आज हम जब भी शॉपिंग मॉल पर कपड़े खरीदते हैं, या ऑनलाइन सबसे पहले उसका साइज चेक करते हैं और अपने साइज का झट से पकड़ लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब ये साइज वाला सिस्टम नहीं था तब लोग कैसे कपड़े खरीदते थे. आपको बता दें कि आज से करीब 200 साल पहले तक रेडीमेड कपड़े जैसा कोई शब्द ही नहीं था. उस दौर में अगर किसी को कपड़े चाहिए होते थे, तो दो ही तरीके थे. अमीर लोग सीधे दर्जी के पास जाते थे. दर्जी उनके शरीर का एक-एक इंच का नाप लेता था और फिर बिल्कुल परफेक्ट फिटिंग के कपड़े सिलता था.
वहीं, जो लोग बहुत अमीर नहीं थे, उनके घरों में महिलाएं खुद कपड़े सिलती थीं. पुरानी जींस या ढीले कपड़ों को काटकर छोटे बच्चों के लिए कपड़े बना दिए जाते थे. यानी कपड़ा चाहे अमीर का हो या गरीब का, वह बनता किसी एक इंसान के शरीर के हिसाब से ही था. उस समय साइज नाम की कोई चीज नहीं थी, बस फिटिंग होती थी.
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कैसे और कब हुई कपड़ों के साइज सिस्टम की शुरुआत-
कपड़ों पर लगे S, M, L साइज की शुरुआत किसी फैशन शो या किसी बड़े ब्रांड ने नहीं, बल्कि जंग के मैदान से हुई थी. 1800 के दशक में जब बड़े पैमाने पर युद्ध (जैसे नेपोलियन के युद्ध और अमेरिकी गृहयुद्ध) शुरू हुए, तो सरकारों के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई. मुसीबत यह थी कि लाखों सैनिकों के लिए अचानक एक जैसी वर्दी (Uniform) कैसे तैयार की जाए? हर एक सैनिक को दर्जी के पास भेजकर नाप दिलवाना मुमकिन नहीं था. ऐसे में कपड़ा निर्माताओं ने हजारों सैनिकों के शरीरों को मापा. उन्होंने देखा कि ज्यादातर पुरुषों के सीने (Chest) की चौड़ाई में एक खास तरह का पैटर्न होता है. इसी आधार पर उन्होंने पहली बार पुरुषों की वर्दी को कुछ तय साइज में बांट दिया, जैसे स्मॉल, मीडियम और लार्ज. यह तरीका काम कर गया और यहीं से रेडीमेड कपड़ों की बुनियाद पड़ी.

कब हुई रेडीमेड कपड़ों की शुरूआत. (Image NDTV)
महिलाओं के साइज वाले कपड़े-
साल 1939 में अमेरिकी सरकार ने एक बड़ा सर्वे कराया. इस रिसर्च में करीब 15,000 महिलाओं के शरीर के 59 अलग-अलग हिस्सों का नाप लिया गया. इसी डेटा के आधार पर धीरे-धीरे एक स्टैंडर्ड साइज चार्ट तैयार हुआ, जिसे आज हम S, M, L, XL के रूप में जानते हैं. दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब फैक्ट्रियों में कपड़े तेजी से बनने लगे, तो इस सिस्टम को पूरी दुनिया ने अपना लिया ताकि लोग बिना किसी उलझन के तुरंत अपनी पसंद का कपड़ा खरीद सकें.
बोल्ड मैट्रिक्स रिसर्च ब्लॉग (Bold Metrics Sizing History) आर्टिकल के अनुसार कैसे अमेरिकी गृहयुद्ध (Civil War) के दौरान सैनिकों की वर्दी के लिए पहली बार स्मॉल, मीडियम और लार्ज कैटेगिरी बनाई गई थी के बारे में बताया गया है.
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