक पहुंच देने के बदले में यूक्रेन ने अमेरिकी हथियारों का प्रस्ताव रखा था. एक यूक्रेनी अधिकारी ने कहा कि 'हमारी समस्या पैसे की कमी थी. हम जितना बना सकते थे, संसाधनों की कमी के कारण उसका सिर्फ 50% ही बना पाए. इसलिए हम चाहते कथे कि अमेरिका इन्वेस्ट करे और प्रोडक्शन में उसका हिस्सा हो.'
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ईरान में जंग शुरू होने के बाद गुरुवार को अमेरिकी ने जेलेंस्की से एंटी-ड्रोन मदद मांगी है. वहीं, एक अमेरिकी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी AP से कहा कि अगर यूक्रेनी ड्रोन जल्दी तैनात किए जाते तो मदद मिलती है.

कितनी भारी पड़ रहा अमेरिका का वो गलती?
अमेरिका ने उस वक्त यूक्रेन की डील को नजरअंदाज कर दिया था. लेकिन अब वह उसको बहुत भारी पड़ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ईरानी शाहेद ड्रोन की कीमत 20 हजार से 50 हजार डॉलर होती है. लेकिन इन्हें मारने के लिए लाखों डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं. जबकि यूक्रेन के इंटरसेप्टर ईरानी ड्रोन से भी सस्ते हैं.
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