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अब गर्भ से 18 साल तक बच्चों पर रहेगी सरकार की नजर, अमित शाह ने लॉन्च किया PM-Family Care Tracker, जानें क्या है ये, आपके लिए कैसे फायदेमंद

PM-Family Care Tracker एक डिजिटल सिस्टम है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गर्भवती महिलाओं, माताओं और बच्चों को समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा.

अब गर्भ से 18 साल तक बच्चों पर रहेगी सरकार की नजर, अमित शाह ने लॉन्च किया PM-Family Care Tracker, जानें क्या है ये, आपके लिए कैसे फायदेमंद
क्या है PM-Family Care Tracker?
(P.C- ANI)

कई बार जानकारी की कमी या सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता है. खासकर गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और छोटे बच्चों के मामले में यह बड़ी चुनौती रही है. इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने PM-Family Care Tracker (PM-FCT) पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है. इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का मकसद यह ध्यान रखना है कि कोई भी पात्र महिला या बच्चा सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे.

क्या है PM-Family Care Tracker?

PM-Family Care Tracker एक डिजिटल सिस्टम है, जो गर्भावस्था से लेकर बच्चे के 18 साल का होने तक उसके स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर नजर रखेगा. यह प्लेटफॉर्म अलग-अलग सरकारी विभागों के रिकॉर्ड को एक साथ जोड़कर काम करेगा. आसान भाषा में समझें, तो इस सिस्टम में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग के डेटा को जोड़ा जाएगा. इसके जरिए करीब 16 सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी. इनमें-

  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana)
  • जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana)
  • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (Janani Shishu Suraksha Karyakram)
  • पीएम पोषण (PM Poshan)
  • मिशन वात्सल्य (Mission Vatsalya)
  • सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana)
  • पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन और 
  • राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं.

इसके लिए जन्म पंजीकरण संख्या (Birth Registration Number) को एक यूनिक पहचान के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा.

लापरवाही होते ही मिलेगा अलर्ट

PM-Family Care Tracker की सबसे बड़ी खासियत इसका अलर्ट सिस्टम है. जैसे- अगर किसी बच्चे का पोलियो टीका छूट जाता है तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिल जाएगी. इसी तरह अगर कोई बच्ची तीसरी कक्षा के बाद चौथी में दाखिला नहीं लेती है, तो स्कूल और संबंधित अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा. इसके अलावा कुपोषित बच्चों और विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों की भी समय रहते पहचान की जाएगी. 

गांधीनगर से हुई शुरुआत

यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में शुरू किया गया है. अगर इसका नतीजा अच्छा रहता है तो पहले इसे पूरे गुजरात में और बाद में दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है. सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से सरकारी योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी.

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