मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इनमें सबसे चर्चित फैसला माता-पिता और बुजुर्ग नागरिकों के भरण-पोषण से जुड़ी व्यवस्था को और मजबूत बनाने का रहा. सरकार का उद्देश्य ऐसे बुजुर्गों को राहत देना है जिन्हें अपने ही परिवार से अनदेखी का सामना करना पड़ता है.
संपत्ति से बेदखली की प्रक्रिया होगी आसान
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई बेटा या बेटी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना पहले की तुलना में आसान होगा. सरकार इसके लिए एक नया निगम गठित करेगी. साथ ही बुजुर्गों की शिकायतें दर्ज करने के लिए टोल फ्री सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. यदि सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बाद भी संतान संपत्ति खाली नहीं करती है तो जिला प्रशासन 30 दिनों के भीतर बेदखली की कार्रवाई कर सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे बुजुर्गों को त्वरित न्याय मिल सकेगा.
बुजुर्ग नागरिकों को मिलेगा बेहतर संरक्षण
कैबिनेट के इस फैसले का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं बल्कि परिवारों में बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल की भावना को मजबूत करना भी है. सरकार चाहती है कि माता-पिता को अपने अधिकारों के लिए लंबे समय तक भटकना न पड़े और उन्हें समय पर सहायता मिले.
दूसरे राज्यों में भी हैं ऐसे प्रावधान
देश के कई राज्यों में बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान पहले से लागू हैं. असम में PRANAM Act के तहत सरकारी कर्मचारी द्वारा माता-पिता की अनदेखी किए जाने पर वेतन का एक हिस्सा सीधे माता-पिता को दिया जा सकता है. बिहार में भी इस तरह की शिकायतों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. महाराष्ट्र, दिल्ली और अन्य राज्यों में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम 2007 के तहत ट्रिब्यूनल कार्यरत हैं, जहां बुजुर्ग अपने साथ दुर्व्यवहार करने वाले बच्चों या रिश्तेदारों के खिलाफ कानूनी राहत प्राप्त कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें- यूपी में 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को फ्री बस यात्रा, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला; 24 प्रस्ताव मंजूर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं