- मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित परिवार की मां की हत्या और बेटी के अपहरण की घटना ने उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया है
- प्रशासन ने पीड़ित परिवार को पचास लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया है
- अपहरण के पैंतालीस घंटे बाद भी पुलिस लड़की को बरामद करने में सफल नहीं हो पाई और 12 लोगों को हिरासत में लिया गया
मेरठ के कपसाड़ गांव में गुरुवार को हुई सनसनीखेज वारदात के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. प्रशासन ने मुआवजे और नौकरी की मांग तो मान ली है, लेकिन अपहृत बेटी का अब तक कोई सुराग न मिलने से परिजनों और ग्रामीणों में भारी रोष है. मेरठ के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में एक दलित परिवार पर टूटे दुखों के पहाड़ ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. गुरुवार को मां की हत्या कर दी गई और बेटी का अपहरण कर लिया गया.
भाई ने बताया, क्या हुआ उस दिन?
भाई ने बताया कि मैं और बहन सुबह आठ बजे खेत जा रहे थे तभी मां की हत्या करके बहन का अपहरण कर लिया गया. आरोपी गांव का ही रहने वाला है, जिससे परिवार को पहले से ही खतरा महसूस हो रहा था. भाई ने कहा, "जब तक मेरी बहन घर नहीं आती, हमें न्याय अधूरा लगेगा. मुआवजा और नौकरी ठीक है, लेकिन हमारी प्राथमिकता मेरी बहन की सुरक्षा है."
मामले से जुड़े बड़े अपडेट्स
- मृतका सुनीता का शुक्रवार देर रात भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया. प्रशासन ने पीड़ित परिवार की मांगों को स्वीकार करते हुए 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया है.
- अपहरण के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस लड़की को बरामद करने में विफल रही है. मेरठ पुलिस ने अब तक पूछताछ के लिए 12 लोगों को हिरासत में लिया है.
- सुरक्षा के मद्देनजर कपसाड़ गांव में भारी पुलिस बल और RAF (रैपिड एक्शन फोर्स) की तैनाती की गई है. आज (शनिवार) नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद दोपहर 1 बजे और कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल सुबह 11 बजे गांव पहुंचने वाला है. शुक्रवार को बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने भी गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की थी.
- बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी भी इसी गांव का निवासी है, जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश और भी गहरा है. समाजवादी पार्टी ने सरकार की 'बुलडोजर नीति' पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि दलित बेटी के अपहरणकर्ताओं के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
- गांव में पुलिस की गश्त जारी है, लेकिन ग्रामीण केवल एक ही मांग कर रहे हैं- "हमारी बेटी को वापस लाओ."
राजनीतिक सरगर्मी और न्याय की मांग
इस घटना ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है. विपक्षी दलों ने योगी सरकार की सुरक्षा व्यवस्था को घेरे में लिया है. सपा नेताओं का कहना है कि "बेटी बचाओ" का नारा देने वाली सरकार में दलित बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. वहीं, पुलिस का दावा है कि उनकी कई टीमें अलग-अलग इलाकों में दबिश दे रही हैं और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लड़की को बरामद कर लिया जाएगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं