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This Article is From Oct 06, 2017

बीएचयू में बवाल : छात्राओं पर लाठीचार्ज मामले में महिला आयोग ने वीसी को पाया दोषी

उन्होंने कहा कि कुलपति की संवादहीनता ने इतने बड़े आंदोलन का रूप ले लिया. उन्हें समय पर छात्राओं से मिलकर उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए था.

बीएचयू में बवाल : छात्राओं पर लाठीचार्ज मामले में महिला आयोग ने वीसी को पाया दोषी
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
वाराणसी: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के लिए मुख्य रूप से विश्वविध्यालय के कुलपति जी सी त्रिपाठी दोषी हैं. उक्त बातें राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यकारी अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सर्किट हाउस में अपनी जांच पूरी करने के बाद पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कही. उन्होंने कहा कि कुलपति की संवादहीनता ने इतने बड़े आंदोलन का रूप ले लिया. उन्हें समय पर छात्राओं से मिलकर उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए था. साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविध्यालय में छेड़खानी की घटनाएं बहुत ज्यादा हैं.

राष्ट्रीय महिला आयोग का मानना है कि बीएचयू के पूरे घटनाक्रम के लिए वीसी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि वीसी की संवादहीनता के चलते इतनी बड़ी घटना हो गई. रेखा ने कहा, '40 घंटे से धरना दे रही छात्राओं पर पुरुष पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज किया, इसकी पुष्टि जांच में हुई है. वीसी कंट्रोल कर सकते थे इस धरने को अगर वो छात्राओं से मिलते तो.'

रेखा शर्मा ने बताया कि 'कुलपति से मैं मिलना चाहती थी लेकिन उन्होंने मेरा फोन नहीं उठाया जबकि उनको मैंने मैसेज भी किया कि मैं कौन हूं और आप को क्यों फोन कर रही हूं. लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया इसलिए उन्हें सम्मन भेजा जाएगा. क्योंकि वो अगर उसी दिन सुबह में छात्राओं से मिल लेते तो इतनी सारी बातें नहीं होतीं. उन्हें छात्राओं से मिलने के लिए विश्वविध्यालय के प्रशासन ने भी कहा पर वो नहीं मिले जिससे मामला बिगड़ गया.'

महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि छात्राओं ने जो आन्दोलन शुरू किया लेकिन बाद में उसे बाहरी लोगों ने टेक ओवर कर लिया जिसकी वजह से बीएचयू का माहौल बिगड़ा और पुलिस को बुलाना पड़ा.

उन्‍होंने बताया, 'हमारी जांच कमेटी गुरुवार को 6 घंटे विश्वविद्यालय में रही जहां छात्राओं से हमने हॉस्टल में उनके कमरों में यहां तक कि मेस में जाकर उनसे पूछताछ की. जो भी लड़की हमें मिली उसने कहा कि विश्वविध्यालय में छेड़खानी हद से ज़्यादा है. कोई भी लड़की ऐसी नहीं मिली जिसने ये कहा हो कि छेड़खानी नहीं होती.'

'लड़कियों की समस्या थी कि हॉस्टल की टाइमिंग अलग अलग है. जिसके लिए मैंने विश्वविध्यालय प्रशासन को सलाह दी है कि हॉस्टल की टाइमिंग लड़के और लड़की की एक होगी जो कि पहले अलग-अलग थी. जिसका ऐलान मैं नहीं करूंगी, वो खुद इसका ऐलान करेंगे. लाइब्रेरी में अगर छात्राएं रात में पढ़ना चाहती हैं तो उन्हें आप मना नहीं कर सकते यदि वो पीएचडी की छात्रा है या एमए की. हमने उन्हें सलाह दी है कि जल्द ही टाइमिंग सही करें.' साथ ही उन्होंने कहा कि यहां के पुरुष छात्रावास में कुछ 50 लोग ऐसे हैं जो अवैध तरीके से रहते हैं. उनकी लिस्ट लड़कियों ने हमें बताई है और हमने एसएसपी को भेजी है. उन्हें हॉस्टल से बाहर निकाला जाएगा और उनके विश्वविध्यालय परिक्षेत्र में आने पर पाबंदी लगाई जाएगी.
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