- फिरोजाबाद जिले में तहसीलदार राखी शर्मा और जिलाधिकारी रमेश रंजन के बीच गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ है.
- तहसीलदार ने डीएम कार्यालय के कर्मचारियों पर ₹1.75 लाख मूल्य के iPhone और iWatch रिश्वत लेने का आरोप लगाया है.
- तहसीलदार ने भ्रष्टाचार जांच रिपोर्ट में दबाव डालने और उत्पीड़न के कारण आठ महीने तक वेतन रुकने की बात कही है.
Firozabad DM vs Tehsildar Fight: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में दो अधिकारियों के बीच गजब की लड़ाई छिड़ी है. यहां टूंडला की तहलीलदार ने डीएम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. लेकिन इन आरोपों के बाद तहसीलदार पर ही एक्शन हो गया है. तहसीलदार को लखनऊ अटैच कर दिया गया है. दरअसल फिरोजाबाद में टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा और जिलाधिकारी (DM) रमेश रंजन के बीच उपजा विवाद एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है. 19 अप्रैल, 2026 तक की स्थिति के अनुसार, शासन ने तहसीलदार राखी शर्मा को उनके पद से हटाकर राजस्व परिषद मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध (अटैच) कर दिया है.
पौने दो लाख रुपए का आईफोन और आईवॉच लिया
तहसीलदार राखी शर्मा ने आरोप लगाया कि DM के कार्यालय के कर्मचारियों (OSD, पेशकार और क्लर्क) ने उनसे रिश्वत के रूप में ₹1.75 लाख का iPhone और iWatch लिया, जो वर्तमान में DM द्वारा उपयोग किया जा रहा है.
तहसीलदार राखी शर्मा का दावा है कि उन पर जमीन से जुड़ी एक भ्रष्टाचार की जांच रिपोर्ट को बदलने का दबाव बनाया गया था. इनकार करने पर उनका 8 महीने का वेतन रोक दिया गया, जिसे बाद में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जारी किया गया.
तहसीलदार की गई पदमुक्त, कमिश्नर करेंगे जांच
तहसीलदार के सार्वजनिक आरोपों के बाद, शासन ने उन्हें पदमुक्त कर दिया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है. अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए कमिश्नर विजय विश्वास पंत को नियुक्त किया गया है, जो आरोपों और विवादित जमीन मामले की फिर से जांच करेंगे.

17 अप्रैल को तहसीलदार ने सार्वजनिक लगाए थे आरोप
इससे पहले 17 अप्रैल को तहसीलदार राखी शर्मा ने जिलाधिकारी रमेश रंजन पर उत्पीड़न और अनुचित दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि शुक्रवार देर शाम तक इस संबंध में जिलाधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली.
डीएम और उनके दफ्तर के कर्मियों पर भी करप्शन का आरोप
तहसीलदार राखी शर्मा ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी रमेश रंजन और उनके कार्यालय ने उनसे कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी एक जांच रिपोर्ट को मनचाहे ढंग से प्रस्तुत करने का दबाव डाला. शर्मा ने कहा, “मुझसे रिपोर्ट को एक विशेष तरीके से पेश करने को कहा गया. जब मैंने ऐसा करने से इनकार किया, तो मुझे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया गया.”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह उत्पीड़न पिछले नौ महीने से जारी है. महिला अधिकारी ने आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उनका वेतन रोक दिया गया और सेवा अभिलेख में प्रतिकूल प्रविष्टि भी दी गई.
रिश्वत में दिए आईफोन को ही अभी यूज कर रहे डीएम
शर्मा ने यह भी दावा किया कि जिलाधिकारी के ओएसडी ने उनसे एक आईफोन की मांग की थी, जिसे उन्होंने उपलब्ध कराया और वह फिलहाल जिलाधिकारी द्वारा उपयोग में है. उनके अनुसार, बाद में अदालत के आदेश पर उनका वेतन जारी किया गया, लेकिन उत्पीड़न जारी रहा और उनके खिलाफ कई जांचें शुरू कर दी गईं.
तहसीलदार ने सीएम योगी से की थी जांच की मांग
तहसीलदार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए जिलाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की है. उन्होंने अपने तबादले को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका तबादला टूंडला से शिकोहाबाद कर दिया गया है, लेकिन अब तक उन्हें कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है.
जिलाधिकारी से नहीं हो सका संपर्क
जिलाधिकारी से संपर्क नहीं हो सका और उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. इस बीच, शर्मा ने एक समाचार चैनल के स्थानीय संवाददाता के खिलाफ टूंडला थाने में धमकी देने का आरोप लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है.
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