- चाड के मध्य क्षेत्र में पानी की कमी को लेकर जातीय समूहों के बीच हिंसक झड़प में कम से कम पच्चीस लोग मारे गए हैं
- झगड़ा क्रेडा और कुका समुदाय के बीच चरवाहे के तालाब पर पानी पिलाने के विवाद से शुरू हुआ था
- सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रण में किया और उन्नतीस लोगों को गिरफ्तार कर राजधानी न्दजामेना भेजा गया है
चाड का नाम आपने शायद ही सुना होगा. ये लीबिया, सूडान और नाइजीरिया जैसे देशों का पड़ोसी है. इस देश का उत्तरी हिस्सा सहारा रेगिस्तान का हिस्सा है. चाड में पानी की किल्लत इतनी अधिक है कि इसी हिंसा में 25 लोग मारे गए. ये खबर बताती है कि पानी कितनी जरूरी है और अगर इसकी कमी हो जाए तो लोग एक-दूसरे की जान लेने से भी नहीं हिचकेंगे.
कैसे हुआ झगड़ा
सरकार ने रविवार को बताया कि मध्य चाड में पानी तक पहुंच को लेकर अलग-अलग जातीय समूहों के बीच हुई झड़प में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं और 22 अन्य घायल हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, चाड उन अफ्रीकी देशों में से एक है जो जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. यहां पानी, जमीन और पशुधन को लेकर अक्सर समुदायों के बीच जानलेवा संघर्ष होते रहते हैं.
एक स्थानीय सांसद ने एएफपी (AFP) को बताया कि यह हिंसा शुक्रवार को तब शुरू हुई, जब क्रेडा समुदाय का एक चरवाहा अपने मवेशियों को तालाब पर पानी पिलाने लाया था. वहां उसकी कुका समुदाय के एक व्यक्ति से बहस हो गई. सांसद ने आगे बताया, "विवाद के दौरान, क्रेडा व्यक्ति ने अपना हथियार निकाला और कुका समुदाय के व्यक्ति के पैर में गोली मार दी. इसके बाद दोनों समुदायों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें 22 लोग घायल हो गए. घायलों को न्गौरा के अस्पताल ले जाया गया है."
सुरक्षा बलों को उतरना पड़ा
एक अन्य स्थानीय अधिकारी ने एएफपी को बताया कि सुरक्षा बलों ने अब स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में कर लिया है. प्रादेशिक प्रशासन मंत्रालय ने रविवार को बताया कि हजेर-लामिस और बहर अल-गजाली प्रांतों की सीमा पर हुई इस हिंसा में 25 लोगों की मौत हो गई और 22 लोग घायल हुए हैं. मंत्रालय ने यह भी बताया कि 39 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें राजधानी न्दजामेना भेज दिया गया है.
शनिवार को कई मंत्रियों के नेतृत्व में एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित इलाके का दौरा किया. मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह दौरा "शांति बहाल करने, नागरिकों की सुरक्षा करने, हिंसा को और बढ़ने से रोकने और समुदायों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों" का हिस्सा था. मध्य अफ्रीका के इस विशाल देश में पानी तक पहुंच बहुत असमान है, और सीमित संसाधनों को लेकर होने वाले विवाद अक्सर हिंसा का रूप ले लेते हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम परिवारों के पास सुरक्षित बहते पानी (नल के पानी) तक भरोसेमंद पहुंच थी. अप्रैल में, पूर्वी चाड में पानी के एक कुएं को लेकर हुए विवाद में 44 लोग मारे गए थे और 10 लोग घायल हो गए थे. इस देश की आधी आबादी के पास पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है. यहां की चाड झील ही लोगों के पीने का सहारा हुआ करती थी, मगर 1960 की तुलना में आज लगभग ये 90 फीसदी सूख चुकी है. ये हाल सिर्फ चाड का नहीं है. आज दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या तथा अत्यधिक दोहन की वजह से पानी की कमी होती जा रही है.
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