- लेंस्कार्ट ने अपने ड्रेस कोड विवाद के बाद नई सफाई जारी की है
- कारण था ड्रेस कोड में बिंदी, तिलक और कलावा पर प्रतिबंध और हिजाब तथा पगड़ी के लिए काले रंग की शर्तें लगाना
- पूर्व स्टोर मैनेजरों ने ऑडिट फेल होने पर वेतन कटौती व नौकरी समाप्ति का आरोप लगाया
आईवियर रिटेलर लेंसकार्ट चर्चा में है. अपने किसी नए प्रोडक्ट या ऑफर को लेकर नहीं बल्कि अपने ड्रेस कोड को लेकर सुर्खियां बटोर रहा है. लेंसकार्ट ने बिंदी-तिलक की मनाही के बाद हिजाब पहनने की परमिशन दे दी थी. विवाद बढ़ा तो अब लेंसकार्ट ने सफाई दी है. लेंसकार्ट ने सफाई दी कि ये भारतीयों की बनाई कंपनी है और हमारे 2400 से ज्यादा स्टोर्स हैं. बिंदी,तिलककी मनाही पर कहा कि अपनी आस्था, परंपराओं और पहचान के साथ लोग रोज काम पर आते हैं.ऐसी किसी चीज को हम कभी किसी से दरवाजे पर छोड़ने को नहीं कहेंगे. यह न लेंसकार्ट की पहचान है और न ही हम कभी ऐसे होंगे.
विवाद पर लेंसकार्ट की सफाई पढ़िए
लेंसकार्ट ने एक्स हैंडल पर लिखा कि हमने आपकी बात सुनी है,स्पष्ट रूप से और खुले दिल से सुनी है.पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय और ग्राहकों ने अपनी राय रखी और हमने उसे ध्यान से सुना है.आज हम अपने इन‑स्टोर स्टाइल गाइड को एक समान रूप में लागू कर रहे हैं और उसे पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक रूप से साझा कर रहे हैं.इन दिशानिर्देशों में हमारी टीम के सदस्यों की ओर से पहने जाने वाले हर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी आदि का स्पष्ट और बिना किसी भ्रम के स्वागत किया गया है.इन्हें किसी अपवाद की तरह नहीं, बल्कि हमारी पहचान के रूप में स्वीकार किया गया है.
लेंसकार्ट ने आगे लिखा कि भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बनाई गई कंपनी है. हमारे 2,400 से अधिक स्टोर ऐसे लोग चलाते हैं, जो अपनी आस्था, परंपराओं और पहचान के साथ रोज काम पर आते हैं.ऐसी किसी चीज को हम कभी किसी से दरवाजे पर छोड़ने को नहीं कहेंगे. अगर हमारे कार्यस्थल से जुड़ी किसी भी पिछली बातचीत या संदेश से किसी को ठेस पहुंची हो या किसी टीम सदस्य को यह महसूस हुआ हो कि उसकी आस्था का यहां स्वागत नहीं है, तो हमें इसके लिए गहरा खेद है.यह न लेंसकार्ट की पहचान है और न ही हम कभी ऐसे होंगे.
We have heard you. Clearly and openly. Over the past few days, our community and customers have spoken - and we have listened.
— lenskart (@Lenskart_com) April 18, 2026
Today, we are standardizing our In-Store Style Guide and sharing it publicly and transparently: https://t.co/lC8KlLLUZm
These guidelines explicitly and…
लेंसकार्ट ने आगे लिखा कि आज हम सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि जिस दस्तावेज को हम प्रकाशित कर रहे हैं उसके माध्यम से भी यह प्रतिबद्धता जताते हैं कि लेंसकार्ट के नाम से जुड़ी हर नीति, हर प्रशिक्षण सामग्री और हर संवाद इन मूल्यों को दर्शाएगा. हम इन दिशानिर्देशों को निष्पक्ष और समान रूप से लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और अपनी प्रक्रियाओं की लगातार समीक्षा व सुधार करते रहेंगे.हम और बेहतर करेंगे और आपका भरोसा लगातार जीतते रहेंगे.
बढ़ते विरोध को देखते हुए कंपनी ने अब यह विवादित ड्रेस कोड ऑफ कंडक्ट रद्द कर दिया है.कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि उनके लिए स्टोअर्स में पेशेवर, स्वच्छ और भरोसेमंद माहौल बनाए रखना जरूरी है, लेकिन साथ ही वे भारत की सांस्कृतिक विविधता का पूरा सम्मान करते हैं.
क्या था विवाद, अब वो भी समझ लीजिए
विवाद लेंसकार्ट का ड्रेस कोड था.इसमें तिलक, कलावा, बिंदी नहीं लगाने की बात कही गई थी. शादीशुदा हिंदू महिलाओं के लिए कहा गया था कि अगर सिंदूर लगाया जा रहा है, तो उसे बहुत कम मात्रा में लगाना चाहिए. हालांकि हिजाब और पगड़ी की इजाजत दी गई थी. हिजाब-पगड़ी के मामले में भी कहा गया कि उसका रंग काला होना चाहिए.
ऑनलाइन शेयर किए गए ड्रेस कोड डॉक्यूमेंट में लिखा है कि हिजाब से छाती का मध्यम हिस्सा ढका होना चाहिए. लेकिन हिजाब ऐसा नहीं हो जिससे कंपनी का लोगो ढक जाए. साथ ही स्टोर में बिंदी लगाने पर पाबंदी की बात कही गई थी. हाथ में पहनने वाले कलावे का जिक्र करते हुए कहा गया कि धार्मिक धागे/रिस्टबैंड उतार देने चाहिए.

कई लोगों की शिकायत
पुणे के एक पूर्व फ्लैगशिप स्टोर मैनेजर हर्ष हातेकर ने बताया कि अक्टूबर 2024 में ऑडिट के दौरान उनके स्टोर के कर्मचारियों के कलावा पहनने की वजह से ऑडिट अंक काट लिए गए थे.कलावा हिंदू परंपरा में मंदिर दर्शन या धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पहना जाने वाला पवित्र सूती धागा होता है. वहीं, पुणे के ही एक अन्य पूर्व स्टोर मैनेजर आकाश फालके ने दावा किया कि उन्होंने फरवरी 2025 में लेंसकार्ट के एचआर विभाग के सामने औपचारिक रूप से यह मुद्दा उठाया था. उनका कहना था कि ड्रेस कोड के तहत अलग‑अलग धार्मिक प्रतीकों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा. फालके का आरोप है कि इस मामले में उन्हें कभी लिखित रूप से कोई जवाब नहीं दिया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि धार्मिक पहचान से जुड़े ऑडिट फेल होने के बाद उनके वेतन और इंसेंटिव में कटौती की गई. आकाश फालके ने आगे आरोप लगाया कि फरवरी 2026 में महाराष्ट्र के समाधान पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने वाले दिन ही उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई.उन्होंने इस कार्रवाई को प्रतिशोध करार दिया है.

कंपनी के मालिक का बयान
लेंस्कार्ट के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बयान दिया था. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दस्तावेज एक पुरानी आंतरिक ट्रेनिंग फाइल था, न कि कंपनी की आधिकारिक एचआर पॉलिसी. उन्होंने माना कि उसमें बिंदी और तिलक से जुड़ी एक गलत लाइन थी, जिसे 17 फरवरी को ही हटा दिया गया था यानी मामला सार्वजनिक होने से कई हफ्ते पहले. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह इस गलती को पहले पकड़ नहीं पाए, जिसकी जिम्मेदारी वह लेते हैं. पीयूष बंसल ने दोहराया कि लेंस्कार्ट के कर्मचारियों की ओर से अपनाई जाने वाली हर परंपरा और हर सांस्कृतिक प्रतीक कंपनी की पहचान का अहम हिस्सा है.
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