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Kamal Khan Blog

'Kamal Khan Blog' - 24 News Result(s)
  • एक ख़त कमाल के नाम

    एक ख़त कमाल के नाम

    कमाल साहब, हम दोनों को जो चीज़ जोड़ती थी, वह भाषा भी थी- लफ़्ज़ों के मानी में हमारा भरोसा, शब्दों की नई-नई रंगत खोजने की हमारी कोशिश और अदब की दरबानी का हमारा जज़्बा. पत्रकारिता के सतहीपन ने आपको भी दुखी किया और मुझे भी.

  • जेल से रिहा होकर कमाल आर खान ने किया पहला ट्वीट, लिखा- अब लुंगा बदला

    जेल से रिहा होकर कमाल आर खान ने किया पहला ट्वीट, लिखा- अब लुंगा बदला

    केआरके एक सोशल मीडिया सेलेब बन गए हैं, जो फिल्मों, टीवी शो और ट्रेलरों पर समीक्षा कर रहे हैं. उन्हें एक्टर्स को लेकर तीखी आलोचनाओं के लिए जाना जाता है. कई बार ट्विटर पर इसे लेकर विवाद भी हुआ. 

  • जिस पेशे को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया...

    जिस पेशे को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया...

    हज़ार दुखों से गुज़र रही भारत की पत्रकारिता का दुख आज हज़ार गुना गहरा लग रहा है. जिस पेश को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया है. कमाल ख़ान हमारे बीच नहीं हैं. हम देश और दुनिया भर से आ रही श्रद्धांजलियों को भरे मन से स्वीकार कर रहे हैं. आप सबकी संवेदनाएं बता रही हैं कि आपके जीवन में कमाल ख़ान किस तरीके से रचे बचे हुए थे. कमाल साहब की पत्नी रुचि और उनके बेटे अमान इस ग़म से कभी उबर तो नहीं पाएंगे लेकिन जब कभी आपके प्यार और आपकी संवेदनाओं की तरफ उनकी नज़र जाएगी, उन्हें आगे की ज़िंदगी का सफर तय करने का हौसला देगी. उन्हें ग़म से उबरने का सहारा मिलेगा कि कमाल ख़ान ने टीवी की पत्रकारिता को कितनी शिद्दत से सींचा था. एनडीटीवी से तीस साल से जुड़े थे. एक ऐसे काबिल हमसफर साथी को अलविदा कहना थोड़ा थोड़ा ख़ुद को भी अलविदा कहना है. 

  • सबके हिस्से के अपने "कमाल" सर...

    सबके हिस्से के अपने "कमाल" सर...

    कमाल सर की कहानियां में जो सब्र था वो उनकी शख्सियत में भी था. बात में भी कभी हड़बड़ी नहीं आराम से जो पूछा, जैसी मदद मांगी उन्होंने कभी मना नहीं किया. कई बार उनके साथ लाइव करने पर उनको सुनना लंबा लगा लेकिन बोझिल नहीं हर एक शब्द उनकी समझ, लगन, अध्ययन में पिरोया हुआ.  

  • तहज़ीब की एक अलग किताब की तरह थे कमाल खान

    तहज़ीब की एक अलग किताब की तरह थे कमाल खान

    कमाल खान के बारे में मैं रात तक बोल सकता हूं. जितनी शिद्दत से और समझदारी से उन्‍होंने अयोध्‍या की रिपोर्टिंग की है पिछले 20-25 साल में तो सब जाकर देखने लायक है कि वे किस तरह के हिंदुस्‍तान के बारे में आवाज दे रहे थे.

  • अब कोई दूसरा कमाल ख़ान नहीं होगा

    अब कोई दूसरा कमाल ख़ान नहीं होगा

    वे अक्खड़ भी थे क्योंकि अनुशासित थे. इसलिए ना कह देते थे. वे हर बात में हां कहने वाले रिपोर्टर नहीं है. कमाल ख़ान का हां कह देने का मतलब था कि न्यूज़ रूम में किसी ने राहत की सांस ली है. वे नाजायज़ या ज़िद से ना नहीं कहते थे बल्कि किसी स्टोरी को न कहने के पीछे के कारण को विस्तार से समझाते थे.

  • कमाल सर की याद में- जो मेरे मेंटॉर, सहकर्मी और दोस्त थे....

    कमाल सर की याद में- जो मेरे मेंटॉर, सहकर्मी और दोस्त थे....

    आज अंगुलियों पर चलने वाली, तेजी से भागती पत्रकारिता की दुनिया में वो एक अपवाद थे और मैं ये पूर्व गर्व के साथ कह सकता हूं कि वो NDTV के उन दिग्गजों में शामिल थे जो अपने सिद्धांतों से कभी नहीं हटे, पत्रकारिता की दुनिया में बेस्ट थे वो, और पत्रकारिता के ठोस सिद्धांतों पर चलने वाले हम जैसे लोगों के गुरू थे.

  • हमने कमाल को देखा है

    हमने कमाल को देखा है

    वे कई मायनों में अनूठे और अद्वितीय थे. टीवी खबरों की तेज़ रफ़्तार भागती-हांफती दुनिया में वे अपनी गति से चलते थे. यह कहीं से मद्धिम नहीं थी. लेकिन इस गति में भी वे अपनी पत्रकारिता का शील, उसकी गरिमा बनाए रखते थे. यह दरअसल उनके व्यक्तित्व की बुनावट में निहित था. जीवन ने उन्हें पर्याप्त सब्र दिया था. वे तेज़ी से काम करते थे, लेकिन जल्दबाज़ी में नहीं रहते थे.

  • आबिद के भी कृष्ण...

    आबिद के भी कृष्ण...

    मथुरा के एक ग़रीब मुस्लिम ठेले वाले के ठेले से "कृष्ण" का नाम मिटाया जा सकता है लेकिन उन्हें सांझी संस्कृति की विरासत से मिटाना नामुमकिन है.

  • जब लखनऊ पुलिस रात भर मुसाफिरों को घर पहुंचाती रही

    जब लखनऊ पुलिस रात भर मुसाफिरों को घर पहुंचाती रही

    लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ऐसा नजारा पहले कभी देखा न था. मंगलवार आधी रात से देश की सारी डोमेस्टिक फ्लाइट्स बंद होने का एलान था. ऐसे में कल रात 8 बजे के बाद एक-एक कर 6 फ्लाइट्स गोआ,मुम्बई,चंडीगढ़,दिल्ली से लैंड कीं. यूं तो आखिरी फ्लाइट दिल्ली से 12 बजे आनी थी लेकिन वो सवा बजे रात को आई. लेकिन लखनऊ में तीन दिन से लॉकडाउन होने की वजह से मुसाफिरों के लिए न तो कोई टैक्सी थी और न ही लखनऊ में रहने वाला कोई शख्स अपने घर से कोई गाड़ी मंगवा सकता था.

'Kamal Khan Blog' - 24 News Result(s)
  • एक ख़त कमाल के नाम

    एक ख़त कमाल के नाम

    कमाल साहब, हम दोनों को जो चीज़ जोड़ती थी, वह भाषा भी थी- लफ़्ज़ों के मानी में हमारा भरोसा, शब्दों की नई-नई रंगत खोजने की हमारी कोशिश और अदब की दरबानी का हमारा जज़्बा. पत्रकारिता के सतहीपन ने आपको भी दुखी किया और मुझे भी.

  • जेल से रिहा होकर कमाल आर खान ने किया पहला ट्वीट, लिखा- अब लुंगा बदला

    जेल से रिहा होकर कमाल आर खान ने किया पहला ट्वीट, लिखा- अब लुंगा बदला

    केआरके एक सोशल मीडिया सेलेब बन गए हैं, जो फिल्मों, टीवी शो और ट्रेलरों पर समीक्षा कर रहे हैं. उन्हें एक्टर्स को लेकर तीखी आलोचनाओं के लिए जाना जाता है. कई बार ट्विटर पर इसे लेकर विवाद भी हुआ. 

  • जिस पेशे को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया...

    जिस पेशे को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया...

    हज़ार दुखों से गुज़र रही भारत की पत्रकारिता का दुख आज हज़ार गुना गहरा लग रहा है. जिस पेश को अपने पसीने से कमाल ख़ान ने सींचा वो अब उनसे वीरान हो गया है. कमाल ख़ान हमारे बीच नहीं हैं. हम देश और दुनिया भर से आ रही श्रद्धांजलियों को भरे मन से स्वीकार कर रहे हैं. आप सबकी संवेदनाएं बता रही हैं कि आपके जीवन में कमाल ख़ान किस तरीके से रचे बचे हुए थे. कमाल साहब की पत्नी रुचि और उनके बेटे अमान इस ग़म से कभी उबर तो नहीं पाएंगे लेकिन जब कभी आपके प्यार और आपकी संवेदनाओं की तरफ उनकी नज़र जाएगी, उन्हें आगे की ज़िंदगी का सफर तय करने का हौसला देगी. उन्हें ग़म से उबरने का सहारा मिलेगा कि कमाल ख़ान ने टीवी की पत्रकारिता को कितनी शिद्दत से सींचा था. एनडीटीवी से तीस साल से जुड़े थे. एक ऐसे काबिल हमसफर साथी को अलविदा कहना थोड़ा थोड़ा ख़ुद को भी अलविदा कहना है. 

  • सबके हिस्से के अपने "कमाल" सर...

    सबके हिस्से के अपने "कमाल" सर...

    कमाल सर की कहानियां में जो सब्र था वो उनकी शख्सियत में भी था. बात में भी कभी हड़बड़ी नहीं आराम से जो पूछा, जैसी मदद मांगी उन्होंने कभी मना नहीं किया. कई बार उनके साथ लाइव करने पर उनको सुनना लंबा लगा लेकिन बोझिल नहीं हर एक शब्द उनकी समझ, लगन, अध्ययन में पिरोया हुआ.  

  • तहज़ीब की एक अलग किताब की तरह थे कमाल खान

    तहज़ीब की एक अलग किताब की तरह थे कमाल खान

    कमाल खान के बारे में मैं रात तक बोल सकता हूं. जितनी शिद्दत से और समझदारी से उन्‍होंने अयोध्‍या की रिपोर्टिंग की है पिछले 20-25 साल में तो सब जाकर देखने लायक है कि वे किस तरह के हिंदुस्‍तान के बारे में आवाज दे रहे थे.

  • अब कोई दूसरा कमाल ख़ान नहीं होगा

    अब कोई दूसरा कमाल ख़ान नहीं होगा

    वे अक्खड़ भी थे क्योंकि अनुशासित थे. इसलिए ना कह देते थे. वे हर बात में हां कहने वाले रिपोर्टर नहीं है. कमाल ख़ान का हां कह देने का मतलब था कि न्यूज़ रूम में किसी ने राहत की सांस ली है. वे नाजायज़ या ज़िद से ना नहीं कहते थे बल्कि किसी स्टोरी को न कहने के पीछे के कारण को विस्तार से समझाते थे.

  • कमाल सर की याद में- जो मेरे मेंटॉर, सहकर्मी और दोस्त थे....

    कमाल सर की याद में- जो मेरे मेंटॉर, सहकर्मी और दोस्त थे....

    आज अंगुलियों पर चलने वाली, तेजी से भागती पत्रकारिता की दुनिया में वो एक अपवाद थे और मैं ये पूर्व गर्व के साथ कह सकता हूं कि वो NDTV के उन दिग्गजों में शामिल थे जो अपने सिद्धांतों से कभी नहीं हटे, पत्रकारिता की दुनिया में बेस्ट थे वो, और पत्रकारिता के ठोस सिद्धांतों पर चलने वाले हम जैसे लोगों के गुरू थे.

  • हमने कमाल को देखा है

    हमने कमाल को देखा है

    वे कई मायनों में अनूठे और अद्वितीय थे. टीवी खबरों की तेज़ रफ़्तार भागती-हांफती दुनिया में वे अपनी गति से चलते थे. यह कहीं से मद्धिम नहीं थी. लेकिन इस गति में भी वे अपनी पत्रकारिता का शील, उसकी गरिमा बनाए रखते थे. यह दरअसल उनके व्यक्तित्व की बुनावट में निहित था. जीवन ने उन्हें पर्याप्त सब्र दिया था. वे तेज़ी से काम करते थे, लेकिन जल्दबाज़ी में नहीं रहते थे.

  • आबिद के भी कृष्ण...

    आबिद के भी कृष्ण...

    मथुरा के एक ग़रीब मुस्लिम ठेले वाले के ठेले से "कृष्ण" का नाम मिटाया जा सकता है लेकिन उन्हें सांझी संस्कृति की विरासत से मिटाना नामुमकिन है.

  • जब लखनऊ पुलिस रात भर मुसाफिरों को घर पहुंचाती रही

    जब लखनऊ पुलिस रात भर मुसाफिरों को घर पहुंचाती रही

    लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ऐसा नजारा पहले कभी देखा न था. मंगलवार आधी रात से देश की सारी डोमेस्टिक फ्लाइट्स बंद होने का एलान था. ऐसे में कल रात 8 बजे के बाद एक-एक कर 6 फ्लाइट्स गोआ,मुम्बई,चंडीगढ़,दिल्ली से लैंड कीं. यूं तो आखिरी फ्लाइट दिल्ली से 12 बजे आनी थी लेकिन वो सवा बजे रात को आई. लेकिन लखनऊ में तीन दिन से लॉकडाउन होने की वजह से मुसाफिरों के लिए न तो कोई टैक्सी थी और न ही लखनऊ में रहने वाला कोई शख्स अपने घर से कोई गाड़ी मंगवा सकता था.