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भारत की पहली अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड-रेल टनल को मंजूरी, चीन की बढ़ेगी टेंशन, जानिए नॉर्थईस्ट कनेक्टिविटी को कैसे बदल सकता है ये प्रोजेक्ट

India First Underwater Twin Tube Road-Rail Tunnel: सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाला देश का पहला रोड-कम-रेल टनल को मंजूरी दी है. यह दुनिया में ऐसा केवल दूसरा टनल होगा.

भारत की पहली अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड-रेल टनल को मंजूरी, चीन की बढ़ेगी टेंशन, जानिए नॉर्थईस्ट कनेक्टिविटी को कैसे बदल सकता है ये प्रोजेक्ट
भारत की पहली अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड-रेल टनल
Ministry of Railways

India First Underwater Twin Tube Road-Rail Tunnel: केंद्र सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाला देश का पहला रोड-कम-रेल टनल को मंजूरी दी है. यह दुनिया में ऐसा केवल दूसरा टनल होगा. इसकी लागत 18,662 करोड़ रुपये होगी. रेल मंत्रालय के मुताबिक, यह बड़ा प्रोजेक्ट क्षेत्र में मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को काफी मजबूत करेगा. इसके साथ ही यह 4 बड़े रेलवे स्टेशनों, 2 एयरपोर्ट और 2 इनलैंड वाटरवे से भी कनेक्टिविटी बढ़ाएगा. इससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही बहुत तेज और आसान हो जाएगी. प्रोजेक्ट का निर्माण लगभग 5 साल में पूरा होने की उम्मीद है.

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क्या होगा इस टनल का फायदा?

यह टनल असम के गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ेगी. अभी इस दूरी को तय करने में करीब 6 घंटे लगते हैं, लेकिन टनल बन जाने के बाद यह समय घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाएगा. इससे यात्रा की दूरी भी 240 किमी से घटकर लगभग 34 किमी रह जाएगी. पूरा प्रोजेक्ट सरकार द्वारा 100% फंडेड होगा. सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह टनल न केवल लोगों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि कनेक्टिविटी, पर्यटन और रक्षा के लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण है.

चार-लेन का हाई-स्पीड टनल

यह टनल चार लेन की होगी और अरुणाचल प्रदेश तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी. सुरक्षा और जरूरत के लिए, टनल के अंदर की दोनों ट्यूब्स को हर 500 मीटर पर आपस में जोड़ा जाएगा. अभी नुमालीगढ़ (NH-715) से गोहपुर (NH-15) जाने के लिए जो रास्ता है, वह कलियाभोमोरा ब्रिज (NH-52) होकर जाता है. टनल बन जाने के बाद यह लंबा चक्कर खत्म हो जाएगा.

कनेक्टिविटी बढ़ेगी

इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से सिर्फ यात्रा सुविधा ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि पूर्वोत्तर में पर्यटन, सीमा क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और सड़क–व्यापार को भी मजबूती मिलेगी. इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और रणनीतिक (strategic) महत्व दोनों बढ़ेंगे. इसके अलावा, यह प्रोजेक्ट माल ढुलाई को और तेज, आसान और सस्ता बनाएगा. लॉजिस्टिक की लागत कम होगी और सामान ले जाने की कुशलता बढ़ेगी.

रोजगार में बढ़ेगा

इस प्रोजेक्ट से लगभग 80 लाख पर्सन-डे डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार भी मिलेगा. इससे आस-पास के इलाकों में ग्रोथ, डेवलपमेंट और खुशहाली के नए रास्ते खुलेंगे.

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