सपा कार्यकर्ता खुशियां मनाते हुए.
- यूपी की दो सीटों पर सपा प्रत्याशी का अच्छा प्रदर्शन
- गोरखपुर सीएम योगी की सीट रही है
- फूलपुर डिप्टी सीएम मौर्या की सीट थी.
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नई दिल्ली:
यूपी में हुए दो लोकसभा सीटों के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है. फूलपुर की सीट जो कि राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की सीट थी, में सपा प्रत्याशी ने अच्छा चुनाव लड़ा. उन्होंने दोपहर तक 40 हजार से ज्यादा मतों की लीड ले ली.
यूपी की राजनीति के लिए 1993 काफी अहम साल रहा है. इस चुनाव में तत्कालीन प्रमुख मुलायम सिंह यादव और कांशीराम का गठबंधन हुआ था और पार्टी मजबूती के साथ सत्ता में आई थी. तब यह नारे लगे थे, 'मिले मुलायम कांशीराम हवा में उड़ गए जय श्रीराम'.
वहीं इस चुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ ने चुनाव में कहा था, 'कह रहीम कैसे निभे बेर केर के संग'. 'बिच्छू हमेशा डंक मारता है', 'आंधी तूफान सांप और छछूंदर साथ खड़े हो जाते हैं'.
वहीं, योगी की कैबिनेट के मंत्री नंद गोपाल नंदी ने योगी के सामने एक चुनावी रैली में मायावती को शूरपर्णखा, अखिलेश को मेघनाद, मुलायम को रावण कहा था.'
कहा जा रहा है कि ये दिखाता है कि बीजेपी को लग रहा था कहीं मोदी मैजिक के चलते जो जाति समीकरण टूटा था, वह फिर एक न हो जाए. बीजेपी की चिंता रही है कि जातियों का मिथक जो टूटा था वह अभी बरकरार रहेगा या नहीं. लेकिन अगर बीजेपी हारती है तो यह उनकी (जातियों) 'घर वापसी' भी होगी. सपा-बसपा गठबंधन जीतता है, तो एक बार फिर यह माना जाएगा कि यूपी में जातिगत राजनीति एक बार फिर हावी होगी.
यूपी की राजनीति के लिए 1993 काफी अहम साल रहा है. इस चुनाव में तत्कालीन प्रमुख मुलायम सिंह यादव और कांशीराम का गठबंधन हुआ था और पार्टी मजबूती के साथ सत्ता में आई थी. तब यह नारे लगे थे, 'मिले मुलायम कांशीराम हवा में उड़ गए जय श्रीराम'.
वहीं इस चुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ ने चुनाव में कहा था, 'कह रहीम कैसे निभे बेर केर के संग'. 'बिच्छू हमेशा डंक मारता है', 'आंधी तूफान सांप और छछूंदर साथ खड़े हो जाते हैं'.
वहीं, योगी की कैबिनेट के मंत्री नंद गोपाल नंदी ने योगी के सामने एक चुनावी रैली में मायावती को शूरपर्णखा, अखिलेश को मेघनाद, मुलायम को रावण कहा था.'
कहा जा रहा है कि ये दिखाता है कि बीजेपी को लग रहा था कहीं मोदी मैजिक के चलते जो जाति समीकरण टूटा था, वह फिर एक न हो जाए. बीजेपी की चिंता रही है कि जातियों का मिथक जो टूटा था वह अभी बरकरार रहेगा या नहीं. लेकिन अगर बीजेपी हारती है तो यह उनकी (जातियों) 'घर वापसी' भी होगी. सपा-बसपा गठबंधन जीतता है, तो एक बार फिर यह माना जाएगा कि यूपी में जातिगत राजनीति एक बार फिर हावी होगी.
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UP By Polls 2018, यूपी उपचुनाव 2018