दिल्ली में बिजली की कीमत
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दिल्ली में कामर्शियल रसोई गैस के रिफिल की कीमत 25.5 रुपये घटी, अन्य शहरों में भी कम हुए दाम
- Saturday October 1, 2022
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में उछाल के साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में शुक्रवार को 40 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई. इससे देश में बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने और वाहन चलाने में इस्तेमाल होने वाली गैस महंगी हो जाने की आशंका जताई गई है. दूसरी तरफ शनिवार को दिल्ली में कामर्शियल रसोई गैस सिलेंडर (Commercial LPG cylinder) के रिफिल की कीमत 25.5 रुपये कम कर दी गई है.
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महिंद्रा ने बिजली से चलने वाला तिपहिया इलेक्ट्रिक लॉन्च किया, सिंगल चार्ज में 80 किमी चलती है
- Thursday January 27, 2022
- Written by: बिक्रम कुमार सिंह
महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने बिजली से चलने वाला तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) ई-अल्फा कार्गो पेश किया है. दिल्ली में इसकी कीमत 1.44 लाख रुपये है. महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी दरअसल वाहन विनिर्माता कम्पनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की अनुषंगी कंपनी है.
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क्या कभी स्कूली शिक्षा पर भी लड़ा जाएगा चुनाव?
- Thursday February 6, 2020
- रवीश कुमार
90 के दशक के आखिरी हिस्से से अचानक भारत की राजनीति को बिजली सड़क पानी के मुद्दे से पहचाना जाने लगा. इससे बिजली और सड़क का कुछ भला तो हुआ लेकिन पानी पीछे छूट गया. शिक्षा और स्वास्थ्य का तो नंबर ही नहीं आया. दिल्ली विधानसभा का चुनाव शायद पहला चुनाव है जिसमें शिक्षा का सवाल केंद्र में आते आते रह गया. बेशक दिल्ली का चुनाव स्कूल से शुरू होता है लेकिन शाहीन बाग को पाकिस्तान, गद्दार और आतंकवाद से जोड़ने की सियासी आंधी के कारण पिछड़ता जा रहा है. हिन्दी प्रदेशों के लिए जिनमें से दिल्ली शिक्षा का आखिरी पड़ाव है, यह मुद्दा नई राजनीति को जन्म दे सकता है या दे सकता था. बिहार यूपी और अन्य हिन्दी प्रदेशों से शिक्षा के कारण भी लाखों लोगों का पलायन हुआ है. लोगों ने खराब स्कूलों और कॉलेज की कीमत इतनी चुकाई है कि वे बच्चों को पढ़ाने के लिए शहर बदलने लगे और ट्यूशन और कोचिंग का खर्चा उनकी ज़िंदगी की जमा पूंजी निगल गया. स्कूल अगर राजनीति के केंद्र में आता है तो यह मसला दिल्ली सहित हिन्दी प्रदेशों की राजनीति बदल देगा.
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NDTV इंडिया की पड़ताल : गाजियाबाद में रिश्वत की रोशनी, तीन की जगह 15 हजार में मीटर
- Wednesday December 23, 2015
- Reported by: Suryakant Pathak, Edited by: Parimal Kumar
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में 3000 रुपये के बिजली के मीटर घरों में लगवाने के लिए लोगों को 15000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। इंदिरापुरम से सटे इलाके मइउद्दीनपुर कनावनी इलाके के चमन कॉलोनी के लोगों को अपने घरों तक रोशनी पहुंचाने के लिए मीटर की कीमत 5-5 गुनी ज्यादा अदा करनी पड़ रही है।
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दिल्ली में पावर सब्सिडी का सच : कम बिजली जलाइए, ऊंची कीमत चुकाइए
- Friday April 3, 2015
दिहाड़ी मजदूर, स्टूडेंट्स या बाकी लोग, जो किराएदार हैं, उनको इस सब्सिडी की सुविधा नहीं मिल रही। इनकी बिजली की खपत भले निचले स्लैब पर सिमटा हो, लेकिन रेट सबसे ऊपर के स्लैब का देना होता है।
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केजरीवाल ने मजदूर के घर की काटी गई बिजली जोड़ी
- Saturday October 6, 2012
- NDTVIndia
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली कंपनियों और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उस मजदूर के घर पहुंचे, जिसके घर की बिजली बिल का भुगतान न करने की वजह से काट दी गई थी।
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दिल्ली में कामर्शियल रसोई गैस के रिफिल की कीमत 25.5 रुपये घटी, अन्य शहरों में भी कम हुए दाम
- Saturday October 1, 2022
- Reported by: हिमांशु शेखर मिश्र
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में उछाल के साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में शुक्रवार को 40 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई. इससे देश में बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने और वाहन चलाने में इस्तेमाल होने वाली गैस महंगी हो जाने की आशंका जताई गई है. दूसरी तरफ शनिवार को दिल्ली में कामर्शियल रसोई गैस सिलेंडर (Commercial LPG cylinder) के रिफिल की कीमत 25.5 रुपये कम कर दी गई है.
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महिंद्रा ने बिजली से चलने वाला तिपहिया इलेक्ट्रिक लॉन्च किया, सिंगल चार्ज में 80 किमी चलती है
- Thursday January 27, 2022
- Written by: बिक्रम कुमार सिंह
महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने बिजली से चलने वाला तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) ई-अल्फा कार्गो पेश किया है. दिल्ली में इसकी कीमत 1.44 लाख रुपये है. महिंद्रा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी दरअसल वाहन विनिर्माता कम्पनी महिंद्रा एंड महिंद्रा की अनुषंगी कंपनी है.
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क्या कभी स्कूली शिक्षा पर भी लड़ा जाएगा चुनाव?
- Thursday February 6, 2020
- रवीश कुमार
90 के दशक के आखिरी हिस्से से अचानक भारत की राजनीति को बिजली सड़क पानी के मुद्दे से पहचाना जाने लगा. इससे बिजली और सड़क का कुछ भला तो हुआ लेकिन पानी पीछे छूट गया. शिक्षा और स्वास्थ्य का तो नंबर ही नहीं आया. दिल्ली विधानसभा का चुनाव शायद पहला चुनाव है जिसमें शिक्षा का सवाल केंद्र में आते आते रह गया. बेशक दिल्ली का चुनाव स्कूल से शुरू होता है लेकिन शाहीन बाग को पाकिस्तान, गद्दार और आतंकवाद से जोड़ने की सियासी आंधी के कारण पिछड़ता जा रहा है. हिन्दी प्रदेशों के लिए जिनमें से दिल्ली शिक्षा का आखिरी पड़ाव है, यह मुद्दा नई राजनीति को जन्म दे सकता है या दे सकता था. बिहार यूपी और अन्य हिन्दी प्रदेशों से शिक्षा के कारण भी लाखों लोगों का पलायन हुआ है. लोगों ने खराब स्कूलों और कॉलेज की कीमत इतनी चुकाई है कि वे बच्चों को पढ़ाने के लिए शहर बदलने लगे और ट्यूशन और कोचिंग का खर्चा उनकी ज़िंदगी की जमा पूंजी निगल गया. स्कूल अगर राजनीति के केंद्र में आता है तो यह मसला दिल्ली सहित हिन्दी प्रदेशों की राजनीति बदल देगा.
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NDTV इंडिया की पड़ताल : गाजियाबाद में रिश्वत की रोशनी, तीन की जगह 15 हजार में मीटर
- Wednesday December 23, 2015
- Reported by: Suryakant Pathak, Edited by: Parimal Kumar
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में 3000 रुपये के बिजली के मीटर घरों में लगवाने के लिए लोगों को 15000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। इंदिरापुरम से सटे इलाके मइउद्दीनपुर कनावनी इलाके के चमन कॉलोनी के लोगों को अपने घरों तक रोशनी पहुंचाने के लिए मीटर की कीमत 5-5 गुनी ज्यादा अदा करनी पड़ रही है।
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दिल्ली में पावर सब्सिडी का सच : कम बिजली जलाइए, ऊंची कीमत चुकाइए
- Friday April 3, 2015
दिहाड़ी मजदूर, स्टूडेंट्स या बाकी लोग, जो किराएदार हैं, उनको इस सब्सिडी की सुविधा नहीं मिल रही। इनकी बिजली की खपत भले निचले स्लैब पर सिमटा हो, लेकिन रेट सबसे ऊपर के स्लैब का देना होता है।
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केजरीवाल ने मजदूर के घर की काटी गई बिजली जोड़ी
- Saturday October 6, 2012
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अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली कंपनियों और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उस मजदूर के घर पहुंचे, जिसके घर की बिजली बिल का भुगतान न करने की वजह से काट दी गई थी।
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