Oracle Layoffs: आज के समय में कंपनियों में छंटनी (Layoff) आम होती जा रही है. हाल ही में आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी ओरेकल ने बड़े स्तर पर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओरेकल ने अपने वैश्विक वर्कफोर्स के करीब 18 प्रतिशत यानी 30,000 कर्मचारियों को टर्मिनेट किया है. वहीं, बताया जा रहा है कि कंपनी आगे और भी कर्मचारियों की छटनी कर सकती है. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल है कि अगर किसी कर्मचारी को नौकरी से हटा दिया जाए, तो क्या वह इसके खिलाफ आवाज उठा सकता है?
इसे लेकर NDTV संग हुई खास बातचीत के दौरान एडवोकेट दीपक ठुकराल, पूर्व कार्यकारिणी सदस्य शाहदरा बार एसोसिएशन कड़कड़डूमा कोर्ट, दिल्ली, ने बताया,

क्या करें?
लेबर कोर्ट में शिकायतअगर आप 'वर्कमैन' की श्रेणी में आते हैं, तो आप अपने मामले को लेबर कमिश्नर या लेबर कोर्ट में ले जा सकते हैं. यहां आप यह साबित कर सकते हैं कि आपका टर्मिनेशन गलत तरीके से हुआ है.
सिविल कोर्ट का विकल्पअगर आपकी नौकरी किसी कॉन्ट्रैक्ट के तहत थी और कंपनी ने उस कॉन्ट्रैक्ट के नियमों का उल्लंघन किया है, तो आप सिविल कोर्ट में केस कर सकते हैं. यह विकल्प खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए उपयोगी होता है.
नेचुरल जस्टिस का अधिकारहर कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है. अगर कंपनी ने आपको बिना सुनवाई का मौका दिए या बिना जांच के नौकरी से निकाल दिया है, तो यह 'प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस' का उल्लंघन माना जाता है. ऐसे मामलों में टर्मिनेशन को अवैध माना जा सकता है.
जीतने पर क्या मिलेगा?अगर कोर्ट आपके पक्ष में फैसला देती है, तो आपको कई फायदे मिल सकते हैं. जैसे-
- बकाया सैलरी और भत्ते
- नौकरी से निकाले जाने के दौरान का वेतन
- मानसिक या शारीरिक नुकसान का मुआवजा और
- कानूनी खर्च की भरपाई भी.
एडवोकेट बताते हैं, किसी भी कर्मचारी को यह समझना जरूरी है कि वह पूरी तरह असहाय नहीं है. कानून उसे सुरक्षा देता है. अगर आपके साथ गलत हुआ है, तो आप चुप रहने की बजाय अपने अधिकारों के लिए कानूनी रास्ता अपना सकते हैं. सही जानकारी और सही कदम आपको न्याय दिला सकते हैं.
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