- मुरादाबाद के दलपतपुर गांव में पांच साल के बच्चे को तेंदुए ने जबड़े में दबा लिया था
- बच्चे की मां पिंकी ने तुरंत तेंदुए का पीछा कर हिम्मत दिखाते हुए उस पर हमला किया
- मां के हमले से तेंदुआ घबरा गया और बच्चे को छोड़कर भाग गया जिससे उसकी जान बच गई
मां के लिए उसकी संतान और संतान के लिए उसकी मां क्या हैं, ये बताने की जरूरत नहीं है.अपने बच्चे के लिए वो दुर्गा भी बन सकती है और कभी तो मां काली का भी रूप धर सकती है. एक मां ही है जिसका दिल कोमल होता है, जग खिलाफ हो जाए पर मां हमेशा संतान के लिए खड़ी रहती है. ये हम आपको इसलिए बता रहे हैं क्योंकि मुरादाबाद से जो खबर आई है उसने फिर इसे चरितार्थ कर दिया है कि मां जैसा कोई नहीं. बेटा तेंदुए के जबड़े में फंसकर तड़प रहा था पर मां ने अपनी संतान को मुश्किल में देखते ही उससे जा भिड़ी. मां के जज्बे को सलाम कि उसने न सिर्फ तेंदुए पर वार किया बल्कि जबड़े से बेटे को बचाकर ले भी आई.
बच्चे के लिए दुर्गा बन गई मां
मुरादाबाद के दलपतपुर गांव निवासी रवि के घर के बाहर उनका 5 साल का बेटा मोक्ष खेल रहा था. सोमवार शाम करीब 7:30 बजे अचानक तेंदुआ वहां पहुंच गया. देखते ही देखते वह बच्चे को जबड़े में दबाकर भागने लगा. बच्चे की चीख सुनते ही मां पिंकी तुरंत तेंदुए के पीछे दौड़ी. कुछ दूरी पर खेत में तेंदुआ रुक गया.तभी मां ने हिम्मत दिखाते हुए तेंदुए पर हमला कर दिया.अचानक हुए इस हमले से तेंदुआ घबरा गया और बच्चे को छोड़कर भाग गया. इसके बाद परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए.
उत्तराखंड में चल रहा इलाज
हमले में मासूम मोक्ष के कान और गर्दन पर गंभीर चोटें आई हैं. पहले बच्चे को मुरादाबाद के अस्पताल ले जाया गया. फिलहाल मोक्ष का इलाज उत्तराखंड के काशीपुर स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा है, जहां डॉक्टर उसकी हालत पर नजर रखे हुए हैं. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए की तलाश शुरू कर दी. ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में पहले भी तेंदुए के हमले की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है. ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को जल्द पकड़ने की मांग की है.
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