- दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को आईएएस सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आने का फैसला किया है
- दिव्या मित्तल के छानबे विधानसभा क्षेत्र से 2027 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की चर्चा
- छानबे विधानसभा क्षेत्र में पिछले साठ वर्षों में कोई भी निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल नहीं हुआ है
दिव्या मित्तल अब आईएएस से विधायक बनने की ओर कदम बढ़ा रही हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में दिव्या मित्तल किस पार्टी के टिकट पर और कहां से चुनाव लड़ेंगी, इसका जवाब मिलना अभी बाकी है. मगर उत्तर प्रदेश से दिल्ली तक के सियासी गलियारों में फिलहाल चर्चा यह है कि दिव्या मित्तल मिर्जापुर जिले के छानबे विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ सकती हैं. अगर ऐसा होता है और वह छानबे से चुनाव मैदान में उतरती हैं, तो उन्हें विधायक के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचने के लिए करीब 60 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ना होगा.
दरअसल, मिर्जापुर की पूर्व डीएम रहीं दिव्या मित्तल ने आईएएस सेवा से इस्तीफा देने के बाद सोशल मीडिया के जरिए 29 सितंबर 2026 को ऐलान किया कि वह राजनीति में प्रवेश करेंगी. लोगों की आवाज बनने के लिए उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ेंगी. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह यूपी की किस विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगी. ऐसे में छानबे विधानसभा क्षेत्र चर्चा में आ गया है. छानबे ऐसी सीट है, जहां 1967 से अब तक कोई निर्दलीय उम्मीदवार जीत नहीं सका है. अगर दिव्या मित्तल यहां से निर्दलीय जीत दर्ज कर पाती हैं तो 60 साल में ऐसा पहली बार होगा.
छानबे विधानसभा चुनाव 2027
सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोरों पर है कि पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल छानबे विधानसभा सीट से 2027 का चुनाव लड़ सकती हैं. इस दावे को लेकर हर किसी के अपने-अपने तर्क हैं. कुछ लोगों का मानना है कि छानबे विधानसभा क्षेत्र केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का गढ़ माना जाता है, इसलिए दिव्या मित्तल इसी सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. वहीं, कुछ लोगों का तर्क है कि 29 सितंबर को राजनीति में आने के ऐलान वाले अपने वीडियो में दिव्या मित्तल ने लहुरियादह गांव का जिक्र कर खुद ही संकेत दिया है कि वह छानबे विधानसभा क्षेत्र से 2027 का चुनाव लड़ सकती हैं.
दिव्या मित्तल के निर्दलीय चुनाव लड़ने की चर्चा
दिव्या मित्तल के कारण एक बार फिर चर्चा में आए छानबे विधानसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास काफी रोचक रहा है. मिर्जापुर जिले की इस सीट पर किसी एक पार्टी का लगातार कब्जा नहीं रहा है. यहां भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और अपना दल (सोनेलाल) के प्रत्याशी जीत दर्ज कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका है. जबकि दिव्या मित्तल ने संकेत दिया है कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकती हैं.
छानबे विधायकों की सूची
- 1967 में ब्रह्मानंद शास्त्री, भारतीय जनसंघ
- 1969 में श्रीनिवास प्रसाद सिंह, कांग्रेस
- 1974 में पुरुषोत्तम दास, कांग्रेस
- 1977 में पुरुषोत्तम दास, कांग्रेस
- 1980 में पुरुषोत्तम दास, कांग्रेस
- 1985 में भगवती प्रसाद, कांग्रेस
- 1989 में कालीचरण, जनता दल
- 1991 में दुलारे लाल, जनता दल
- 1993 में श्रीराम पासी, बसपा
- 1996 में भाई लाल कोल, भाजपा
- 2002 में पकोड़ी लाल कोल, बसपा
- 2004: श्रीराम भारती, बसपा
- 2007 में सूर्यभान, बसपा
- 2012 में भाई लाल कोल, सपा
- 2017 में राहुल प्रकाश, अपना दल (सोनेलाल)
- 2022 में राहुल प्रकाश, अपना दल (सोनेलाल)
- 2023 में रिंकी कोल, अपना दल (सोनेलाल)
दिव्या मित्तल का जीवन परिचय
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं. वह मिर्जापुर के अलावा देवरिया और संत कबीर नगर की डीएम भी रह चुकी हैं. 6 मई 2026 को दिव्या मित्तल का तबादला देवरिया के डीएम पद से विशेष सचिव, राजस्व विभाग, लखनऊ के पद पर किया गया था. राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने 30 अगस्त 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था.
आईएएस की नौकरी छोड़ने और 14 सितंबर 2026 को इस्तीफा मंजूर होने के बाद दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर को सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर बताया कि वह राजनीति में आना चाहती हैं. दिव्या मित्तल ने साफ किया कि वह उत्तर प्रदेश में बिना किसी राजनीतिक दल के चुनाव मैदान में उतरेंगी.
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