देखने में एक साधारण सी गांव की लड़की, जो अक्सर खेतों में बकरी चराते हुए दिख जाती है. लेकिन ठहरिए, यह साधारण होते हुए भी असाधारण है, क्योंकि दूसरी लड़कियों अलग बकरी चराते समय उसके हाथ में ज्यादातर एक किताब रहती है. नाव्या मीणा, बकरियों को चराते हुए भी पढ़ती रहती है. इस साधारण सी लड़की की ये असाधारण कहानी है. जयपुर और सीकर जिले के सरहद पर बेस एक छोटे से गांव लुनियावास के एक दूर दराज़ की ढाणी लामिया में रहने वाली नाव्या मीणा ने राजस्थान बोर्ड परीक्षा में टॉप किया है, 99.60 फीसदी मार्क्स हासिल करके वो पूरे प्रदेश में आर्ट्स में टॉपर रही है.

"आप मुझे देखोगे, तो मेरे हाथ में बुक ही मिलेगी"
जिस गांव को लोग रेनवाल किशनगढ़ तहसील के बहार जानते तक नहीं थे, वहां आज गाड़ियों का तांता लगा हुआ है. ब्लॉक डेवलपमेंट अफसर से लेकर जिला प्रधान और शिक्षा के उच्च अधिकारीयों तक, सभी नाव्या मीणा के घर को ढूंढ़ते हुए, पकी सड़क से उतर के कच्चे रास्ते पर चलते हुए उसकी ढाणी लामिया तक पहुंच रहे है.
खेतों के बीच में एक 4 कमरे के मकान में नाव्या अपने 4 बहन और 1 भाई के साथ रहती है, घर में सिर्फ एक मां और नानी है. पिता मजदूरी करने के लिए गुजरात गए हुए हैं. पहले पिता भी खेती ही करते थे, लेकिन जैसे-जैसे कुएं में पानी सूखता गया, तो उन्होंने मज़दूरी करना शुरू कर दिया. 7 लोगों के परिवार का पालन पोषण करना था. नाव्या के पिता अशोक मीणा अब गुजरात में टाइल्स का काम करते हैं.

"जब पापा को पता चला की मैंने टॉप किया है तो वो बहुत इमोशनल हो गए, रोने लग गए. उन्होंने हमेशा हमें मोटीवेट किया है. घर के संसाधन बहुत सीमित है. पापा की तबियत ठीक नहीं रहती है, लेकिन फिर भी वो घर से दूर गुजरात में हमारे लिए मजदूरी करने जाते हैं और 20 से 25,000 रुपये कमाते है. पापा से कोई चीज़ मांगी तो कभी मना नहीं करते. हम पांच बहने हैं, मैं तीसरे नंबर पर हूं, लेकिन घर में कोई भेद भाव नहीं है मम्मी तो हमें बेटा ही कहती है. हमारे पापा हमारे लिए काम करते हैं घर से दूर, तो हमें भी कुछ करना है उनके लिए, इसलिए हम सब पढ़ाई पर ध्यान देते है "
"रोज 4.30 बजे सुबह उठ जाती हूं और गरम पानी पीकर मैडिटेशन करती हूं, एक दिया जला के उसपे ध्यान करती हूं, सुबह का वक्त सही रहता है पढ़ाई के लिए." बोर्ड एग्जाम भले ही खत्म हो गए हों, लेकिन नाव्या मीणा के लिए मंजिल अभी दूर है.

" UPSC क्रैक करने का ड्रीम है मेरा " कहती है नाव्या
नव्या कहती हैं कि संसाधन सीमित हैं, तो मंज़िल तक पहुंचने का रास्ता स्कूल के शिक्षक बीरबल सर ने दिया है. इन दिनों नाव्या बीएसटीसी एग्जाम की तयारी कर रही हैं. अगर प्राइमरी टीचर बन गयी तो नौकरी लग जाएगी और साथ साथ UPSC और अन्य कम्पटीशन की तैयारी कर सकेंगी. बीरबल सिंह महला फ़ौज से रिटायर हो चुके हैं और अब राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लुनियावास रेनवाल में सीनियर टीचर हैं.
जिसने रास्ता दिखाया-

नाव्या कहती हैं कि टीचर्स से मैंने सीखा है सुबह उठ कर गरम पानी पिओ, सेहत के लिए अच्छा रहता है सेहत अच्छी रहेगी तो क्लासेज भी मिस नहीं होगी." जब हमने नव्या से पूछा कि उनकी दिनचर्या कैसी रहती है तो नव्या ने बातया -

...और ये कहकर नव्या मुस्कुरा दी.
"हम सब में पढ़ाई को लेकर बहुत कम्पटीशन रहते है, मैं और मेरी बहने, बड़ी दो अभी कॉलेज में है और छोटी वाली 10th में लेकिन हम सब एक दुसरे को देख के मोटीवेट होते है, किसने कितना पढ़ा, किसकी आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स है या नहीं "
मनोरंजन का समय मिलता है या फिर पढ़ती ही रहते हो?
"मुझे डांस करना बहुत पसंद है, राजस्थानी डांस, लोक नृत्य और फ़ोन पर हम राजस्थान रूट्स के गाने देखते है अक्षय कुमार की पिक्चर केसरी का गण शेरा मुझे बहुत पसंद है, घर में फ़ोन एक ही है तो हम कभी खाना खाते समय गाने देख लेते है या फिर कहानियां देखते है यूट्यूब पर, धुरंधर के बारे में मैंने पढ़ा है लेकिन पिक्चर कभी नहीं देखा है, पिक्चर हॉल मैं कभी नहीं गयी हूं, मनोरंजन सिर्फ फोन पर. मेरी बहन अनु का इंस्टाग्राम अकाउंट है तो जब मैंने टॉप किया मैंने उसपे फोटो लगवाए, हम पांचों बहनो का ये ही इंस्टाग्राम अकाउंट है."
बोर्ड एग्जाम हो गए है, लेकिन आज भी नाव्या मीणा पढ़ रही है, कहां से आता है इतना मोटिवेशन
"मेरी माता पिता मुझे पढ़ने देते है, लेकिन आज यहां सभी लड़कियां मोटीवेट है, लड़कियों को छूट होनी चाहिए पढ़ने के लिए, घर से बहार जाने के लिए, मैं तो इंडिपेंडेंट हूं, लेकिन मैंने देखा है कई बार पेरेंट्स लड़कियों को पढ़ने नहीं देते क्योंकि उनके मन में डर रहते है की अगर कुछ हो गया तो समाज में कैसा रहेगा, लेकिन यहां ऐसा नहीं है हमारा माहौल अच्छा है, मैं रोज़ 6 किलोमीटर पैदल स्कूल से आना जाना करती हूँ, मुझे डर नहीं लगता और कोई प्रॉब्लम भी नहीं होती, स्कूल में हमारे टीचर्स एक दम पैरेंटल है प्रिंसिपल मुकेश सर, बीरबल सर, शोभाग और अशोक सर, बीरबल सर तो हमें खो खो भी खिकते है, आज हमारा स्कूल खो खो में नेशनल खेल के आया है, मुझे खुद भी खो खो खेलना बहुत पसंद है "

किसी चीज़ का अफसोस?
"हमारे स्कूल में 12th में सिर्फ आर्ट्स ही है विज्ञान और कॉमर्स की पढ़ाई नहीं है क्योंकि स्टाफ नहीं है. अब मैंने राजस्थान टॉप किया है तो हो सकता है की स्कूल का अच्छा प्रदर्शन देख के यहां विभाग साइंस की पढ़ाई भी शुरू कर दें."
जो अवसर मिला उससे जीत में तब्दील कर दिखाया. साइंस की पढ़ाई का अवसर नहीं मिला 'तो आर्ट्स में ही टॉप कर गयी. ये सिर्फ नाव्या मीणा की कहानी ही नहीं लेकिन उन बेटियों की कहानी है जो राजस्थान के दूर दराज के छोटे छोटे गांव में रहती हैं, लेकिन सपने बड़े देखती हैं.
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