Divorce Celebration Meerut: उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जहां एक परिवार बेटी के साथ जश्न मना रहा है. उसके गले में माला पहनाई गई, मिठाई खिलाई, परिवार के लोग डांस कर रहे हैं और पिता भी खुशी से झूम रहे हैं. यह तस्वीरें देखकर आपके मन में ख्याल आया होगा कि बेटी ने कहीं यूपीएससी में टॉप या स्पोर्ट्स में गोल्ड मेडल तो नहीं जीत लाई, लेकिन यह जश्न कुछ और ही वजह से मनाया जा रहा है.
दरअसल, फैमिली कोर्ट ने बेटी का तलाक मंजूर किया तो परिवार जश्न में डूब गया. मेरठ कचहरी में खूब मिठाइयां बांटी गई और ढोल की थाप पर परिवार के लोग खूब झूमे. इस जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और चर्चा का विषय भी बन गया है.

यह है पूरा मामला
दरअसल, मेरठ के शास्त्रीनगर इलाके के रहने वाले रिटायर्ड जज डॉ ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता की शादी 2018 में शाहजहांपुर के रहने वाले गौरव अग्निहोत्री से की थी. गौरव सेना में मेजर हैं और जालंधर में तैनात हैं. प्रणिता का एक बेटा भी है, लेकिन ससुरालियों का उत्पीड़न बढ़ता चला गया. मामला इतना बड़ा कि प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला कर लिया.
मामला फैमिली कोर्ट पहुंचा तो और प्रणिता और गौरव का तलाक मंजूर कर लिया गया. बस फिर क्या था पिता और रिश्तेदारों ने ढोल बुक किए, माला मंगवाई और फिर तलाक का जश्न मनाना शुरू कर दिया. मेरठ कचहरी से शुरू हुआ ये तलाक का जश्न चर्चा का विषय बन गया.
मेरठ: तलाक के बाद बेटी को ढोल-नगाड़ों के साथ घर लाए रिटायर्ड जज#Meerut pic.twitter.com/LpPhkU8aSg
— NDTV India (@ndtvindia) April 5, 2026
प्रणिता के भाई की हो चुकी है मौत, अब इकलौती संतान
प्रणिता के भाई की 2022 के सड़क हादसे में मौत हो गई थी. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. इसी बीच बेटी प्रणिता के ससुरालियों द्वारा हर रोज किए जा रहे उत्पीड़न ने सभी को झकझोर दिया, लेकिन रिटायर्ड जज पिता बेटी का हौसला बने और तलाक लेने के लिए कह दिया. आखिरकार तलाक हुआ, लेकिन यहां दुख नहीं, जश्न मनाया गया और ये जश्न लोगों के लिए मिसाल बन रहा है. प्रणिता अपने पिता की इकलौती बेटी हैं.
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क्या बोले बेटी और पिता
इस दौरान प्रणिता ने बताया कि मैंने फैमिली को बचाने की सोची थी. 2021 में भी तलक होने वाला था, लेकिन मेंटेलिटी नहीं बदली. मेरे पिता ने साथ दिया. मैं कहना चाहती हूं कि ऐसा परिवार सबको मिले. डॉ ज्ञानेंद्र शर्मा का कहना है कि बेटी के पैदा होने पर भी ढोल नगाड़े बजे थे, इसको बताना था आज भी बेटी का वही महत्व है.
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