बजट 2026 से पहले शादीशुदा टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत की उम्मीद जताई जा रही है. चर्चा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ‘जॉइंट टैक्सेशन' का विकल्प पेश कर सकती हैं, जिससे पति-पत्नी एक साथ टैक्स रिटर्न फाइल कर सकेंगे. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो खासकर सिंगल कमाई वाले परिवारों को टैक्स में लाखों रुपये तक की बचत हो सकती है. यही वजह है कि बजट से पहले यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है.आइए समझते हैं कि अगर यह नियम आता है, तो आपकी बचत और घर के बजट पर इसका क्या असर होगा.
फिलहाल भारत में हर व्यक्ति को अपनी इनकम पर अलग-अलग टैक्स देना होता है. चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो. पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग बेसिक छूट, स्लैब और डिडक्शन मिलते हैं. इस वजह से शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे जीवनसाथी की टैक्स छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पाता, जिससे टैक्स का बोझ बढ़ जाता है.
सिंगल इनकम वाले परिवारों की दिक्कत
बहुत से घर ऐसे होते हैं जहां एक ही व्यक्ति नौकरी या काम करता है. दूसरा जीवनसाथी घर, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करता है. यह काम भले ही बहुत अहम हो, लेकिन टैक्स सिस्टम में इसकी कोई कीमत नहीं मानी जाती. नतीजा यह होता है कि ऐसे परिवारों पर टैक्स का बोझ ज्यादा पड़ता है.
जॉइंट टैक्सेशन क्या होता है? (What is joint taxation?)
जॉइंट टैक्सेशन का मतलब है कि शादीशुदा जोड़े अपनी कमाई को जोड़कर एक साथ टैक्स रिटर्न फाइल करें. प्रस्ताव यह है कि बजट 2026 में इसे ऑप्शनल सिस्टम के रूप में लाया जाए. यानी जो लोग चाहें वे मौजूदा पर्सनल टैक्स सिस्टम में रहें, और जो चाहें वे जॉइंट टैक्सेशन का ऑप्शन चुन सकें. इसके लिए दोनों के पास PAN होना जरूरी होगा.
जॉइंट टैक्सेशन क्यों जरूरी है? जानें इसके फायदे (joint taxation Benefits)
इस सिस्टम में पति-पत्नी की कुल इनकम को जोड़कर एक अलग स्लैब के तहत टैक्स लगाया जाएगा. इससे परिवार की असली टैक्स देने की क्षमता सामने आएगी. खासकर उन परिवारों को, जहां सिर्फ एक ही कमाई करता है, टैक्स में राहत मिल सकती है.
जॉइंट ITR से होम लोन के ब्याज और मेडिकल इंश्योरेंस पर मिलने वाली छूट को पति-पत्नी बेहतर तरीके से एडजस्ट कर पाएंगे.
अभी अगर पति ₹10 लाख कमाता है और पत्नी घर संभालती है, तो पूरे ₹10 लाख पर टैक्स लगता है. जॉइंट फाइलिंग में दोनों की छूट सीमा (Exemption Limit) जुड़ जाएगी, जिससे टैक्स का बोझ आधा हो सकता है.
Tax स्लैब में क्या बदलाव हो सकता है?
जॉइंट टैक्सेशन के तहत, बेसिक छूट सीमा और टैक्स स्लैब को मौजूदा व्यवस्था से अनुपात में बढ़ाया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर, जहां एक व्यक्ति को 3 लाख की छूट मिलती है, वहीं जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा दोगुनी या उससे अधिक हो सकती है. इससे मिडिल क्लास परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा.
सरचार्ज पर भी राहत की जरूरत
मौजूदा टैक्स सिस्टम में 50 लाख रुपये से ऊपर की इनकम पर सरचार्ज लग जाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सीमा को बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया जाना चाहिए. जॉइंट टैक्सेशन में सरचार्ज की सीमाएं भी उसी अनुपात में तय की जा सकती हैं, जिससे टैक्स का दबाव कम होगा.
नौकरी करने वाले दोनों पति-पत्नी का क्या?
अगर दोनों पति-पत्नी नौकरी करते हैं, तो भी उन्हें नुकसान नहीं होना चाहिए. इसलिए प्रस्ताव है कि दोनों को अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलते रहें, चाहे वे जॉइंट टैक्सेशन का विकल्प ही क्यों न चुनें.
कई देशों में जॉइंट टैक्स रिटर्न फाइल करने की सुविधा
अमेरिका, जर्मनी जैसे कई देशों में शादीशुदा जोड़ों को जॉइंट टैक्स रिटर्न फाइल करने की सुविधा मिलती है. वहां परिवार को एक आर्थिक इकाई (Economic Unit) माना जाता है. भारत भी ऐसा सिस्टम अपनाकर अपने टैक्स कानूनों को आसान और आधुनिक बना सकता है.भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ऐसा सुझाव दिया है जो विकसित देशों की तर्ज पर भारत में भी 'जॉइंट टैक्सेशन' की शुरुआत कर सकता है.
बजट 2026 में अगर जॉइंट टैक्सेशन को ऑप्शनल तौर पर शामिल किया जाता है, तो यह भारतीय टैक्स सिस्टम के लिए एक बड़ा और पॉजिटिव बदलाव होगा. यह न सिर्फ टैक्स में बराबरी लाएगा, बल्कि परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को भी बेहतर तरीके से पेश करेगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं