नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध और समर्थन के अलग-अलग रंग दिख रहे हैं. ताजा मामला बीएचयू का है. यहां अलग-अलग विभाग के 51 प्रोफेसरों ने एनआरसी और सीएए के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चला कर प्रेस रिलीज जारी की तो फौरन उनके प्रेस रिलीज और हस्ताक्षर की कॉपी का बड़ा-बडा फोटोस्टेट बीएचयू के अलग-अलग फैकेल्टी में चस्पा कर लिख दिया गया कि ये लोग देश के गद्दार हैं. पोस्टर में लिखा है कि, 'ये लोग घुसपैठियों के यार हैं, देश के गद्दार हैं.'
इस पोस्टर को लेकर बीएचयू में भी चर्चा का बाजार गर्म है. एक छात्र ने बताया कि कुछ प्रोफेसर एनआरसी और सीएए के खिलाफ एक कैंपेन चला रहे हैं. उनका कहना है कि एनआरसी और सीएए भारत के संविधान के खिलाफ है. भारत में कहा जाता है कि देश के चार सिपाही हैं. हिंदू, मुस्लि, सिख और ईसाई. हमें सिखाया जाता है कि सभी लोग बराबर हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. दूसरी बात यह है कि सभी को अभिव्यक्ति और सोच की आजादी है. ऐसे में पोस्टर के साथ जो लिखा गया है, वह बिल्कुल गलत है.