- 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद न्यूयॉर्क के मुसलमानों ने नस्लीय भेदभाव और हिंसा का सामना किया
- आज न्यूयॉर्क में पहली बार मुस्लिम मेयर हैं, और मुस्लिम समुदाय की सांस्कृतिक तथा राजनीतिक भागीदारी बढ़ी है
- भले कुछ स्तर पर नफरत अभी भी मौजूद है, फिर भी मुस्लिम समुदाय ने शहर में अपनी जगह मजबूती से बनाई है
दिन था 11 सितंबर 2001 का. अमेरिका पर उसके इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था. आतंकियों ने 4 प्लेन अगवा करके न्यूयॉर्क पर हमला किया था और 3000 लोगों की मौत हो गई थी. हमलों के बाद न्यूयॉर्क के मुसलमानों ने डर, शक और भेदभाव का लंबा दौर देखा. कई लोगों पर नजर रखी गई, कुछ को हिंसा और बदसलूकी का सामना करना पड़ा और कई लोगों ने अपनी धार्मिक पहचान तक छिपाने की कोशिश की. लेकिन 25 साल बाद तस्वीर काफी बदल चुकी है. आज न्यूयॉर्क में एक मुस्लिम मेयर है, टाइम्स स्क्वायर में खुले तौर पर नमाज होती है और न्यूयॉर्क में पूरे अमेरिका का सबसे बड़ा मस्जिद बन रहा है. सवाल यह है कि 9/11 के बाद हुए नस्लीय भेदभाव और हिंसा के बाद न्यूयॉर्क के मुसलमानों ने कैसे अपने शहर में फिर से अपनी जगह बनाई?
असद की कहानी
न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार असद डंडिया सिर्फ 8 साल के थे, जब उन्होंने 11 सितंबर 2001 के हमलों को टीवी पर देखा था. उस समय वह न्यूयॉर्क में अपने पाकिस्तानी मूल के माता-पिता के साथ रहते थे. इस हमले के बाद मुसलमानों के खिलाफ माहौल खराब होने लगा. इन हमलों के बाद अमेरिकी लोग डर और गुस्से में थे. मुसलमानों के साथ बड़े पैमाने पर नस्लीय भेदभाव हुए. रिपोर्ट के अनुसार जब डंडिया 19 साल के हुए, तब एक पुलिस मुखबिर उनका दोस्त बनकर उनके परिवार के घर तक पहुंच गया. उसका काम डंडिया और उनके परिवार पर नजर रखना था. यह न्यूयॉर्क पुलिस की एक ऐसी निगरानी मुहिम का हिस्सा था, जिसका दावा था कि वह इस्लामी कट्टरपंथ का पता लगाने के लिए की जा रही है. बाद में इस मुहिम की काफी आलोचना हुई और इसे गलत माना गया.

20 फरवरी, 2026 को न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर में रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग तरावीह की नमाज में शामिल हुए
उन्होंने कहा कि जो हुआ, उसके लिए मुझे निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. इस मामले में मैं भी उतना ही न्यूयॉर्क का हिस्सा हूं, जितना कोई और. डंडिया अब न्यूयॉर्क के मुस्लिम समुदायों से जुड़ी जगहों पर लोगों को पैदल घुमाने का काम करते हैं.
2001 के बाद मुस्लिमों के साथ क्या हुआ?
2001 के हमलों के बाद अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ नफरत तेजी से बढ़ी. इन हमलों में आतंकियों ने 4 यात्री विमानों को हाईजैक किया था. दो विमान को मैनहट्टन के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दो टावरों पर और तीसरे को वॉशिंगटन के बाहर पेंटागन से टकरा दिया था. चौथा विमान यात्रियों के विरोध के बाद पेंसिल्वेनिया के एक खेत में गिर गया था.
इसके बाद कई मुसलमानों ने बताया कि उनके साथ सार्वजनिक जगहों पर मारपीट और बदसलूकी बढ़ गई थी. कुछ महिलाओं ने हिजाब जैसे धार्मिक कपड़े पहनना भी कम कर दिया, ताकि लोग उनकी धार्मिक पहचान न जान सकें. दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारियों ने मुसलमानों पर नजर रखनी शुरू कर दी. हजारों पुरुषों और लड़कों को सरकार के पास अपना नाम दर्ज कराने के लिए मजबूर किया गया. इसके चलते कई लोगों को अमेरिका से बाहर भी भेज दिया गया.
अब कहानी पहले जैसी नहीं
एएफपी की इस रिपोर्ट के अनुसार न्यूयॉर्क में जल्द ही पूरे अमेरिका की सबसे बड़ी मस्जिद बनने वाली है. 2001 के बाद से न्यूयॉर्क में 100 से ज्यादा नई मस्जिदें बन चुकी हैं. मुस्लिम समुदाय के मेंबर अब शहर की संस्कृति और राजनीति में भी तेजी से मजबूत हो रहे हैं. मेयर जोहरान ममदानी ने कुरान पर हाथ रखकर पद की शपथ ली थी. वह अब अमेरिका की डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट राजनीति का नया चेहरा बन गए हैं.
वैसे यहां ध्यान रहे कि न्यूयॉर्क में अभी भी मुसलमानों के खिलाफ नफरत मौजूद है. शहर की करीब 9 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है. इसके बावजूद मार्च में दक्षिणपंथी विचारों वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने मेयर ममदानी के घर के बाहर 'न्यूयॉर्क शहर पर इस्लामी कब्जा रोको' नाम से प्रदर्शन किया. वहीं एक रूढ़िवादी अमेरिकी सीनेटर ने कहा कि ममदानी को ग्वांतानामो बे भेज देना चाहिए. ग्वांतानामो बे अमेरिका का वह जेल शिविर है, जो 9/11 के संदिग्धों को रखने के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है.
रूडी जूलियानी 9/11 के हमलों के समय न्यूयॉर्क के मेयर थे. उन्होंने कहा है कि ममदानी का 9/11 मेमोरियल कार्यक्रम में शामिल होना उन्हें अपमानजनक लगता है. ममदानी ने कहा है कि वह रूडी जूलियानी के साथ जुबानी जंग में नहीं उलझेंगे. उनका कहना है कि ध्यान पीड़ितों, उनके परिवारों और सबसे पहले मदद के लिए पहुंचने वालों (फायरफाइटर, पुलिस, मेडिकल पर्सन) पर ही होना चाहिए.
(इनपुट- AFP)
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