- उत्तर प्रदेश के महोबा में मुस्लिम समाज ने सामूहिक मृत्युभोज पर रोक लगाने का फैसला लिया है
- मकनियापुरा मस्जिद में हुई बैठक में तीजा और चालीसवें के आवामी खाने पर रोक लगाई गई है
- इस फैसले का मकसद गरीबों को कर्ज के बोझ से बचाना और फिजूलखर्ची को रोकना है
उत्तर प्रदेश के महोबा में सामाजिक सुधार की दिशा में मुस्लिम समाज ने एक बड़ा फैसला लिया है. किसी के भी इंतकाल के बाद होने वाले सामूहिक मृत्युभोज पर रोक लगा दी गई है. शहर काजी और उलेमाओं की मौजूदगी में ये बड़ा फैसला लिया गया. तीजा और चालीसवें के सामूहिक भोज यानी आवामी खाने पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है. ये पहल गरीबों को कर्ज के बोझ से बचाने और फिजूलखर्ची रोकने के मकसद से की गई है.
तीजा और चालीसवें पर नहीं होगी आवामी दावत
महोबा की मकनियापुरा मस्जिद में बुधवार रात को मुस्लिम समाज की एक बैठक हुई थी. इस बैठक में काजी आफाक हुसैन, हाफिज, उलेमाओं समेत समाज के 100 से ज्यादा लोग मौजूद थे. दो घंटे तक चली इस बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि अब मृत्यु के बाद तीजा और चालीसवें पर होने वाला सार्वजनिक मृत्यु भोज नहीं होगा. आवामी खाना अब नहीं होगा, इससे गरीब आदमी पर बहुत बोझ पड़ता है.

सामूहिक मृत्यु भोज से गरीबों पर पड़ता है बोझ
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा कि तीजा और चालीसवें में निकाह के वलीमे की तरह बड़ी दावत इस्लाम, शरीयत और कुरान के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि अमीर लोगों को देखकर गरीब लोग भी कर्ज लेकर इन रस्मों को निभाने के लिए मजबूर होते हैं.

फिजूलखर्मी पर लगाई कगाम
शहर काजी ने कहा कि आवामी खाने पर रोक से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो कर्ज लेकर इन रस्मों को निभाने के लिए मजबूर होते हैं. इससे फिजूलखर्ची पर भी रोक लगेगी. वहीं मौलाना जमालुद्दीन ने कहा कि, शरीयत के मुताबिक, फातिहा में शामिल होने वाले लोग सिर्फ दुआ करके वापस लौटें.

नियम तोड़ने वाले का होगा सामाजिक बहिष्कार
उन्होंने ये भी साफ किया कि तीजे और चालीसवें का खाना सिर्फ दूर से आए रिश्तेदारों, गरीबों और मदरसे के बच्चों को ही खिलाया जाएगा आम लोगों के लिए दावत का इंतजाम करना गलत है. इस फैसले का बैठक में मौजूद सभी लोगों ने समर्थन किया. इसके साथ ही यह तय किया गया कि जो भी इस नियम को तोड़कर सामूहित मृत्यु भोज आयोजित करेगा उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा.
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