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11 साल पुरानी शादी को अटूट बनाने रूसी कपल ने हिंदू रीति-रिवाज से की शादी, बताया- क्यों चुना बनारस शहर

सनातन धर्म की महत्ता और भारतीय संस्कृति का आकर्षण आज पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है. यही कारण है कि अब विदेशी जोड़े भी सात जन्मों के अटूट बंधन में बंधने के लिए हिंदू रीति-रिवाजों को अपना रहे हैं.

11 साल पुरानी शादी को अटूट बनाने रूसी कपल ने हिंदू रीति-रिवाज से की शादी, बताया- क्यों चुना बनारस शहर
  • रूस के एक दंपति ने 11 साल बाद काशी में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पुनः विवाह संपन्न किया
  • विवाह राजेंद्र प्रसाद घाट के नरवावीर बाबा मंदिर में पारंपरिक भारतीय परिधानों और विधि-विधान के साथ हुआ
  • विदेशी जोड़े ने भगवान शिव की नगरी काशी को अपने आध्यात्मिक विवाह के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना
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वाराणसी (काशी):

सनातन धर्म की महत्ता और भारतीय संस्कृति का आकर्षण आज पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है. यही कारण है कि अब विदेशी जोड़े भी सात जन्मों के अटूट बंधन में बंधने के लिए हिंदू रीति-रिवाजों को अपना रहे हैं. धर्म की नगरी काशी के डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर एक ऐसा ही अनूठा नजारा देखने को मिला, जब रूस के एक दंपति ने पूरे विधि-विधान से विवाह कर सनातन धर्म के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की.

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11 साल पहले रूस में हुई थी शादी, अब काशी में लिए 'सात फेरे'
रूस के रहने वाले 55 वर्षीय कांसटेनटाइन और 35 वर्षीय मरीना ने वैसे तो 11 साल पहले अपने देश के तौर-तरीकों से शादी की थी. लेकिन भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें मोक्ष की नगरी काशी खींच लाई. 11 साल के साथ के बाद, इस जोड़े ने भगवान शिव की नगरी में अग्नि को साक्षी मानकर एक बार फिर विवाह किया और सात जन्मों तक साथ निभाने का वचन लिया.
 

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भारतीय परिधान और पूरे विधि-विधान से संपन्न हुई रस्में
राजेंद्र प्रसाद घाट स्थित नरवावीर बाबा मंदिर में यह विवाह संपन्न हुआ. विदेशी जोड़ा पूरी तरह भारतीय रंग में रंगा नजर आया. दूल्हा और दुल्हन ने पारंपरिक भारतीय वस्त्र धारण किए थे. पुजारी शिवाकांत पांडे ने मंत्रोच्चार के साथ फेरे, सिंदूरदान और कन्यादान की रस्में पूरी कराईं. अग्नि के समक्ष सात फेरे लेने के बाद कांसटेनटाइन ने मरीना की मांग भरी और फिर दोनों ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई.

"शिव की नगरी से बढ़कर कुछ नहीं"
विदेशी दंपति ने बताया कि उनकी भारतीय संस्कृति में बहुत अधिक रुचि है. काशी को चुनने के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, "काशी दुनिया का सबसे पवित्र शहर है. भगवान शिव के प्रति हमारी अटूट श्रद्धा है, इसलिए हमने निर्णय लिया कि अपने रिश्ते को आध्यात्मिक पूर्णता देने के लिए बाबा विश्वनाथ की नगरी से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती."
  

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पुजारियों ने भी की सराहना
मंदिर के पुजारी शिवाकांत पांडे ने बताया कि यह देखना सुखद है कि विदेशी मेहमान सनातन परंपराओं को इतनी श्रद्धा से अपना रहे हैं। उन्होंने बताया कि विवाह के दौरान सभी शास्त्रीय नियमों का पालन किया गया, जैसा एक पारंपरिक हिंदू विवाह में होता है।

बढ़ रहा है 'सनातन वेडिंग' का ट्रेंड
पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी विदेशी जोड़ों के लिए 'वेडिंग डेस्टिनेशन' के रूप में उभरा है. भारतीय संस्कारों, मंत्रों की शक्ति और विवाह के आध्यात्मिक अर्थ को समझने के बाद विदेशी नागरिक यहां आकर वैदिक पद्धति से विवाह करना गर्व की बात मानते हैं.
 

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