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गर्मी बढ़ते ही उत्तराखंड में जंगल दहक उठे, 208 जगहों पर लगी आग, 130 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र हुआ प्रभावित

उत्तराखंड में बढ़ते तापमान के साथ जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. अब तक 208 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 130.27 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है. चारधाम यात्रा रूट से जुड़े इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है, जहां आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं.

गर्मी बढ़ते ही उत्तराखंड में जंगल दहक उठे, 208 जगहों पर लगी आग, 130 हेक्टेयर से ज्यादा वन क्षेत्र हुआ प्रभावित
  • उत्तराखंड में 15 फरवरी से 27 फरवरी के बीच 208 वनाग्नि की घटनाएं हुईं, जिससे 130.27 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ
  • चारधाम यात्रा रूट के जंगलों में आग की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की गईं, जहां रोजाना लाखों श्रद्धालु गुजरते हैं
  • कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र के विभिन्न फॉरेस्ट डिवीजनों में जंगलों में आग लगी, जिससे कई हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित

उत्तराखंड में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. प्रदेश के कई हिस्सों में जंगल धू‑धू कर सुलग रहे हैं. अब तक उत्तराखंड में 208 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 130.27 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है. यहां पर हालात इसलिए और गंभीर हैं क्योंकि चारधाम यात्रा रूट पर आने वाले जंगलों में भी आग सुलग रही है, जहां से हर दिन लाखों श्रद्धालु गुजर रहे हैं. उत्तराखंड में 15 फरवरी से फॉरेस्ट फायर सीजन माना जाता है और इसी तारीख से राज्य के कई इलाकों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आने लगी थीं.

फॉरेस्ट फायर सीजन में 208 घटनाएं दर्ज

बारिश कम होने के कारण दिसंबर महीने में भी कुछ क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गई थीं. आंकड़ों के मुताबिक, 15 फरवरी से 27 फरवरी 2026 के बीच ही उत्तराखंड के 41 फॉरेस्ट डिवीजन में जंगलों में आग लगी. इस दौरान रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्रों में 126 स्थानों पर आग लगी, जिससे 70.97 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ, जबकि सिविल सोयम और वन पंचायत क्षेत्रों में 82 स्थानों पर आग लगी, जहां 58.3 हेक्टेयर जंगल जलकर प्रभावित हुआ। कुल मिलाकर 208 घटनाएं रिकॉर्ड की गईं. टिहरी डैम‑2 फॉरेस्ट डिवीजन में सिविल सोयम और वन पंचायत क्षेत्र में एक स्थान पर आग लगने की घटना दर्ज की गई, जिसमें 2.3 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. नई टिहरी फॉरेस्ट डिवीजन के रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में पांच स्थानों पर आग लगी और 3.8 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ.

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कुमाऊं क्षेत्र में कई डिवीजनों में फैली आग

सोइल कंजर्वेशन रानीखेत फॉरेस्ट डिवीजन में एक स्थान पर आग की घटना दर्ज की गई, जिसमें 2 हेक्टेयर जंगल जलकर प्रभावित हुआ. अल्मोड़ा फॉरेस्ट डिवीजन में दो स्थानों पर आग लगी, जिससे 0.6 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ, जबकि सिविल सोयम अल्मोड़ा फॉरेस्ट डिवीजन में एक स्थान पर आग की घटना में 0.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. पिथौरागढ़ फॉरेस्ट डिवीजन में 14 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 11.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. हल्द्वानी फॉरेस्ट डिवीजन में तीन स्थानों पर आग लगी और 1.9 हेक्टेयर जंगल जलकर प्रभावित हुआ. तराई ईस्ट फॉरेस्ट डिवीजन में तीन स्थानों पर आग की घटनाएं दर्ज की गईं, जहां 1.4 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. तराई वेस्ट रामनगर फॉरेस्ट डिवीजन में एक स्थान पर आग लगने से 0.5 हेक्टेयर जंगल जलकर प्रभावित हुआ.

गढ़वाल क्षेत्र के जंगल भी आग की चपेट में

नरेंद्र नगर फॉरेस्ट डिवीजन में पांच स्थानों पर आग की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 4.0 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. उत्तरकाशी फॉरेस्ट डिवीजन में आठ स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुईं और 12.65 हेक्टेयर जंगल जलकर प्रभावित हुआ. टोंस‑पुरोला फॉरेस्ट डिवीजन में नौ स्थानों पर आग लगी, जिसमें 2.7 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. मसूरी फॉरेस्ट डिवीजन में दो स्थानों पर आग की घटनाओं में 1.06 हेक्टेयर जंगल जल गया, जबकि चकराता फॉरेस्ट डिवीजन में छह स्थानों पर आग लगने से 4.7 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. सोइल कंजर्वेशन कालसी फॉरेस्ट डिवीजन में पांच स्थानों पर आग की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 8.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ.

चारधाम यात्रा रूट पर सबसे ज्यादा असर

लैंसडाउन‑कोटद्वार फॉरेस्ट डिवीजन में दो स्थानों पर आग लगी और 1.01 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। सिविल सोयम पौड़ी फॉरेस्ट डिवीजन में 13 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसमें 6.7 हेक्टेयर जंगल जलकर प्रभावित हुआ. बद्रीनाथ‑गोपेश्वर फॉरेस्ट डिवीजन में सबसे ज्यादा 57 स्थानों पर आग लगी, जिससे 17.54 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. अलकनंदा सोइल कंजर्वेशन गोपेश्वर फॉरेस्ट डिवीजन में 17 स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुईं और 9.7 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ. रुद्रप्रयाग फॉरेस्ट डिवीजन में 31 स्थानों पर आग की घटनाओं में 21.82 हेक्टेयर जंगल जल गया. NDNP फॉरेस्ट डिवीजन में एक स्थान पर आग लगने से 2.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ, जबकि केदारनाथ वाइल्डलाइफ फॉरेस्ट डिवीजन में 20 स्थानों पर आग की घटनाओं में 10.5 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ.

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चकराता और आसपास के इलाकों में हालात गंभीर

इन 41 फॉरेस्ट डिवीजन में दर्ज घटनाओं में चारधाम यात्रा रूट से जुड़े क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। केदारनाथ वाइल्डलाइफ फॉरेस्ट डिवीजन, रुद्रप्रयाग फॉरेस्ट डिवीजन, अलकनंदा गोपेश्वर फॉरेस्ट डिवीजन, बद्रीनाथ गोपेश्वर फॉरेस्ट डिवीजन और पौड़ी फॉरेस्ट डिवीजन में जंगलों में आग सबसे ज्यादा लगी है. मुख्य वन संरक्षक और फॉरेस्ट फायर के नोडल अधिकारी सुशांत पटनायक ने बताया कि फिलहाल चारधाम यात्रा रूट पर जंगलों में आग की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आ रही हैं, इसलिए वहां वन विभाग की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं. उन्होंने कहा कि क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी इन क्षेत्रों में लगाया गया है ताकि किसी भी आग की घटना को तुरंत नियंत्रित किया जा सके. चूंकि चारधाम यात्रा के दौरान इन रास्तों से लाखों यात्री गुजर रहे हैं, इसलिए विभाग पूरी तरह अलर्ट है और जरूरत पड़ने पर पुलिस और फायर सर्विस की मदद भी ली जा रही है.

मौसम अलर्ट से राहत की उम्मीद, लेकिन खतरा बरकरार

इसके अलावा चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और चकराता क्षेत्रों में भी जंगलों में भीषण आग लगी हुई है. चकराता वन प्रभाग में पिछले दो दिनों से आग और जंगल से उठते धुएं के गुबार हालात को और चिंताजनक बना रहे हैं। सहिया क्षेत्र के कोठा‑तारली गांव के नजदीक आरक्षित वन क्षेत्र में लगी आग ने बांज, बुरांश, काफल और देवदार के घने जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे भारी मात्रा में वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है. वहीं, उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने 28 और 29 अप्रैल को देहरादून, नैनीताल, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि और हल्की बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इसके साथ ही 28 अप्रैल से 30 अप्रैल तक तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश का येलो अलर्ट भी जारी किया गया है. दूसरी ओर, मैदानी इलाकों में हीट वेव और सामान्य से अधिक तापमान को लेकर भी येलो अलर्ट जारी किया गया है.
हालांकि मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट से वन विभाग को उम्मीद है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जंगलों की आग पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकेगा, लेकिन तेज हवाओं का अलर्ट आग को और फैलने का खतरा भी बढ़ा सकता है.

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