Savings Tips: कई लोग हर महीने एक ही समस्या से परेशान रहते हैं, वो ये कि उनकी सैलरी आते ही कुछ ही दिनों में पैसा खत्म हो जाता है. महीने की शुरुआत में ही घर का किराया, राशन, बिजली-पानी, बच्चों की पढ़ाई, आने-जाने का खर्च और ईएमआई जैसे जरूरी भुगतान करने पड़ते हैं. इन खर्चों के बाद अक्सर बचत के लिए कुछ नहीं बचता. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो बता दें कि इसका कारण केवल कम आय नहीं होता, बल्कि आप ठीक से चीजों को प्लान नहीं कर रहे हैं. यहां हम आपको एक खास फॉर्मूले के बारे में बता रहे हैं, जिसकी मदद से सैलरी को तीन हिस्सों में बांटकर खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाया जाता है. आइए जानते हैं कैसे-
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कैसे काम करता है 50-30-20 फॉर्मूला?
इस नियम के अनुसार आपकी टेक-होम सैलरी, यानी टैक्स कटने के बाद जो पैसा मिलता है, उसे तीन हिस्सों में बांटा जाता है.
सबसे पहला हिस्सा 50 प्रतिशत का होता है. यह पैसा जरूरी खर्चों के लिए रखा जाता है. जैसे घर का किराया या होम लोन, राशन, दूध-सब्जी, बिजली-पानी का बिल, गैस, बच्चों की फीस और ऑफिस आने-जाने का खर्च. इसके अलावा बीमा और ईएमआई भी इसी हिस्से में आते हैं. यानी यह वह खर्च हैं जिन्हें टाला नहीं जा सकता.
दूसरा हिस्सा 30 प्रतिशत का होता है. इसमें वे चीजें शामिल होती हैं जो जरूरी तो नहीं होतीं, लेकिन जिंदगी को थोड़ा आसान और खुशहाल बनाती हैं. जैसे बाहर खाना, मूवी देखना, ऑनलाइन शॉपिंग, घूमना-फिरना या अपने किसी शौक पर खर्च करना.
तीसरा हिस्सा 20 प्रतिशत का होता है. यह हिस्सा बचत और निवेश के लिए होता है. इस पैसे को आप इमरजेंसी फंड बनाने, म्यूचुअल फंड में एसआईपी शुरू करने, पीपीएफ या एनपीएस जैसी योजनाओं में लगाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. यह पैसा भविष्य की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी होता है.
उदाहरण से समझें-अगर किसी व्यक्ति की महीने की सैलरी 50,000 रुपये है, तो करीब 25,000 रुपये जरूरी खर्चों के लिए रखे जा सकते हैं. लगभग 15,000 रुपये दूसरे खर्चों के लिए और करीब 10,000 रुपये बचत या निवेश के लिए अलग रखे जा सकते हैं.
कम सैलरी में भी हो सकती है बचतअक्सर लोगों को लगता है कि कम कमाई में बचत करना मुश्किल है. लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. शुरुआत छोटी रकम से भी की जा सकती है. आप हर महीने 500 या 1000 रुपये भी बचाकर धीरे-धीरे अच्छी आदत बना सकते हैं. बाद में अपनी आय के अनुसार बचत की राशि बढ़ाई जा सकती है.
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