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भारत के इस गांव को क्यों कहा जाता है "Silent Village"? सच्चाई जानकर आप भी हो जाएंगे इमोशनल

भारत देश में कई ऐसे गांव हैं जो अपनी खूबसूरती और सुंदरता के लिए जाने जाते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे जो अपनी खूबसूरती के साथ ही एक ऐसी चीज के लिए जाना जाता है जिसे जानकर आप को भी झटका लग सकता है.

भारत के इस गांव को क्यों कहा जाता है "Silent Village"? सच्चाई जानकर आप भी हो जाएंगे इमोशनल
भारत के इस गांव को कहा जाता है साइलेंट विलेज. ( Image

भारत के गावों को उनकी खूबसूरती, सादगी और संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. हरे-भरे खेत और सोंधी सी महक हम किसी का मन मोह लेती है. वहीं पहाड़ों पर बसे छोटे-छोटे गांव किसी जन्नत से कम नहीं लगते हैं. सुबह चिड़ियों की आवाज और शाम को घर के बाहर बैठे लोगों की बात-चीत और हंसी-मजाक से गुलजार रहती है. 

भारत में कई ऐसे गांव है जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे जिसको 'Silent Village' के नाम से जाना जाता है. ये गांव जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की गंडोह तहसील में स्थित है जिसे डडकई नाम से भी जाना जाता है. इस गांव के नाम के पीछे की कहानी बेहद इमोशनल है. 

जम्मू-कश्मीर की वादियों में बसा है ये गांव

डडकई ( साइलेंट विलेज) जम्मू-कश्मीर के गंडोह तहसील के भासेला इलाके में पहाड़ों के बीच बसा हुआ है.  यहां की नेचुरल खूबसूरती लोगों का मन मोह लेती है. गांव चारों तरह ऊंचे पहाड़ों के बीच में बसा हुआ है. ये गांव मिनी-कश्मीर के नाम से फेमस भद्रवाह से लगभग 105 किमी दूर बसा है. 

क्यों कहा जाता है इसे ‘Silent Village'?

इस गांव को पूरी दुनिया में अलग पहचान दिलाई है इसके नाम नें. दरअसल इस गांव में रहने वाले लोग सुन और बोल नहीं सकते हैं. खासकर इस गांव के बच्चो में ये समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. यहां पैदा होने वाले अमूमन लोग बहरेपन और गूंगेपन के शिकार होते हैं. 

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Photo Credit: NDTV

यहां के लोग एक-दूसरे से इशारो में बात करते हैं.  बताया जाता है कि इस समस्या का पहला मामला साल 1901 में दर्ज किया गया था. समय के साथ यह समस्या बढ़ती चली गई.

क्या ही इसकी वजह

एक्सपर्ट के मुताबिक इस गांव के लोगों का ऐसा होने की वजह है वहां के लोगों में पाए जाने वाले आनुवांशिक कारण. जिसकी वजह मानी जाती है एक ही समुदाय या करीबी रिश्तों में ज्यादा शादियां होने की वजह से यह समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती गई. वहीं गांव में रहने वाले कुछ लोग इसे अभिशाप मानते हैं. 

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