किसी ऑटो या ई-रिक्शा में बैठने से पहले अगर आपको सिर्फ उसका रंगीन स्टिकर देखकर ही पता चल जाए कि वह किस रूट पर जाएगा, तो सफर कितना आसान हो सकता है? बिहार के मधुबनी में अब कुछ ऐसा ही होने जा रहा है. शहर में बढ़ते जाम और रूट को लेकर होने वाली परेशानियों के बीच परिवहन विभाग ने एक नया सिस्टम लागू किया है. इसके तहत अब ई-रिक्शा और ऑटो को अलग-अलग रंगों के स्टिकर दिए जा रहे हैं. हर रंग एक तय रूट की पहचान होगा यानी अब चालक अपनी मर्जी से किसी भी रास्ते पर वाहन नहीं दौड़ा सकेंगे. विभाग को उम्मीद है कि इससे ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी और यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी.
आखिर क्या है नया रंग वाला सिस्टम?
मधुबनी में लंबे समय से ऑटो और ई-रिक्शा के कारण जाम की समस्या सामने आ रही थी. कई वाहन चालक तय रूट छोड़कर दूसरे मार्गों पर भी वाहन चलाने लगते थे, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होती थी. अब इस समस्या को कम करने के लिए परिवहन विभाग ने रंग आधारित पहचान सिस्टम शुरू किया है. इसके तहत हर रूट को एक अलग रंग दिया गया है और उसी रंग का स्टिकर संबंधित वाहनों पर लगाया जा रहा है.
1200 से ज्यादा वाहनों पर लगेंगे स्टिकर
परिवहन विभाग ने कुल 1214 ई-रिक्शा और ऑटो को इस व्यवस्था में शामिल किया है. स्टिकर लगने के बाद वाहन चालक केवल उसी रूट पर वाहन चला सकेंगे, जिसके लिए उन्हें इजाजत मिली है. वाहन के पीछे लगा रंगीन स्टिकर देखकर अधिकारी और यात्री आसानी से पहचान सकेंगे कि वह वाहन किस मार्ग के लिए तय किया गया है.
किस रूट को मिला कौन सा रंग?
इस नई व्यवस्था में स्टेशन और बस स्टैंड से अलग-अलग इलाकों तक जाने वाले रूटों को अलग रंगों से जोड़ा गया है. उदाहरण के तौर पर पंडौल और सकरी रूट के लिए हरा रंग तय किया गया है, जबकि रहिका, अरेर और बेनीपट्टी जाने वाले वाहनों पर पीले रंग का स्टिकर लगाया जाएगा. इसी तरह राजनगर और बाबूबरही रूट के लिए आसमानी रंग तथा बिसौल और भगवतीपुर रूट के लिए गुलाबी रंग तय किया गया है.
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि स्टिकर लगने के बाद अगर कोई वाहन चालक अपने तय रूट के बजाय दूसरे रूट पर वाहन चलाता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. विभाग का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ जाम की समस्या कम होगी, बल्कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी पहले से ज्यादा व्यवस्थित हो सकेगी. मधुबनी में शुरू हुई यह व्यवस्था अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में दूसरे शहरों में भी इसी तरह का रंग आधारित रूट सिस्टम देखने को मिल सकता है.
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