- मुलायम सिंह यादव पार्टी और परिवार में अकेले से पड़ गए हैं.
- दोनों ही खेमों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है.
- अब पार्टी में दो-फाड़ के बाद पार्टी पर कब्जे की लड़ाई जारी है.
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नई दिल्ली:
देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावों की घोषणा के साथ ही सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी में कलह की भी घोषणा हो गई. एक तरफ बेटे से पार्टी में तख्तापलट करते हुए पिता को बेदखल सा कर दिया है वहीं पिता हर वो दांव चलने को तैयार है जिससे वह दोबारा पार्टी के शीर्ष पद पर काबिज हो सकें.
1 जनवरी को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा रामगोपाल यादव के साथ मिलकर पार्टी के विशेष अधिवेशन का आयोजन कर पिता और पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाते हुए खुद को पार्टी प्रमुख घोषित कर दिया. साथ ही उन्होंने पार्टी में उनके लिए चुनौती बने अपने चाचा शिवपाल यादव और मुलायम समर्थक को प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटा दिया.
पिता मुलायम सिंह यादव बेटे के खिलाफ खड़े हो गए और उन्होंने इस अधिवेशन को अवैध बताया और तख्तापलट को नकार दिया. हालात यह हैं कि मुलायम सिंह यादव पार्टी और परिवार में अकेले से पड़ गए हैं. सारा मामला चुनावों में अपने प्रत्याशी को उतारने का रहा. दोनों ही खेमों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है और अब पार्टी में दो-फाड़ के बाद पार्टी पर कब्जे की लड़ाई जारी है. लड़ाई चुनाव आयोग तक आ गई है. यहां दिल्ली में अखिलेश यादव खेमे ने अपनी ओर से चुनाव आयोग में दावा मजबूत करते हुए कागजात सौंप दिए हैं.
(मुलायम सिंह यादव के घर पसरा सन्नाटा)
उधर, मुलायम सिंह यादव के घर लगभग सन्नाटा सा पसरा है. घर से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक उनके पास उनके भाई शिवपाल यादव और अमर सिंह पहुंचे हैं. कहा जा रहा है कि जयाप्रदा भी जल्द आ जाएंगी. कुल चार नेताओं के साथ मुलायम इस दंगल में जीत का दांव खेलने की तैयारी में हैं.
सूत्र कह रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव का पूरा दांव तकनीकि आधार पर है. मुलायम खेमे का कहना है कि जब पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने विशेष अधिवेशन का आयोजन किया था तब वह पार्टी से निष्कासित किए जा चुके थे. इसलिए यह पूरा अधिवेशन ही अवैध है.
सोमवार को मुलायम सिंह यादव अपने नेताओं के साथ चुनाव आयोग में अपनी बात रखेंगे. यह अलग बात है कि मुलायम सिंह यादव केवल चार बड़े नेताओं के साथ इतनी बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं. पिछले दोनों में भी केवल चार ही नेता उनके साथ आए. बताया जा रहा है कि रविवार को मुलायम सिंह यादव से मिलने नोएडा से कुछ पार्टी के समर्थक आए थे. उन्होंने मुलाकात की और मुलायम सिंह यादव ने साफ कहा कि वे उनके साथ हैं, लेकिन अखिलेश के समर्थन में भी हैं. उनका कहना है कि संख्या बल अखिलेश यादव के साथ है.
दिल्ली में मुलायम के घर बैठक में चार नेता रहते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुलायम सिंह यादव कई बार साफ कह चुके हैं कि अखिलेश उनके बेटे हैं और वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, लेकिन इन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जैसे ही अमर सिंह मिलने आते हैं इनके सुर बदल जाते हैं.
वहीं, मीडिया से बातचीत में मुलायम सिंह यादव साफ कह चुके हैं कि वह अंतिम क्षण तक लड़ने को तैयार हैं. मुलायम के करीबी रहे नेताओं का कहना है कि मुलायम सिंह काफी जुझारू नेता रहे हैं. वह किसानों के लिए सिंचाई के मुद्दे पर 15 साल की उम्र में ही जेल जा चुके हैं. फिर अखाड़े में उन्होंने पहलवानी की. मुलायम सिंह यादव का कहना है कि उनके साथ लोग रहे न रहें, हार नहीं मानेंगे...
1 जनवरी को लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा रामगोपाल यादव के साथ मिलकर पार्टी के विशेष अधिवेशन का आयोजन कर पिता और पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाते हुए खुद को पार्टी प्रमुख घोषित कर दिया. साथ ही उन्होंने पार्टी में उनके लिए चुनौती बने अपने चाचा शिवपाल यादव और मुलायम समर्थक को प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटा दिया.
पिता मुलायम सिंह यादव बेटे के खिलाफ खड़े हो गए और उन्होंने इस अधिवेशन को अवैध बताया और तख्तापलट को नकार दिया. हालात यह हैं कि मुलायम सिंह यादव पार्टी और परिवार में अकेले से पड़ गए हैं. सारा मामला चुनावों में अपने प्रत्याशी को उतारने का रहा. दोनों ही खेमों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है और अब पार्टी में दो-फाड़ के बाद पार्टी पर कब्जे की लड़ाई जारी है. लड़ाई चुनाव आयोग तक आ गई है. यहां दिल्ली में अखिलेश यादव खेमे ने अपनी ओर से चुनाव आयोग में दावा मजबूत करते हुए कागजात सौंप दिए हैं.

उधर, मुलायम सिंह यादव के घर लगभग सन्नाटा सा पसरा है. घर से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक उनके पास उनके भाई शिवपाल यादव और अमर सिंह पहुंचे हैं. कहा जा रहा है कि जयाप्रदा भी जल्द आ जाएंगी. कुल चार नेताओं के साथ मुलायम इस दंगल में जीत का दांव खेलने की तैयारी में हैं.
सूत्र कह रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव का पूरा दांव तकनीकि आधार पर है. मुलायम खेमे का कहना है कि जब पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने विशेष अधिवेशन का आयोजन किया था तब वह पार्टी से निष्कासित किए जा चुके थे. इसलिए यह पूरा अधिवेशन ही अवैध है.
सोमवार को मुलायम सिंह यादव अपने नेताओं के साथ चुनाव आयोग में अपनी बात रखेंगे. यह अलग बात है कि मुलायम सिंह यादव केवल चार बड़े नेताओं के साथ इतनी बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं. पिछले दोनों में भी केवल चार ही नेता उनके साथ आए. बताया जा रहा है कि रविवार को मुलायम सिंह यादव से मिलने नोएडा से कुछ पार्टी के समर्थक आए थे. उन्होंने मुलाकात की और मुलायम सिंह यादव ने साफ कहा कि वे उनके साथ हैं, लेकिन अखिलेश के समर्थन में भी हैं. उनका कहना है कि संख्या बल अखिलेश यादव के साथ है.
दिल्ली में मुलायम के घर बैठक में चार नेता रहते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुलायम सिंह यादव कई बार साफ कह चुके हैं कि अखिलेश उनके बेटे हैं और वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, लेकिन इन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जैसे ही अमर सिंह मिलने आते हैं इनके सुर बदल जाते हैं.
वहीं, मीडिया से बातचीत में मुलायम सिंह यादव साफ कह चुके हैं कि वह अंतिम क्षण तक लड़ने को तैयार हैं. मुलायम के करीबी रहे नेताओं का कहना है कि मुलायम सिंह काफी जुझारू नेता रहे हैं. वह किसानों के लिए सिंचाई के मुद्दे पर 15 साल की उम्र में ही जेल जा चुके हैं. फिर अखाड़े में उन्होंने पहलवानी की. मुलायम सिंह यादव का कहना है कि उनके साथ लोग रहे न रहें, हार नहीं मानेंगे...
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