मजदूरों का पलायन
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मध्यप्रदेश के आगर-मालवा में मजदूरों का राजस्थान पलायन, जानिए क्या है घर छोड़ने की मजबूरी?
- Friday February 27, 2026
- Written by: जफर मुल्तानी, Edited by: विश्वनाथ सैनी
Madhya Pradesh Migrant Workers: मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के मजदूर राजस्थान की तरफ रोज़गार के लिए पलायन कर रहे हैं. जीरा और रायड़ा की कटाई में उन्हें बेहतर मजदूरी मिल रही है. मजदूरों का कहना है कि राज्य की योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा और पढ़ाई करने वाले बच्चे भी परिवार के साथ पलायन कर रहे हैं.
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काम की तलाश में यूपी के जौनपुर से सबसे अधिक पलायन करते हैं मजदूर, सबसे पीछे है यह जिला
- Friday February 6, 2026
- Written by: राजेश कुमार आर्य
सरकार ने उत्तर प्रदेश से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने का डाटा दिया है. इसके मुताबिक सबसे अधिक मजदूर जौनपुर जिले से देश के दूसरे राज्यों में जाते हैं. आइए जानते हैं कि सबसे अधिक पलायन वाले पांच जिले कौन से हैं.
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Ground Report: बिहार से फिर शुरू हुआ मजदूरों का पलायन, कोई पंजाब चला तो कोई और कहीं
- Sunday September 7, 2025
- Reported by: Kanhaiyajee, Edited by: विजय शंकर पांडेय
बिहार से मजदूरों का पलायन लंबे समय से हो रहा है. कभी भी कोई सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं हुई. यदि कभी गंभीर हुई तो पंजाब के लिए सीधी ट्रेन दे दी.
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किसी समय बड़ी आबादी को रोजगार देने वाला बीड़ी निर्माण का कुटीर उद्योग अब दम तोड़ रहा
- Wednesday December 18, 2024
- Reported by: सूर्यकांत पाठक
देश का एक प्रमुख घरेलू रोजगार, जिसमें महिलाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी रही है, अब दम तोड़ रहा है. बीड़ी उत्पादन को लेकर सरकार की नीतियों के चलते यह कुटीर उद्योग अब बुरे हाल में है. एक तरफ जहां बीड़ी उद्योग पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भारी बोझ है वहीं कई सख्त नियम भी लागू हैं. बीड़ी मजदूरों को बहुत कम पारिश्रमिक मिल रहा है. इससे परेशान ग्रामीण अंचलों के मजदूर बीड़ी बनाना त्यागकर रोजगार के लिए शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं. श्रम मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2023 के मुताबिक देश में बीड़ी बनाने वाले रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड मजदूरों की संख्या करीब 80 लाख है. इनमें 72 प्रतिशत से अधिक महिला कामगार हैं.
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हरियाणा: हिंसा प्रभावित नूंह से डरे हुए प्रवासी मजदूरों का पलायन
- Friday August 4, 2023
- Reported by: भाषा
हरियाणा के नूंह में सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार या तो डर से अपने गृहनगर जा रहे हैं या काम की तलाश में पड़ोसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश की ओर पलायन कर रहे हैं. इस सांप्रदायिक हिंसा में अब तक छह लोगों की जान चली गई है. मौजूदा स्थिति और कर्फ्यू के कारण पिछले कुछ दिनों से घर के अंदर रहने को मजबूर श्रमिकों और बच्चों सहित उनके परिवारों ने कहा कि वे खाने को मोहताज हैं.
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पलायन का दर्द : बिहार के सहरसा जंक्शन पर मजदूरों की 'बाढ़', ट्रेनों की तादाद बहुत कम
- Sunday June 12, 2022
- Reported by: मनीष कुमार, Edited by: सूर्यकांत पाठक
यह मान लेना ही सही है कि पलायन (Migration) बिहार (Bihar) के लोगों की नियति बन चुका है. जनसंख्या के हिसाब से यहां न तो उद्योग-धंधे हैं और न ही दूसरा कोई रोजगार. यहां के मजदूर (Laborers) दूसरे प्रदेशों को समृद्ध बनाने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं, लेकिन कई पीढ़ियों से उनका खुद का जीवन सुख-समृद्धि से कोसों दूर है. खासकर कोसी नदी के तट पर बसा सहरसा मजदूरों के पलायन का केंद्र बनकर रह गया है. यहां सहरसा के अलावा मधेपुरा, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया और किशनगंज तक के मजदूर दिल्ली और पंजाब जाने के लिए ट्रेन (Trains) पकड़ने आते हैं.
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मुंबई से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए कई कदम उठा रहे हैं व्यापारी
- Tuesday January 18, 2022
- Reported by: सोहित राकेश मिश्र, Edited by: सूर्यकांत पाठक
कोरोना के बढ़ते मामलों का असर जहां व्यापार पर पड़ा है तो वहीं प्रवासी मजदूरों की परेशानी भी बढ़ी है. पहले की तुलना में पैसे कम मिल रहे हैं. कई लोग गांव जाने की योजना बना रहे हैं. तो वहीं मजदूरों को पलायन करने से रोकने के लिए अब व्यापारियों की ओर से भी कई कदम उठाए जा रहे हैं. करीब 20 सालों से कोलकाता के हावड़ा इलाके में रहने वाले रुबिन पात्रा मुंबई के मुम्बादेवी इलाके में सोने की दुकान में मजदूरी का काम करते हैं. वो बता रहे हैं कि 2 फरवरी की हावड़ा मेल पकड़ वो गांव लौट रहे हैं.. वजह है कोरोना संक्रमण के वजह से जेब पर पड़ा असर.
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मुंबई: कोरोना के चलते लॉकडाउन की आशंका का लघु उद्योग व प्रवासी मजदूरों पर दिखने लगा है असर
- Wednesday January 12, 2022
- Reported by: सुनील कुमार सिंह, Edited by: अमनप्रीत कौर
कारखाना मालिक भी डरे हुए हैं, क्योंकि अभी लॉक डाउन लगा नहीं है, लेकिन मजदूर और काम दोनों कम होने लगे हैं. मुम्बई में प्रवासी मजदूरों का पलायन अभी शुरु नहीं हुआ है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है.
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पलायन रोकने के लिए मजदूरों को नकद आर्थिक मदद और मुफ्त अनाज देने की मांग
- Tuesday April 20, 2021
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, Edited by: सूर्यकांत पाठक
Delhi Lockdown: दिल्ली में राजमिस्त्री का काम करने वाले मुरली अपने परिवार के साथ आनंद विहार बस टर्मिनल पहुंचे हैं. उत्तर प्रदेश के सीतापुर अपने गांव वापस जाने के लिए पिछले कुछ दिनों से काम मिलना बंद हो गया था और अब लॉकडाउन लगने के बाद काम मिलने की संभावना खत्म हो चुकी है. मुरली ने कहा- भविष्य को लेकर अनिश्चितता है इसलिए मजबूर होकर वापस अपने गांव जा रहे हैं. सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस ने प्रवासी मजदूरों को आर्थिक मदद और खाद्य सामग्री देने की मांग सरकार से की है.
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प्रवासी मजदूरों की जुबानी सुनिए, क्यों दिल्ली में रुकने के लिए नहीं हैं तैयार
- Tuesday April 20, 2021
- Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: नितेश श्रीवास्तव
दिल्ली में लॉकडाउन के ऐलान के साथ ही प्रवासी श्रामिकों के पलायन का सिलसिला तेज हो गया. किसी के सिर पर बोरी है तो किसी ने कंधों पर बैग के साथ बाकी जरूरी सामानों को बांधा हुआ है. कोई सूटकेस को पकड़े दिखा तो कोई गोद में बच्चे लिए अपने गांव की तरफ जाती बस को तलाश रहा है. लोगों से खचाखच भरे आनंद विहार बस अड्डे पर कोई भी बस आती है तो चंद मिनटों के अंदर भर जाती है.
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मध्यप्रदेश के आगर-मालवा में मजदूरों का राजस्थान पलायन, जानिए क्या है घर छोड़ने की मजबूरी?
- Friday February 27, 2026
- Written by: जफर मुल्तानी, Edited by: विश्वनाथ सैनी
Madhya Pradesh Migrant Workers: मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के मजदूर राजस्थान की तरफ रोज़गार के लिए पलायन कर रहे हैं. जीरा और रायड़ा की कटाई में उन्हें बेहतर मजदूरी मिल रही है. मजदूरों का कहना है कि राज्य की योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा और पढ़ाई करने वाले बच्चे भी परिवार के साथ पलायन कर रहे हैं.
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काम की तलाश में यूपी के जौनपुर से सबसे अधिक पलायन करते हैं मजदूर, सबसे पीछे है यह जिला
- Friday February 6, 2026
- Written by: राजेश कुमार आर्य
सरकार ने उत्तर प्रदेश से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने का डाटा दिया है. इसके मुताबिक सबसे अधिक मजदूर जौनपुर जिले से देश के दूसरे राज्यों में जाते हैं. आइए जानते हैं कि सबसे अधिक पलायन वाले पांच जिले कौन से हैं.
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Ground Report: बिहार से फिर शुरू हुआ मजदूरों का पलायन, कोई पंजाब चला तो कोई और कहीं
- Sunday September 7, 2025
- Reported by: Kanhaiyajee, Edited by: विजय शंकर पांडेय
बिहार से मजदूरों का पलायन लंबे समय से हो रहा है. कभी भी कोई सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं हुई. यदि कभी गंभीर हुई तो पंजाब के लिए सीधी ट्रेन दे दी.
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किसी समय बड़ी आबादी को रोजगार देने वाला बीड़ी निर्माण का कुटीर उद्योग अब दम तोड़ रहा
- Wednesday December 18, 2024
- Reported by: सूर्यकांत पाठक
देश का एक प्रमुख घरेलू रोजगार, जिसमें महिलाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी रही है, अब दम तोड़ रहा है. बीड़ी उत्पादन को लेकर सरकार की नीतियों के चलते यह कुटीर उद्योग अब बुरे हाल में है. एक तरफ जहां बीड़ी उद्योग पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भारी बोझ है वहीं कई सख्त नियम भी लागू हैं. बीड़ी मजदूरों को बहुत कम पारिश्रमिक मिल रहा है. इससे परेशान ग्रामीण अंचलों के मजदूर बीड़ी बनाना त्यागकर रोजगार के लिए शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं. श्रम मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2023 के मुताबिक देश में बीड़ी बनाने वाले रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड मजदूरों की संख्या करीब 80 लाख है. इनमें 72 प्रतिशत से अधिक महिला कामगार हैं.
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हरियाणा: हिंसा प्रभावित नूंह से डरे हुए प्रवासी मजदूरों का पलायन
- Friday August 4, 2023
- Reported by: भाषा
हरियाणा के नूंह में सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार या तो डर से अपने गृहनगर जा रहे हैं या काम की तलाश में पड़ोसी राज्य राजस्थान और उत्तर प्रदेश की ओर पलायन कर रहे हैं. इस सांप्रदायिक हिंसा में अब तक छह लोगों की जान चली गई है. मौजूदा स्थिति और कर्फ्यू के कारण पिछले कुछ दिनों से घर के अंदर रहने को मजबूर श्रमिकों और बच्चों सहित उनके परिवारों ने कहा कि वे खाने को मोहताज हैं.
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पलायन का दर्द : बिहार के सहरसा जंक्शन पर मजदूरों की 'बाढ़', ट्रेनों की तादाद बहुत कम
- Sunday June 12, 2022
- Reported by: मनीष कुमार, Edited by: सूर्यकांत पाठक
यह मान लेना ही सही है कि पलायन (Migration) बिहार (Bihar) के लोगों की नियति बन चुका है. जनसंख्या के हिसाब से यहां न तो उद्योग-धंधे हैं और न ही दूसरा कोई रोजगार. यहां के मजदूर (Laborers) दूसरे प्रदेशों को समृद्ध बनाने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं, लेकिन कई पीढ़ियों से उनका खुद का जीवन सुख-समृद्धि से कोसों दूर है. खासकर कोसी नदी के तट पर बसा सहरसा मजदूरों के पलायन का केंद्र बनकर रह गया है. यहां सहरसा के अलावा मधेपुरा, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया और किशनगंज तक के मजदूर दिल्ली और पंजाब जाने के लिए ट्रेन (Trains) पकड़ने आते हैं.
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मुंबई से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए कई कदम उठा रहे हैं व्यापारी
- Tuesday January 18, 2022
- Reported by: सोहित राकेश मिश्र, Edited by: सूर्यकांत पाठक
कोरोना के बढ़ते मामलों का असर जहां व्यापार पर पड़ा है तो वहीं प्रवासी मजदूरों की परेशानी भी बढ़ी है. पहले की तुलना में पैसे कम मिल रहे हैं. कई लोग गांव जाने की योजना बना रहे हैं. तो वहीं मजदूरों को पलायन करने से रोकने के लिए अब व्यापारियों की ओर से भी कई कदम उठाए जा रहे हैं. करीब 20 सालों से कोलकाता के हावड़ा इलाके में रहने वाले रुबिन पात्रा मुंबई के मुम्बादेवी इलाके में सोने की दुकान में मजदूरी का काम करते हैं. वो बता रहे हैं कि 2 फरवरी की हावड़ा मेल पकड़ वो गांव लौट रहे हैं.. वजह है कोरोना संक्रमण के वजह से जेब पर पड़ा असर.
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मुंबई: कोरोना के चलते लॉकडाउन की आशंका का लघु उद्योग व प्रवासी मजदूरों पर दिखने लगा है असर
- Wednesday January 12, 2022
- Reported by: सुनील कुमार सिंह, Edited by: अमनप्रीत कौर
कारखाना मालिक भी डरे हुए हैं, क्योंकि अभी लॉक डाउन लगा नहीं है, लेकिन मजदूर और काम दोनों कम होने लगे हैं. मुम्बई में प्रवासी मजदूरों का पलायन अभी शुरु नहीं हुआ है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है.
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पलायन रोकने के लिए मजदूरों को नकद आर्थिक मदद और मुफ्त अनाज देने की मांग
- Tuesday April 20, 2021
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र, Edited by: सूर्यकांत पाठक
Delhi Lockdown: दिल्ली में राजमिस्त्री का काम करने वाले मुरली अपने परिवार के साथ आनंद विहार बस टर्मिनल पहुंचे हैं. उत्तर प्रदेश के सीतापुर अपने गांव वापस जाने के लिए पिछले कुछ दिनों से काम मिलना बंद हो गया था और अब लॉकडाउन लगने के बाद काम मिलने की संभावना खत्म हो चुकी है. मुरली ने कहा- भविष्य को लेकर अनिश्चितता है इसलिए मजबूर होकर वापस अपने गांव जा रहे हैं. सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस ने प्रवासी मजदूरों को आर्थिक मदद और खाद्य सामग्री देने की मांग सरकार से की है.
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प्रवासी मजदूरों की जुबानी सुनिए, क्यों दिल्ली में रुकने के लिए नहीं हैं तैयार
- Tuesday April 20, 2021
- Reported by: सौरभ शुक्ला, Edited by: नितेश श्रीवास्तव
दिल्ली में लॉकडाउन के ऐलान के साथ ही प्रवासी श्रामिकों के पलायन का सिलसिला तेज हो गया. किसी के सिर पर बोरी है तो किसी ने कंधों पर बैग के साथ बाकी जरूरी सामानों को बांधा हुआ है. कोई सूटकेस को पकड़े दिखा तो कोई गोद में बच्चे लिए अपने गांव की तरफ जाती बस को तलाश रहा है. लोगों से खचाखच भरे आनंद विहार बस अड्डे पर कोई भी बस आती है तो चंद मिनटों के अंदर भर जाती है.
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