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This Article is From Aug 10, 2025

धराली की 'लाइफलाइन' बैली पुल तैयार, अभी केवल पैदल यात्रियों ही कर सकेंगे इसका इस्तेमाल

बचाव एवं राहत कार्यों में सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रतिवादान बल और पुलिस के 800 से ज्यादा बचावकर्मी जुटे हैं.

धराली की 'लाइफलाइन' बैली पुल तैयार, अभी केवल पैदल यात्रियों ही कर सकेंगे इसका इस्तेमाल
  • उत्तराखंड में धराली से जुड़ी मुख्य सड़क टूटने के कारण गंगनानी के पास बैली पुल का निर्माण अंतिम चरण में है
  • बैली पुल के बनने से बड़ी मशीनें और ट्रक धराली तक पहुंच सकेंगे, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में सहायता मिलेगी
  • बचाव एवं राहत कार्यों में सेना, बीटीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित 800 से अधिक कर्मी सक्रिय रूप से लगे हुए हैं

उत्‍तराखंड को धराली से जोड़ने वाली मुख्‍य सड़क टूट गई है. धराली तक पहुंचे के लिए गंगनानी के पास लिंचागाड़ पर बैली पुल बनाया गया. अपडेट के अनुसार बैली ब्रिज निर्माण का काम पूरा हो चुका है. अब बड़ी मशीनें और ट्रक इस पुल के जरिए दूसरी तरफ जा सकेंगे. हालांकि अभी पैदल यात्रियों को ही इसका इस्तेमाल करने की मंजूरी दी गई है. आर्मी, बीआरओ, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ इस पुल को बनाने में युद्ध स्‍तर पर जुटी हुई थी. रात-दिन इस पुल को बनाने का काम किया जा रहा था.

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बैली पुल से रेस्क्यू ऑपरेशन में होगी मदद

500 से ज्‍यादा लोग अब भी पुल के उस ओर फंसे हुए हैं, जिन्‍हें लाने में ये बैली पुल अहम भूमिका निभाएगा. हालांकि, एक अस्‍थाई रास्‍ता भी तैयार किया गया है, लेकिन वहां से जाना आसान नहीं है. वहीं बात गोत्री हाईवे की करें तो सोनगाड़, डबरानी, हर्षिल, धराली के पास इस हाईवे को ठीक करने का काम तेजी से हो रहा है. 

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मौसम साफ, हेलीकॉप्‍टरों से पहुंचाई जाएगी मदद

मौसम खराब होने की वजह से शुक्रवार को हेलीकॉप्‍टर धराली और हर्षिल वेली तक मदद पहुंचाने के लिए नहीं उड़ पा रहे थे. लेकिन आज मौसम साफ होने की वजह से हेलीकॉप्‍टरों से मदद वहां पहुंचाई जा सकेगी. 

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बचाव एवं राहत काम में 800 से ज्यादा बचावकर्मी जुटे

उत्तराखंड राज्य आपदा नियंत्रण प्राधिकरण ने शुक्रवार को बताया कि घटनास्थल पर बचाव एवं राहत कार्यों में सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रतिवादान बल और पुलिस के 800 से ज्यादा बचावकर्मी जुटे हैं. जीवित बचे लोगों को ढूंढने तथा मलबे के विशाल ढेर के नीचे दबे शवों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों और रडारों का उपयोग किया जा रहा है.

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