- प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच सात दिनों से विवाद चल रहा है.
- विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद के गंगा स्नान के दौरान पुलिस द्वारा रोकने से हुई थी.
- CM योगी आदित्यनाथ और शंकराचार्य के बीच कालनेमि और औरंगजेब को लेकर बयानबाजी ने विवाद को राजनीतिक रूप दिया है.
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद बीते 7 दिनों से जारी है. इस विवाद में बयानबाजी का दौर कालनेमि से लेकर औरंगजेब तक पहुंच चुका है. एक तरह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद हैं तो दूसरी ओर यूपी शासन के मुखिया होने के नाते सीएम योगी आदित्यनाथ. दोनों तरफ भगवाधारी हैं. ऐसे में यह लड़ाई एक रूप से भगवा Vs भगवा की भी हो चुकी है. इस बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में कुछ युवकों द्वारा नारेबाजी और हंगामे की भी खबर सामने आई. जिसे शंकाराचार्य के अनुयायियों ने उनपर हमले की कोशिश बताया है. इस पूरे विवाद में अब तक क्या कुछ हुआ? आइए जानते हैं.
एक तरफ से कालनेमि तो दूसरी ओर से औरंगजेब की उपमा
कथित तौर पर एक संत के अपमान से शुरू हुई यह लड़ाई अब राजनीतिक रूप ले चुकी है. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बहाने यूपी सरकार पर हमलावर हैं. दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कालनेमि से सावधान रहने की बात कह कर विवाद को और बढ़ा दिया है. हालांकि सीएम के इस बयान के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी औरंगजेब, हिंदू नहीं हुमांयू का बेटा जैसे बयान देकर बवाल को और बढ़ा दिया है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद.
केशव प्रसाद मौर्य पर शंकराचार्य बोले- ऐसे ही व्यक्ति को सीएम बनना चाहिए
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को कहा कि मामले का पटाक्षेप हो जाना चाहिए. इसका मतलब वह (डिप्टी सीएम) यह मानते हैं कि उनके अधिकारियों से कुछ गलती हो गई है. उनका यह समझदारी भरा बयान है. उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक सही सच सामने रखी है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि बीजेपी को ऐसे ही समझदार व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनना चाहिए था, तो प्रदेश के लिए भी यह अच्छा होता.

सनातन का ढिंढोरा पीट रही भाजपा सरकारः शिवपाल यादव
भारतीय जनता पार्टी की सरकार सनातन का ढिंढोरा पीट रही है. सनातन में 4 शंकराचार्य हैं, उनमें से एक शंकराचार्य को गंगा नहीं नहाने दिया गया. यह शंकराचार्य जी का अपमान तो है ही, साथ ही गंगा जी का भी अपमान है. ये लोग झूठे लोग हैं. केशव प्रसाद मौर्या के बयान पर शिवपाल यादव बोले- आप जानते हो जो डिप्टी सीएम है, केशव प्रसाद मौर्या की दुर्दशा क्या है? विभाग में किसी चपरासी का ट्रांसफर तक नहीं कर सकते हैं, बजट नहीं दे सकते हैं.
देश भर में हो रहे हिंदू सम्मेलन और पद यात्राओं पर शिवपाल यादव ने कहा कि बीजेपी के लोग ढोंगी है, इनकी बात का कोई ठिकाना नहीं. ये लोग केवल जनता को भड़काने और भ्रमित करने का काम करते हैं.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर हंगामा
इस बीच माघ मेला के सेक्टर चार में अपने शिविर के बाहर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के बाहर हंगामा भी हुआ. कुछ युवकों ने हाथ में भगवा झंडा लिए नारे लगाए. अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर युवकों ने लगाए ‘आई लव बुलडोजर बाबा' के नारे लगाए. जिसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर प्रभारी पंकज पांडे की ओर से कल्पवासी थाने में तहरीर दी गई.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जान को बताया गया खतरा
तहरीर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए खतरा बताया गया. शिविर में रह रहे श्रद्धालुओं और शिविर की संपत्ति को भी खतरा बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई. तहरीर के मुताबिक शिविर के बाहर शाम 6:30 से 7:30 बजे के बीच कुछ असामाजिक तत्व पहुंच गए. तहरीर में आरोप लगाया गया है कि वह हाथों में लाठी डंडे और भगवा झंडा लिए हुए थे.
कुछ युवक जबरन शिविर में प्रवेश करने लगे. बाहर से आए युवकों ने उपद्रव मचाने की कोशिश की. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सेवकों और जबरन घुसे लोगों के बीच बहस हुई. उनके सेवकों ने हंगामा कर रहे लोगों को शिविर से बाहर निकाला.
शंकराचार्य के शिविर में हंगामा करने वाले आरोपी ने क्या कुछ कहा?
अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में नारेबाजी करने वाले युवकों ने अब एक वीडियो जारी करते अपना पक्ष बताया. संगठन से जुड़े सचिन कुमार नामक युवक नें पुलिस को एक तहरीर भी दी हैं, जिसमें आरोप लगाया कि हम लोग योगी सरकार के कार्यों से प्रभावित हैं. उनका समर्थन करने के लिए वहां गए थे. लेकिन स्वामी अविनमुक़्तेश्वरानंद के लोगों ने उनके साथ मारपीट की. जिसमें उनका एक कार्यकर्ता घायल भी हुआ हैं.
सचिन ने वीडियो भी जारी किया, जिसमें उसने कहा कि स्वामी अविन्मुतेश्वरानंद ने योगी जी की तुलना मुग़लों से की है, जो बहुत ही निंदनीय है. इसी से आहत होकर हम लोग योगी जी के समर्थन मे गए थे. वहां पर हमने किसी से कोई अभद्रता या हमला नहीं किया था, बल्कि हम लोग सिर्फ आई लव बुलडोज़र बाबा का नारा लगा रहे थे.
कैसे हुई थी इस विवाद की शुरुआत, जानिए
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े इस विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या पर हुई थी. 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में गंगा स्नान करने संगम नोज की ओर जा रहे थे. तब पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा. विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई. इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए. प्रशासन का कहना था कि उस रोज संगम नोज पर भारी भीड़ थी. ऐसे में उन्हें वाहन छोड़कर पैदल जाने की बात कही गई थी.
बाद में प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए. पहले में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने और दूसरे में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए. प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए. अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब भेज दिए थे. अपने जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनकी ओर से कोई अव्यवस्था नहीं फैलाई गई. उस दिन जो कुछ हुआ वो सीसीटीवी में कैद है. प्रशासन सार्वजनिक रूप से सीसीटीवी वीडियो चेक करें.
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