- हरिद्वार के राजा जी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क के सुरेश्वरी देवी मंदिर में मंत्री के बेटे की शादी का आयोजन
- वन विभाग ने टेंट और अन्य सामग्री हटाकर मंदिर समिति के पदाधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है
- मंत्री खजान दास ने कहा कि शादी का आयोजन मन्नत के तहत वन विभाग की अनुमति से किया गया था
उत्तराखंड के हरिद्वार के राजा जी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क में बने सुरेश्वरी देवी मंदिर में VIP शादी का आयोजन किए जाने का मामला अब तूल पकड़ रहा है. यह क्षेत्र वन विभाग अधिनियम के अंतर्गत आता है. इस क्षेत्र को कोर कटेगरि में रखा गया है, इन क्षेत्रों में जो भी धार्मिक आयोजन होते हैं वो सभी सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार ही होते हैं.
दरअसल, मंत्री जी के बेटे की शादी राजा जी टाइगर रिजर्व पार्क में स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर में होनी है, जिसके लिए भव्य तैयारी भी की गई हैं. वन्य जीव प्रेमियों की शिकायत पर राजा जी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मंदिर परिसर में लगे टेंट और दूसरे सामान को वहां से हटवाया दिया है.
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और मुकदमा
पार्क प्रशासन का कहना है कि मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के लिए परमिशन मंदिर समिति के द्वारा ही दी गई थी. क्योंकि यहां पर किसी भी तरह की मानवीय गतिविधि पर पूरी तरह से रोक है जिसको देखते हुए प्रशासन ने मंदिर समिति के पदाधिकारी पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है. वहीं, मंदिर समिति के पदाधिकारी का कहना है कि मंदिर परिसर में केवल सादगी से फेरे और प्रसाद का कार्यक्रम रखा गया था. जिसके बाद प्रसाद ग्रहण करने का आयोजन था पर प्रशासन के मुकदमे की बात पर उन्होंने आगे की कार्रवाई करने की बात कही है.

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Photo Credit: Rahul Kumar
मंत्री का रसूख और मन्नत का हवाला
मंत्री के बेटे की शादी चर्चा का विषय बनी हुई है लेकिन मंत्री जी का रसूक देखिए कि शादी के टेंट और दूसरा सामान भले ही हटवा दिया गया हो लेकिन कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं हुआ. Vip के आने का सिलसिला भी बना रहा. तय समय पर दूल्हा दुल्हन को लेकर मंत्री खज़ानदास मंदिर परिसर में पहुंचे. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्योंकि उन्होंने पहले ही अपने बेटे को लेकर यह मन्नत सुरेश्वरी देवी मंदिर में मांगी हुई थी. जिसके चलते यहां शादी का प्रोग्राम रखा था. मंदिर समिति पर मुकदमे के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिस दिन वह यहां पर दौरा करने आए थे तभी उनके साथ वन विभाग के बड़े अधिकारी थे जिसे परमिशन ली गई थी.

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Photo Credit: Rahul Kumar
पार्क वार्डन का आधिकारिक पक्ष
अजय लिंगवाल, वार्डन राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क का कहना है कि ऐसा प्रकाश में आया था कि सुरेश्वरी देवी मंदिर में पूजा अर्चना भंडारा का आयोजन होना था, पर देखने में आया कि यहां पर काफी संख्या में कुसिया, टेंट ओर अन्य सामग्री यहां पर थी जिनको तत्काल यहां से हटाया गया है, मंदिर समिति के खिलाफ सुसंगत धारा में वाद पंजीकृत किया गया है, शादी के आयोजन की हमको कोई जानकारी नहीं है, कुर्सियां बड़े पंडाल ओर अन्य सामग्री यहां पर जमा किया गया है जो ऐसा प्रतीत होता है उनको किसी बड़े भव्य आयोजन के लिए लाया गया है उनको हटाया गया है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में ही कोई भी आयोजन हो सकता है, धार्मिक आयोजन भंडारा करने की यहां अनुमति रहती है, मंदिर समिति ही सफाई ओर आयोजन व्यवस्था संभालती है जांच के दौरान ही यह तय किया जाएगा कि आयोजकों की क्या भूमिका बनती है.
मंदिर समिति की सफाई
मधुमय भारद्वाज मंत्री मंदिर समिति सुरेश श्री देवी मंदिर का कहना है कि इस आयोजन की सूचना हमने वन विभाग को अवगत कराया था, इसका स्वरूप माननीय मंत्री द्वारा यही था इस आयोजन को हम विभाग के नियमानुसार ही कर रहे थे, इसके स्वरूप को बड़ा चढ़ा के प्रस्तुत किया गया है, मंदिर समिति पर जो मुकदमा दर्ज किया गया है. हम अपना पक्ष रखेंगे, आयोजन का स्वरूप पूर्व की ही भांति है, भंडारे का जो स्वरूप रहता है उसी के अनुसार हम उसको पूरा करेंगे, मंत्री जी अपने बीमार लड़के के लिए मन्नत की थी कि अपने लड़के की शादी यहां पर की जाएगी, सारा आयोजन बहुत ही सामान्य ओर सादगी भरा होगा सभी नियमों का पालन करते हुए ही किया जा रहा है.
मंत्री खजान दास का बयान और साजिश का आरोप
खजान दास समाज कल्याण मंत्री उत्तराखंड का कहना है कि 10/11 साल से मां के दरबार में आ रहा हूं पूर्व में मैं अपने बीमार छोटे बेटे के साथ यहां आया था मां से मन्नत मांगी थी कि मेरे बेटे का स्वस्थ ठीक रहा था तो अपने बेटे की शादी का आयोजन करूंगा, आज का दिन शादी का तय हुआ था, वन विभाग के सारे नियमों का पालन करते हुए बहुत ही सामान्य तरीके से आयोजन किया जा रहा है यह वन क्षेत्र है कोई भी साउंड सिस्टम नहीं है कोई भी हाय हल्ला नहीं है, जो भी हो रहा है वो विभाग के संज्ञान में रहा है, पूर्व में मैं जबआया था वन निदेशक भी मेरे साथ थे उनको भी आमंत्रित किया गया, उन्होंने भी स्वीकृति प्रदान की थी, उनके संज्ञान पर ही ये आयोजन हो रहा है ऐसा नहीं है कि मंदिर के समिति के कहने पर ये आयोजन हो रहा है, मां सुरेश्वरी देवी मंदिर के सानिध्य में ही शादी कराने का उद्वेश्य था, लगता है कि राजनीतिक साजिश द्वारा जो लोग आरोप लगा रहे है पर जो कल हुआ वो बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण हुआ, ऐसा नहीं होना चाहिए, एन जी टी, वन विभाग का भी है हमारे यहां जीव भी रहते है अगर पहले से ही वन निदेशक हमको बता देते कि ये आयोजन नहीं हो सकता तो हम किसी अन्य जगह यह आयोजन हम कर सकते थे, पूर्व हमने लगभग 100 परिचित के आने का था अब वो कम कर दिया है.
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