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मायावती का चंद्रशेखर पर हमला, मेरठ कांड पर अखिलेश का PDA हल्ला, यूपी की सियासत में भूचाल

मेरठ में एक छात्रा को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अब पूरी तरह राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है, जहां पीड़ित परिवार की न्याय की मांग पर सियासी बयानबाजी भारी पड़ रही है.

मेरठ थप्पड़कांड पर सियासत जारी
  • मेरठ में छात्रा की हत्या के बाद परिवार को न्याय दिलाने के लिए हुए प्रदर्शन सियासी विवाद का केंद्र बन गए हैं.
  • एसएसपी अविनाश पांडेय के पीआरओ को धमकी भरी कॉल मिली, जिसका ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
  • चंद्रशेखर आजाद ने एसएसपी की अपील पर तंज कसते हुए पेड़ लगाने के माध्यम से जनता के फैसले की बात कही.
नई दिल्ली:

यूपी के मेरठ में एक छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरी भीड़ अब परिवार को न्याय दिलाने के दायरों को पार कर सियासी अखाड़े में तब्दील हो चुकी है. पीड़ित परिवार की चीखों पर अब सियासी धुनें भारी पड़ती दिखाई दे रही हैं. प्रशासनिक विफलता और पुलिसिया रवैये के बाद इस संवेदनशील मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है.

मेरठ कलेक्ट्रेट पर हुए भारी प्रदर्शन के बाद SSP अविनाश पांडेय के पीआरओ रमाकांत पचौरी को एक कथित धमकी भरी कॉल मिली है, जिसका ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस कथित ऑडियो में कप्तान साहब को गाड़ी में बंद करने जैसी बातें कही जा रही हैं.

SSP की अपील पर चंद्रशेखर आजाद का तंज

इस बीच, चौतरफा घेराबंदी और विरोध के बाद खुद एसएसपी अविनाश पांडेय सामने आए और उन्होंने एक अनोखी अपील करते हुए कहा कि जो लोग मेरे समर्थन में हैं, वे आगामी वृक्षारोपण महोत्सव में एक पेड़ लगाएं और पॉलिथीन का इस्तेमाल न करें. वहीं, जो लोग मेरे विरोध या गुस्से में हैं, उनसे भी मेरी अपील है कि वे दो पेड़ लगाएं. इधर, SSP की अपील पर तंज कसते हुए आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि वे एक हजार पेड़ लगाएंगे. लेकिन उन पेड़ों की छांव में कौन बैठेगा, इसका फैसला अब जनता खुद करेगी.

चंद्रशेखर आजाद की पार्टी द्वारा पीड़ित परिवार के पक्ष में किए जा रहे उग्र प्रदर्शनों और नारों पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बड़ा हमला बोला है. मायावती ने चंद्रशेखर और अन्य विपक्षी दलों के इन प्रदर्शनों को शुद्ध रूप से एक 'सियासी हथकंडा' करार दिया है. इस वार के जवाब में चंद्रशेखर ने बहुजन नायक कांशीराम को अपना मार्गदर्शक बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनका एक पुराना वीडियो भी साझा कर अपनी सियासी जड़ें मजबूत दिखाने की कोशिश की.

अखिलेश की मुलाकात और 'PDA' कार्ड

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आज पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया. इस संवेदनशील मुद्दे पर भी अखिलेश ने 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड खेलने में देर नहीं की. उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'X' पर सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए लिखा, 'जब वो खुद ही बेलगाम है जिसके हाथ में लगाम है, तो फिर उनका क्या जो उनके दरबार में दरबान हैं! जनता पर अन्याय हो रहा है. जिस पुलिस से न्याय की उम्मीद होती है, उनके ही उच्चाधिकारी अहंकार में आम जनता के गाल पर थप्पड़ मार रहे हैं. PDA अब सहेगा नहीं, कहेगा! जनता अब भाजपाइयों का केवल भाषण सुनने के मूड में नहीं है.'

इस सियासी घमासान में कांग्रेस भी पीछे नहीं रही. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी योगी सरकार और मेरठ प्रशासन पर तीखा निशाना साधते हुए कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है.

2027 का चुनाव और 21% दलित वोटों का गणित

आखिर एक छात्रा की अस्मत और इंसाफ के इस संवेदनशील मुद्दे को 'दलित राजनीति' का केंद्र क्यों बनाया जा रहा है? इसके पीछे छिपा है साल 2027 के विधानसभा चुनाव का गणित. आंकड़े बताते हैं कि यूपी में दलित वोट बैंक किसी भी दल की किस्मत बदलने की ताकत रखता है. यूपी की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है. राज्य विधानसभा की कुल 403 सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं. दलित मतदाता यूपी की 140 से अधिक सीटों पर सीधे परिणाम तय करते हैं, जबकि 60 से 70 सीटों पर वे निर्णायक भूमिका में होते हैं.

ये आंकड़े साफ करते हैं कि बसपा की ताकत उसका जाटव वोट बैंक रहा है. चंद्रशेखर आजाद सीधे तौर पर मायावती के इसी सबसे मजबूत जाटव वोट बैंक में सेंधमारी करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, अखिलेश यादव का 'PDA' फॉर्मूला भाजपा के पास गए गैर-जाटव दलितों और बसपा के पारंपरिक वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने की जुगत में है.

दरअसल, बीए की छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हाल ही मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को एसएसी अव‍िनाश पांडे ने थप्पड़ मारे थे, ज‍िनके कई वीड‍ियो वायरल हुए. उसके बाद अब एसएसपी के सीयूजी नंबर पर धमकीभरा कॉल आया है. मीड‍िया की खबरों के अनुसार फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को अधिवक्ता बताते हुए एसएसपी को सीधे चुनौती दी है.  

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