ग्रेटर नोएडा में 6 साल की मासूम बच्ची की रेप कर हत्या कर दी गई थी. हल्दौनी गांव में बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस ने शव बरामद किया था. अब पुलिस ने इस मामले के कुछ घंटे बाद ही आरोपी को एनकाउंटर में ढेर कर दिया है.
इस मामले की बात करें तो परिजनों की शिकायत पर ईकोटेक-3 थाने में मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बच्ची की तलाश के लिए 5 टीमों का गठन किया था. इसके बाद पुलिस ने इलाके के कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले थे और वहीं से आरोपी की पहचान हो पाई थी. जब पुलिस आरोपी को पकड़ने गई तो उसने भागने की कोशिश की. ऐसे में पुलिस मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गोली लगी और वो घायल हो गया, घायल अवस्था में ही उसे पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.
आरोपी की पहचान बलराज के रूप में हुई है. एनडीटीवी संवाददाता की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी बलराज ने पुलिस पर फायरिंग की थी, वो भागने की कोशिश में था. जब पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की तो उसे गोली लग गई और वो बुरी तरह जख्मी हो गया. अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई.
यूपी में एनकाउंटर के आंकड़े
जानकारी के लिए बता दें कि यूपी में योगी सरकार के 9 सालों के कार्यकाल में पुलिस ने ताबड़तोड़ एक्शन लेते हुए 17,000 से अधिक एनकाउंटर किए हैं. रोजाना औसतन 5 मुठभेड़ हुई हैं, जिसमें 289 अपराधी ढेर और 11,000 से ज्यादा घायल हुए हैं. सबसे अधिक एनकाउंटर मेरठ जोन में दर्ज हुए, जहां पुलिस ने 4,813 कार्रवाई की गईं. यहां एनकाउंटर में 8,921 अपराधी दबोचे गये जबकि 3,513 अपराधी घायल हुए. वहीं 97 कुख्यात अपराधियों को मौके पर ही मार गिराया गया. मेरठ जोन की मुठभेड़ के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो पुलिसकर्मी शहीद हो गये. एनकाउंटर कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा है. इसी तरह वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया जबकि 29 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया. इस दौरान 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए. पूरे प्रदेश में वाराणसी जोन एनकाउंटर कार्रवाई में दूसरे स्थान पर है. वहीं एनकाउंटर कार्रवाई में पूरे प्रदेश में आगरा जोन तीसरे स्थान पर है. यहां 2,494 एनकाउंटर की कार्रवाई की गईं, जिनमें 5,845 अपराधियों को दबोचा गया. इस दौरान 968 अपराधी घायल हुए जबकि 24 अपराध मार गिराए गए. मुठभेड़ के दौरान 62 पुलिसकर्मी घायल हुए.
एनकाउंटर आंकड़ों पर नजर डालें तो बरेली जोन में 2,222 मुठभेड़ के दौरान 21 दुर्दांत अपराधियों को मारा गया, वहीं लखनऊ जोन में 971 मुठभेड़ के दौरान 20 अपराधी मारे गए. गाजियाबाद कमिश्नरी में 7,89 मुठभेड़ों में 18 अपराधी मारे गये. सभी कमिश्नरेट में यह सबसे अधिक है. कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12, लखनऊ कमिश्नरी में 147 मुठभेड़ों में 12 और प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधियों को मारा गया. इसी तरह आगरा कमिश्नरी में 489 मुठभेड़ों में 10, गौतमबुद्ध नगर में 1,144 मुठभेड़ों में 9, गोरखपुर जोन में 699 मुठभेड़ों में 8, वाराणसी कमिश्नरी में 146 मुठभेड़ों में 8, प्रयागराज कमिश्नरी में 150 मुठभेड़ों में 6 और कानपुर कमिश्नरी में 253 मुठभेड़ों में 4 अपराधियों को ढेर किया गया.
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