India's First Banana Gene Bank : खेती में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच एक चिंता लगातार बढ़ रही थी. पारंपरिक फसलें कहीं खो न जाएं. अब इस चिंता का हल खोजने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. दरअसल तमिलनाडु के त्रिची में देश का पहला केला फील्ड जीन बैंक शुरू किया गया है. यह पहल ICAR-नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर बनाना (NRCB) की तरफ से प्लांट वैरायटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी (PPV&FRA) के जरिए की गई है. इसका मकसद देश में तेजी से खत्म हो रही केले की पारंपरिक किस्मों को बचाना और नई किस्मों का विकास करना है. इससे किसानों को भी फायदा मिलेगा और कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी.
क्यों जरूरी है केला जीन बैंक
भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार कई पारंपरिक किस्में धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं. ऐसे में यह जीन बैंक इन किस्मों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा. यह पहल बायो-डाइवर्सिटी को बचाने और कृषि क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकती है.
इन राज्यों की किस्मों का होगा संरक्षण
इस जीन बैंक में त्रिची के अलावा तमिलनाडु के कई जिलों जैसे इरोड, थेनी, कोयंबटूर, तूतीकोरिन और तिरुनेलवेली की किस्मों को भी संरक्षित किया जाएगा. अब तक यहां 19 केले की किस्मों को सुरक्षित किया गया है, जिनमें 11 किसानों और 8 NRCB की तरफ से तैयार की गई किस्में शामिल हैं.
किसानों को मिलेगा सम्मान और आर्थिक लाभ
PPV&FRA के जरिए किसानों को उनकी विकसित की गई फसलों के लिए इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) दिए जाएंगे. इसके साथ ही उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा. इस योजना के तहत 5 किसान समूहों को 10 लाख रुपये, 10 व्यक्तिगत किसानों को 1.5 लाख रुपये और 20 किसानों को 1 लाख रुपये तक का पुरस्कार दिया जाएगा.
पिछले 20 सालों में देशभर में करीब 10,500 फसल किस्मों को रजिस्टर किया गया है, लेकिन तमिलनाडु से केवल 32 किसानों ने ही इसमें हिस्सा लिया है. ऐसे में किसानों को जागरूक करने और उनकी भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं