Meri Diary
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Delhi Me Akele Rehne Wali Ladki Ki Diary: बचपन वाली होली, जो आज भी रंगों से ज्यादा यादों में बसी है
- Friday February 27, 2026
- Written by: दीक्षा सिंह
Bachpan Ki Holi Wali Diary: यही थी मेरी असली होली. अब न तो हैंडपंप है, न वो 12 घरों वाली कॉलोनी, न बिना कुछ सोचे रंग लगाने की आजादी. अब लोग पहले पूछते हैं, रंग ऑर्गेनिक है न? स्किन पर रिएक्शन तो नहीं होगा? लेकिन सच कहूं, तब रंग सिर्फ चेहरे पर लगते थे… लेकिन आज यादें दिल पर लगी रहती हैं.
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Doosre se Homework Karane Wale Bachhe Ki Diary: दो पन्नों के होमवर्क के बदले मां ने दो घंटे घुमाया, फिर मुंह में नहीं जहन में भी घुला केर सांगरी का स्वाद
- Wednesday February 25, 2026
- Written by: अनिता शर्मा
'कैर हरे रंग की होगी, बेर जैसी, ध्यान से तोड़ना कांटे वाले झाड़ पर लगती है, कांटे चूभे तो चांटे पड़ेंगे' 'सांगरी का पेड़ फलाने मामा के खेत में है' 'वो लंबी सी फली होती है, हरी-हरी, पतली-पतली' देखो बबूल की फली न ले आना, वो बबूल की फली से जरा छोटी और हरी होगी...'
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Sex Worker ki Diary: मैं 13 साल की उम्र से सेक्स वर्कर, बेटी को इस बारे में नहीं पता, उसे अपने जैसा बनाऊंगी!
- Wednesday February 25, 2026
- Written by: अनिता शर्मा
Sex Worker's Diary : इन सालों में मैंने खूब पैसे जोड़े. अपने घर गई, उनका पक्का मकान बनवाया, उन्हें पैसे दिए. लेकिन उनकी बेटी होने के बावजूद वहां मुझे कभी सम्मान नहीं मिला. मैं सिर्फ एक पैसे देने वाली लड़की थी उनके लिए.
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