Buying vs Renting House in India: हर किसी के मन में एक बार ये सवाल जरूर आता है कि घर खरीदना सही रहेगा या किराये पर रहना? प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें, होम लोन की भारी EMI और हर महीने का रेंट… इन सबके बीच घर खरीदने का फैसला लेना आसान नहीं है. खासकर मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में जहां घर की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, वहां घर खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं रह गई है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फैसला करने से पहले आपको अपनी आमदनी, फ्यूचर प्लानिंग और करियर स्टेबिलिटी को ध्यान में रखना चाहिए. क्योंकि घर लेना सिर्फ एक इमोशनल फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा फाइनेंशियल डिसीजन होता है.
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किराये पर रहने के फायदे क्या हैं?
कई लोग मानते हैं कि रेंट पर रहना आज के समय में ज्यादा प्रैक्टिकल और समझदारी भरा ऑप्शन है. खासकर तब, जब आप किसी एक शहर में लंबे समय तक रुकने की प्लानिंग नहीं कर रहे. रेंट पर रहने से आपको आजादी मिलती है, फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी रहती है और मेंटेनेंस का झंझट भी नहीं होता. यहां हम आपको कई ऐसे प्वॉइंट्स बताने जा रहे हैं जिससे आपको साफ हो जाएगा कि किराये पर रहना कैसे आपको लिए फायदेमंद हो सकता है...
1. एडवांस इन्वेस्टमेंट की जरूरत नहीं
घर खरीदने के लिए डाउन पेमेंट, स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और फर्निशिंग जैसे कई खर्चे करने पड़ते हैं. जबकि किराये के घर में सिर्फ सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होता है, जो घर खाली करने पर वापस मिल जाता है. यानी कोई बड़ा एडवांस खर्च नहीं होता है.
2. मेंटेनेंस का खर्च बहुत कम
जब आप किराये के घर में रहते हैं तो उसका मेंटेनेंस खर्च बहुत कम आता है. बड़ी रिपेयर या डैमेज की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है, न कि किरायेदार की. आप सिर्फ बेसिक चार्ज देते हैं, जबकि मालिक को बाकी बड़े खर्च उठाने होते हैं. यही वजह है कि किराये पर रहना जेब पर हल्का पड़ता है.
3. टैक्स बेनिफिट का फायदा
किराये पर रहने का एक बड़ा फायदा टैक्स सेविंग है .अगर आप सैलरीड हैं तो HRA (House Rent Allowance) के तहत टैक्स छूट ले सकते हैं. मेट्रो शहरों में आप अपने बेसिक सैलरी का 50% तक और छोटे शहरों में 40% तक का क्लेम कर सकते हैं. वहीं, घर के मालिक को प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य चार्ज देने पड़ते हैं.
4. कैश फ्लो में फ्लेक्सिबिलिटी
रेंट पर रहकर आप अपने पैसों को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं. EMI और डाउन पेमेंट का बोझ न होने से आपकी सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट के लिए पैसा बच जाता है. आप उस रकम को म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट या किसी अन्य इन्वेस्टमेंट में लगा सकते हैं.
5. कम खर्च में ज्यादा सुविधाएं
किराये के घर में आपको वो सारी सुविधाएं मिल सकती हैं जो खुद का घर खरीदने पर काफी महंगी पड़ती हैं. जैसे जिम, स्विमिंग पूल, क्लबहाउस या पार्किंग स्पेस. कई सोसायटी में ये सुविधाएं मेंटेनेंस चार्ज में शामिल होती हैं, जो मकान मालिक देता है. यानी आपको बिना एक्स्ट्रा खर्च के ये एडवांस सुविधाएं मिल जाती हैं.
6. जहां चाहें वहां रहने की आजादी
रेंट पर रहना मतलब आजादी. अगर नौकरी या करियर के चलते आपको शहर बदलना पड़े, तो बस एक महीने का नोटिस देकर आप नया घर ले सकते हैं. कोई लंबी प्रोसेस या लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट नहीं है. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो अपनी नौकरी या काम के चलते बार-बार शिफ्ट होते हैं.
घर खरीदने से पहले समझें ये बातें
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घर खरीदने से पहले आपको पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग करनी चाहिए. सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत देखकर फैसला न करें. मेंटेनेंस, EMI, ब्याज और टैक्स जैसे खर्च आपके मासिक बजट को काफी प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए घर खरीदने का फैसला लेने से पहले सभी खर्चों का हिसाब लगाना जरूरी है.
कब घर खरीदना फायदेमंद है?
अगर आपकी इनकम स्टेबल है, आप 10-15 साल तक एक ही शहर में रहने की सोच रहे हैं और आपके पास अच्छी सेविंग्स हैं, तो घर खरीदना एक अच्छा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन हो सकता है. इससे आपको रेंट की बचत होती है और फ्यूचर में प्रॉपर्टी की वैल्यू भी बढ़ती है.
कब रेंट पर रहना बेहतर है?
अगर आप करियर के शुरुआती दौर में हैं, नौकरी के चलते बार-बार शिफ्ट होते हैं या अभी आर्थिक रूप से बहुत स्ट्रॉन्ग नहीं हैं, तो रेंट पर रहना बेहतर है. इससे आपको फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है और आप पैसों को सेव और इन्वेस्ट कर सकते हैं.
घर खरीदना या किराये पर रहना यह पूरी तरह आपकी आर्थिक स्थिति, करियर प्लान और पर्सनल प्रायोरिटी पर निर्भर करता है. अगर आप अभी के लिए फ्लैक्सिबल चाहते हैं, तो किराये पर रहना सही है. लेकिन अगर आपकी इनकम स्टेबल है और आप लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटी चाहते हैं, तो घर खरीदना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
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