Harbhajan Singh on rustication: साल 2000 हरभजन सिंह की जिदंगी का संभवत: सबसे बड़ा साल कहा जा सकता है. इस साल पांच बहनों में सबसे छोटे हरभजन के पिता का निधन हो गया, तो राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) से उन्हें निकाल दिया गया. तब यह साफ नहीं हो सका कि आखिर एनसीए में ऐसाक क्या हुआ कि भारतीय टीम का सदस्य होने के बावजूद उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया? हालांकि, तब ऐसी चर्चा जोरों पर पर थी कि उस समय तत्कालीन एनसीए के अध्यक्ष पूर्व क्रिकेटर हनुमंत सिंह और उनके बीच कुछ ऐसा संवाद हुआ, जिससे BCCI को यह निर्णय लेना पड़ा था, लेकिन बात आई-गई हो गई. बहरहाल, अब करीब 25 साल पहले घटी घटना को भज्जी ने याद करते हुए इसके बारे में बताया है. एनसीए में प्रशिक्षुओं के पहले ग्रुप में शामिल रहे हरभजन ने याद किया कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी जब परोसा जाने वाला भोजन तय डाइट के अनुसार नहीं मिला, तो उन्होंने डाइट चार्ट फाड़ दिया था. उन्होंने बताया कि बाद में इसी घटना को उनके निष्कासन का कारण बनाया गया.
'खाना अच्छा नहीं था'
भज्जी ने कहा, 'एनसीए में प्रशिक्षुओं के लिए एक तय डाइट प्लान था, लेकिन जो खाना परोसा जाता था वह उस चार्ट के हिसाब से नहीं होता था. उनके अनुसार, बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई बदलाव नहीं हुआ. पूर्व भारतीय स्पिनर ने कहा कि आखिरकार उनका सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने डाइट चार्ट फाड़ दिया.' उन्होंने कहा, 'वहां से मुझे निकाल दिया गया. वह मेरी गलती नहीं थी. मैं आज भी इस बात को खुलेआम कहता हूं, क्योंकि वह हमारा हक था. जो हमारा खाना था, वह अच्छा नहीं था.'
'बस यही मेरी गलती थी'
हरभजन ने एक वेबसाइट से बातचीत में कहा, 'वहां जो रूल्स और रेगुलेशंस थे, वह यही थे कि हमें बहुत कुछ पढ़ाया जा रहा था, सिखाया जा रहा था. एक चार्ट लगाया था, जिसमें था कि यह डाइट होनी चाहिए, एक्सपर्ट की डाइट के हिसाब से हमें वह डाइट मिलनी चाहिए, लेकिन वह खाना मिल नहीं रहा था. कई बार शिकायत करने के बावजूद खाने में सुधार नहीं हुआ, तो एक दिन मैंने वह चार्ट फाड़ दिया. मेरी बस यही एक गलती थी कि मैंने वह चार्ट फाड़ा.' हरभजन का मानना था कि उनका आवाज उठाना बेहद जरूरी था, क्योंकि अगर वे ऐसा न करते तो डाइट प्लान से जुड़ी इस समस्या पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता. हरभजन सिंह तो घटना पर बोल दिया, लेकिन बीसीसीआई ने तब अनुशासनहीनता शब्द का इस्तेमाल किया था. ऐसे में सवाल तो है ही कि यह अनुशासनहीनता क्या थी? वजह खाना ही था या वास्तव में बात इससे आगे की थी?
'तब कुछ लोगों को यह पसंद नहीं था'
पूर्व स्पिनर ने कहा, 'लेकिन शायद जब तक कोई ऐसा कदम नहीं उठाता, तब तक चीजें नहीं बदलतीं. मैं अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा था. अगर मैं खड़ा नहीं होता, तो आज भी वही डाइट प्लान फॉलो किया जा रहा होता. प्लान बदला, मुझे निकाल दिया गय. वह एक अलग बात है, लेकिन इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी. बीसीसीआई में कुछ ऐसे लोग थे जो नहीं चाहते थे कि कोई खड़ा होकर उनसे सवाल पूछे.' वैसे जब भज्जी कुछ लोग शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो संभवत: उनका इशारा स्वर्गीय और राष्ट्रीय पूर्व क्रिकेटर हनुमंत सिंह की ओर ही है.
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