अगर आप भी स्लीपर बस में सफर करते हैं, तो यह खबर आपको राहत देगी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बसों में होने वाले हादसों, खासकर आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए बहुत कड़े नियम बना दिए हैं. अब हर कोई स्लीपर बस नहीं बना पाएगा. सरकार ने फैसला किया है कि अब से स्लीपर बसों का निर्माण केवल नामी वाहन कंपनियां या सरकार से मान्यता प्राप्त कारखाने ही कर सकेंगे.
नितिन गडकरी ने साफ कहा कि सुरक्षा के मामले में अब कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा. केंद्र सरकार ने अब बसों की क्वालिटी चेक करने की जिम्मेदारी पूरी तरह अपने हाथों में ले ली है.
पुरानी बसों में भी लगेंगे नए सेफ्टी फीचर्स
सरकार ने केवल नई बसों के लिए ही नहीं, बल्कि सड़कों पर पहले से चल रही स्लीपर बसों के लिए भी कड़े आदेश दिए हैं. अब पुरानी बसों में भी 'फायर डिटेक्शन सिस्टम' यानी आग का पता लगाने वाली मशीन लगाना जरूरी होगा.
इसके अलावा, बस के शीशे तोड़ने के लिए हथौड़े के साथ इमरजेंसी गेट, रात के समय के लिए खास रोशनी और ड्राइवर के लिए 'थकान इंडीकेटर'(Drowsiness Indicator) लगाना होगा.
हादसों को रोकने के लिए सरकार सख्त
पिछले छह महीनों में स्लीपर बसों में आग लगने की कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें करीब 145 लोगों की जान चली गई. इन हादसों की जांच के बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है. नितिन गडकरी ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने को कहा है, जिन्होंने बस बनाने वालों को खुद से ही सुरक्षा सर्टिफिकेट देने की छूट दी थी. उन्होंने साफ किया कि अब बसों की मैन्युफैक्चरिंग पर कड़ी नजर रखी जाएगी ताकि यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े.
खेती के कचरे से बनेगी सड़कें, बचेगा करोड़ों का पैसा
बसों की सुरक्षा के साथ-साथ नितिन गडकरी ने एक और बड़ी उपलब्धि के बारे में बताया. अब भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जो खेती के कचरे (पराली आदि) से 'बायो-बिटुमेन' यानी सड़क बनाने वाला डामर तैयार कर रहा है. इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि किसानों की कमाई भी बढ़ेगी.
नितिन गडकरी ने कहा कि अगर हम केवल 15% बायो-बिटुमेन का इस्तेमाल शुरू कर दें, तो भारत के करीब 4500 करोड़ रुपये बचेंगे जो अभी विदेश से तेल मंगाने में खर्च होते हैं. यह कदम भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा माइलस्टोन साबित होगा.
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